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Last Modified: शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026 (20:35 IST)

मेरठ में अंतरधार्मिक विवाह पर विवाद, विरोध के बाद रद्द हुई शादी, हिन्दू संगठनों ने की नारेबाजी

Meerut Interfaith Marriage Controversy
मेरठ में एक अंतरधार्मिक विवाह को लेकर बवाल मचा हुआ है निजी बैंक में कार्यरत आकांक्षा और शाहवेज (उर्फ साहिल) की शादी 13 फरवरी को होनी थी, दोनों पिछले छह वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। लेकिन कुछ हिंदू संगठनों के विरोध के बाद बैंक्वेट हॉल प्रबंधन ने बुकिंग रद्द कर दी। प्रशासन ने भी इस विवाह की अनुमति कैंसिल कर दी, लिहाजा यह विवाह रूक गया। 
 
आकांक्षा का कहना है कि वह बालिग है और सोच-समझकर विवाह का निर्णय लिया है। उसके अनुसार, पहले शाहवेज उसका पड़ोसी था और परिवार भी उसे लंबे समय से जानता है। आकांक्षा का दावा है कि उसके पिता, जिनका तीन वर्ष पूर्व निधन हो चुका है, भी इस रिश्ते के पक्ष में थे। उसकी मां और कुछ करीबी रिश्तेदार भी विवाह के लिए सहमत हैं। युवती का मां नज तझ स्पष्ट कर दिया कि उनकख दामाद सिर्फ शाहवेज होगा, जब मुझे आपत्ति नही है तो समाज कौन है अड़चन लगाने वाला।
 
विवाद तब बढ़ा जब युवती के चाचा प्रेमचंद ने इस रिश्ते को “लव जिहाद” बताते हुए गंगानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर शाहवेज के खिलाफ धर्मांतरण से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। चाचा का आरोप है कि उनकी भतीजी का ब्रेनवॉश किया गया है और संपत्ति हड़पने की नीयत से शादी की जा रही है।
 
इसी बीच कुछ हिंदू संगठनों ने शादी का विरोध करते हुए इसे धर्मांतरण का मामला बताया। आस पैराडाइज बैंक्वेट हॉल में महापंचायत बुलाने की घोषणा की गई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए महापंचायत की अनुमति नहीं दी और कई पदाधिकारियों को एहतियातन नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद कुछ कार्यकर्ता बैंक्वेट हॉल के बाहर जुटे और नारेबाजी की। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
 
देवभूमि उत्तराखंड से आयें हिन्दू रक्षा दल के ललित शर्मा ने कहा कि अगर शाहवेज ने.आकांक्षा से शादी की तो मौके पर मारपीट करके उसका दिमाग सही कर देंगे। गैर समुदाय के यह वो लोग है जो हिन्दू युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर तीन तलाक, हलाला और अपनी अन्य प्रथाओं में फांस लेते है। हमारी बहन बेटियों को स्लो पॉयजन देते है, इस धीमे जहर से सनातन बच्चियों को बचाना होगा। जब हम बचाना चाहते है तो झूठे मुकदमे लगायें जाते, रक्षा के लिए तलवार बांटते है तो सरकार रोक देती है, जेल भेज देती है। अगर बेटियां इन जेहादियों के जखल में फस जायेंगी तो उनके टुकड़े हो जायेंगे, गर्दन फ्रिज में मिलेगी। ये वो लोग है जो कश्मीर और बंगलादेश में हिन्दुओं को मार रहें है। इन लोगों का सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि सनातन बेटियों को घर लाओ, ज्यादा बच्चे पैदा करके जनसंख्या अनुपात बढ़ाओ और सरकार में भागेदारी करो, देश का नाश करो, लेकिन हम यह नही होने देंगे। इन लोगों को विदेशी फंडिंग है, तभी तो यह आकांक्षा जैसी युवतियों को 6 साल से झूठे प्रेमजाल में फांसे हुए है। जिन बच्चियों के पिता यख भाई नही होते उन्हें यह झांसे में लेते है। ऐसे बहन-बेटियों के भाई हम है। इस्लाम झूठा है ये ब्रेनवॉश करने का काम कर रहा है।
 
देहरादून से आयें जूना अखाड़े के संत अनुपम गिरि ने कहा कि मुसलमान के साथ सनातन युवती का विवाह बर्दाश्त नही होगा। विरोध में हम सड़कों पर है, जगह-जगह विरोध में चर्चा हो रही है यही महापंचायत है। यदि शाहवेज बौद्ध धर्म परिवर्तन की बात कर रहा है तो उससे पूछो, बौद्ध धर्म विदेश से आया है, वास्तव में वह धर्म परिवर्तन चाहता है तो हमारे पास लाओ, विधि विधान के साथ धर्म परिवर्तन होगा।
एसपी राघवेंद्र मिश्रा के अनुसार, युवक-युवती ने एडीएम कार्यालय में विवाह की अनुमति के लिए आवेदन किया था, जिसे निरस्त कर दिया गया। बैंक्वेट हॉल के मालिक ने भी पुलिस को सूचित किया कि उनके यहां कोई विवाह समारोह आयोजित नहीं होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
 
आकांक्षा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह अपनी मर्जी से शादी करना चाहती है और यदि विवाह होगा तो शाहवेज से ही होगा। उसने यह भी दावा किया कि उसने बौद्ध धर्म अपना लिया है और विवाह बौद्ध रीति से करने की योजना थी। कार्ड पर शाहवेज का निकनेम ‘साहिल’ छपने को लेकर उठे सवालों पर उसने कहा कि यह नाम उसे और उसकी मां को पसंद है।
 
शाहवेज के परिवार का कहना है कि दोनों परिवारों की सहमति से शादी तय हुई थी और उन्हें किसी प्रकार की संपत्ति या दहेज की कोई अपेक्षा नहीं है। परिवार का कहना है कि वे बच्चों की खुशी को प्राथमिकता देते हैं।
 
फिलहाल विवाह स्थगित है और मामला पुलिस जांच के दायरे में है। यह घटना अंतरधार्मिक विवाह, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक-सांप्रदायिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर एक बार फिर से नई बहस का विषय बन गई है। Edited by : Sudhir Sharma
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