आस्था का संगम, सौहार्द्र का संदेश : हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकलीं तमन्ना मलिक
Tamanna Malik Kavad: भारतीय संस्कृति में महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब की दिल को एक छूने वाली तस्वीर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित असमोली क्षेत्र के गांव बदनपुर बसेई निवासी मुस्लिम महिला तमन्ना मलिक ने हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल भरकर अपनी आस्था और आपसी सम्मान का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
बुर्का पहने, कंधे पर कांवड़ ला रही मुस्लिम महिला तमन्ना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके साथ चल रहे श्रद्धालु बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे लगा रहे हैं और यह नजारा देखकर कहा जा सकता है कि आस्था की राहें भले अलग हों, लेकिन भाव एक ही होता है।
तमन्ना मलिक ऊंच-नीच और भेदभाव को पीछे छोड़ते हुए तीन साल पहले अमन त्यागी से विवाह किया था। दो पुत्रों की मां तमन्ना 10 फरवरी को हरिद्वार से गंगाजल लेने के लिए रवाना हुईं। उनकी यात्रा नूरपुर, नौगांवा सादात और अमरोहा होते हुए संभल तक पहुंचेगी। महाशिवरात्रि के दिन वे क्षेमनाथ तीर्थ पर जलाभिषेक करेंगी।
सामाजिक सद्भाव का जीवंत संदेश
उनका कहना है कि जब भी वे अन्य श्रद्धालुओं को कांवड़ लाते देखती थीं, उनके मन में भी श्रद्धा विश्वास पैदा होता था। इसी भावना से उन्होंने यह संकल्प लिया कि वह भी कांवड़ लाएंगी और अपने पति के धर्म का सम्मान करेंगी। उनके पति अमन त्यागी भी यही कहते हैं कि दोनों अपने-अपने धार्मिक विश्वासों के साथ एक-दूसरे के प्रति सम्मान के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस दृश्य को देखकर यह कहा जा सकता है कि यह पहल केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव का जीवंत संदेश है। यह हमें याद दिलाती है कि प्रेम, सम्मान और आस्था किसी एक धर्म की सीमा में बंधे नहीं होते।
समाज के लिए संदेश..
आज जब छोटी-छोटी बातों पर विभाजन की रेखाएं खींच दी जाती हैं, तब ऐसे उदाहरण हमारी एकता और विविधता को जोड़ने का काम करते हैं। धार्मिक विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यदि हर परिवार और हर व्यक्ति एक-दूसरे की आस्थाओं का सम्मान करना सीख ले, तो समाज में सौहार्द्र, शांति और भाईचारा खुद पनप जाएगा। जिसे देखकर हर कोई यह कह सकेगा कि भले ही धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत का रास्ता एक ही है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala