श्रावण की आस्था, शिवभक्तों का उत्साह… कांवड़ यात्रा-2026 के स्वागत को मेरठ पूरी तरह तैयार
Meerut Kanwar Yatra: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र काल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव के शरीर की तपन शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर पवित्र नदियों का जल अर्पित किया था। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। इसी आस्था से परिपूर्ण होकर हर वर्ष करोड़ों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री और अन्य पवित्र घाटों से गंगाजल भरकर कंधे पर कांवड़ रखकर पैदल अपने-अपने शिवालयों तक पहुंचते है।
2026 में 30 जुलाई से श्रावण मास शुरू हो रहा है, जिसके चलते एक बार फिर शिवभक्ति का यह विराट उत्सव पूरे उत्तर भारत में दिखाई देगा। विगत वर्ष हरिद्वार से 4.50 करोड़ से अधिक कांवड़ उठाई गई थीं। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के शिवभक्त "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ेंगे। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मेरठ और मुजफ्फरनगर है, जहां लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन गुजरते हैं।
इसी विशाल धार्मिक आयोजन को सकुशल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मेरठ प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। रविवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय हॉल में जिलाधिकारी मेरठ एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ ने अधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में जनपद के पुलिस अधीक्षक, सभी क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी, एसडीएम, एसीएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, शिविरों की व्यवस्था, कांवड़ मार्गों की सुगमता, विभागीय समन्वय, कानून-व्यवस्था तथा आपातकालीन तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की।
कलेक्टर और एसएसपी के निर्देश
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि सभी विभाग शेष कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करें। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करें तथा किसी भी समस्या की सूचना मिलते ही तत्काल प्रभाव से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करें।
जिलाधिकारी डा. वी के सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग को विशेष निर्देश दिए गए कि कांवड़ मार्ग पर स्थित ढाबों, रेस्टोरेंट, रेहड़ी-पटरी और खाद्य सामग्री विक्रेताओं के लाइसेंस अथवा अस्थायी लाइसेंस की जांच की जाए। सभी प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस और रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराई जाए, ताकि श्रद्धालुओं और व्यापारियों के बीच किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे।
बरसात के मौसम को देखते हुए कांवड़ शिविरों में सांप एवं अन्य जहरीले जीवों से बचाव के लिए भी विशेष व्यवस्था की जा रही है। वन विभाग और कृषि विभाग संयुक्त रूप से एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार कर शिविर संचालकों को उपलब्ध कराएंगे, जिससे आवश्यक सावधानियां समय रहते अपनाई जा सकें।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक के अंत में जिलाधिकारी वीके सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडे ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता से ड्यूटी करें, आपसी समन्वय बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि शिवभक्तों की आस्था और उत्साह के इस महापर्व में उन्हें सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिले।
श्रावण का यह पावन पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। ऐसे में प्रशासन की तैयारी और जनसहयोग मिलकर कांवड़ यात्रा-2026 को सफल और यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

