उत्तर प्रदेश के मेरठ में ब्लैक फंगस के सर्वाधिक मामले, 6 की मौत

Author हिमा अग्रवाल| पुनः संशोधित शुक्रवार, 21 मई 2021 (18:32 IST)
(Mucormycosis) संक्रमण पूरे देश में तेजी से पैर पसार रहा है, जिसके चलते केंद्र सरकार ने राज्यों से अपील की है कि इसे अधिनियम 1897 के तहत महामारी घोषित करें। सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है।

अभी तक कोरोनावायर (Coronavirus) संक्रमण ने यूपी को बेहाल कर रखा था, वहीं ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों ने यूपी में बेचैनी पैदा कर दी है। में इस महामारी को नियंत्रण में करने के लिए मेरठ मेडिकल कालेज में वार्ड बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश का मेरठ ब्लैक फंगस का सबसे बड़ा केन्द्र बन गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में लगभग 168 मामले ब्लैक फंगस के सामने आए हैं, जिसमें से 72 मामले अकेले मेरठ के हैं। गुरुवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज में दो मौत ब्लैक फंगस से हुई हैं, जिसके बाद ब्लैक फंगस से मरने वालों की संख्या 6 पर पहुंच चुकी है।
लखनऊ के केजीएमयू में उपचाराधीन मेरठ की एक महिला की मौत के बाद ये आंकडा 7 हो गया है। मेरठ के विभिन्न अस्पतालों में ब्लैक फंगस के पेशेंट्स की हालत गंभीर बनी हुई है। हालांकि मेरठ के आनंद अस्पताल में ब्लैक फंगस से पीड़ित 11 पेशेंट्स का ऑपरेशन भी किया गया है। मेरठ मेडिकल कॉलेज, मुलामय सिंह मेडिकल कॉलेज, सुभारती मेडिकल कॉलेज समेत अन्य कई प्राइवेट कॉलेज में ब्लैक फंगस पीड़ित भर्ती हैं।
मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक 72 केस ब्लैक फंगस के अब तक सामने आए हैं। जिसमें आधे मेरठ जिले के हैं और आधे मेरठ के आसपास के जिले मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, हापुड़ के हैं। इसके उपचार की दवाइयां मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हैं। मांग के अनुरूप जांच करके अन्य अस्पतालों को भी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी अखिलेश मोहन ने बताया कि व्हाइट फंगस को ही ब्लैक फंगस कहते हैं। जब सफेद टीशू में इंफेक्शन होता है तो खून का रंग काला पड़ जाता है, जिसके चलते इसे ब्लैक फंगस कहा जाता है। ये फंगस जब नाक के रास्ते आंख और दिमाग तक पहुंच जाता है, तो ये पेशेंट की मौत का कारण बन जाता है। ये फंगस ट्रेसिंग से नहीं पकड़ा जा सकता है, इसे कुशल डॉक्टर समझकर ही इलाज कर सकते हैं।
मेरठ के डीएम के बालाजी के मुताबिक ब्लैक फंगस के लिए सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में 30 बेड का अलग से एक वार्ड बनाया जा रहा है। किसी भी तरह के पैनिक होने की जरूरत नहीं है, समुचित मात्रा में दवाएं मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध हैं।

सरकारी आंकड़े में भले ही मेरठ में 72 ब्लैक फंगस के पेशेंट हो, लेकिन हकीकत इससे इतर है। कुछ लोग प्राइवेट अस्पतालों में गुपचुप इलाज करा रहे हैं। वहीं, मरीजों की संख्या बढ़ने से मेरठ में स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ी हुई है। मुख्यमंत्री भी मेरठ पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।



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