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Written By UN
Last Modified: गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 (16:46 IST)

मध्य पूर्व युद्ध : ऊर्जा संकट का संवेदनशील देशों पर सर्वाधिक असर

Energy Crisis Amidst Middle East War Hits Vulnerable Nations Hardest
मध्य पूर्व में युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नौवहन (Shipping) के लगभग रुक जाने की स्थिति से अफ़्रीका और दक्षिण एशिया के उन विकासशील देशों के सामने ऊर्जा संकट गहरा गया है, जो आयातित तरल गैस, भोजन और उर्वरकों पर भारी रूप से निर्भर हैं।
 

स्थाई पर्यावरणीय नुकसान की चिंता बढ़ी

चूंकि तेल (Brent Crude) की क़ीमतें अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, ऐसे में बहुत से कामगारों और परिवारों ने तेल व कोयले के उपयोग की ओर रुख़ कर लिया है। इससे स्थाई पर्यावरणीय नुक़सान होने की चिन्ताएं बढ़ गई हैं जबकि कई देशों ने पहले ही ईंधन प्रयोग की मात्रा निर्धारित करने (Rationing) और कामकाज के लिए ऑनलाइन बैठकें करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
 
ईरान पर 28 फ़रवरी को इसराइल-अमेरिका की बमबारी शुरू होने के ठीक चार सप्ताह बाद, फ़ारस की खाड़ी के महत्वपूर्ण जलमार्ग में टैंकर यातायात के लगभग तत्काल बाधित होने से, दुनियाभर में तेल की आपूर्ति में कमी आई है, जिसके बाद प्राकृतिक गैस, कोयला, परिवहन, भोजन और उर्वरक भी प्रभावित हुए। 
संयुक्त राष्ट्र व्यापार संगठन (UNCTAD) के नीति विश्लेषण और अनुसन्धान शाखा के प्रमुख जूनियर डेविस का कहना है, अल्पविकसित देशों (LDCs) का केवल एक छोटा समूह ही शुद्ध ऊर्जा निर्यातक है जिनमें दक्षिण सूडान, अंगोला, चाड, मोज़ाम्बीक़, लाओ पीडीआर, म्यांमार और यमन प्रमुख हैं। 
 
उन्होंने आगे बताया, अधिकांश देश पूर्ण रूप में आयातक हैं, जिनमें निजेर, ज़ाम्बिया, रवांडा, इथियोपिया, तंज़ानिया, मेडागास्कर, टोगो, सूडान, युगांडा, नेपाल, नेपाल, इरिट्रिया, बेनिन, बांग्लादेश, कम्बोडिया और सेनेगल शामिल हैं।

देशों के सामने दुविधा

जूनियर डेविस ने अंगोला का उदाहरण देते बताया कि तेल निर्यातक विकासशील देशों को इस स्थिति से केवल सीमित लाभ ही मिल सकता है, क्योंकि कई देशों के पास घरेलू शोधन (refining) क्षमता की कमी है और उन्हें परिष्कृत पैट्रोलियम उत्पादों को फिर से उच्च क़ीमतों पर आयात करना पड़ता है।
 
उसके पड़ोसी देश ज़ाम्बिया को और भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वह मध्य पूर्व (विशेष रूप से UAE) से आयातित परिष्कृत ईंधन पर निर्भर है। साथ ही, अल्पविकसित देश, विदेशों में उत्पादित उर्वरकों पर भारी रूप से निर्भर हैं, क्योंकि बुनियादी निर्माण प्रक्रिया मीथन गैसे जैसे प्राकृतिक साधनों पर निर्भर करती है।
 

आय का आधे से अधिक हिस्सा भोजन ख़रीदने पर ख़र्च

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, दुनिया के 17 सबसे निर्धन देशों को अपनी अनाज ज़रूरतों का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा, आयात करना पड़ता है। इससे भी अधिक चिन्ताजनक बात यह है कि इतने ही अल्पविकसित देश निर्यात से होने वाली अपनी आय का आधे से अधिक हिस्सा केवल भोजन ख़रीदने पर ख़र्च करते हैं।
जूनियर डेविस ने कहा, इसका मतलब यह है कि ऊर्जा की बढ़ती क़ीमतें तेज़ी से खाद्य क़ीमतों में बदल जाएंगी और परिवारों के लिए भूख का जोखिम बढ़ जाएगा। ऊर्जा संकट का त्वरित समाधान खोजना आसान नहीं होगा, क्योंकि दुनिया के कई सबसे निर्धन देशों पर ऋण भुगतान का भारी बोझ है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसकी संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बार-बार आलोचना की है और वित्तीय क्षेत्र से निष्पक्षता व विकास के हित में सुधार करने का आग्रह किया है।
 

स्थिति सुखद नहीं होने वाली

जूनियर डेविस कहते हैं, यह देखते हुए कि कई विकासशील देश विदेशी ऋणदाताओं के कितने ऋणी हैं और पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक ख़र्च में कटौती का सामना कर रहे हैं, इसकी पूरी सम्भावना है कि परिवारों को अपनी ऊर्जा, भोजन और उर्वरकों के लिए अधिक रक़म का भुगतान करना होगा और उपयोग कम करना होगा। स्थिति सुखद नहीं होने वाली है।

संकटकालीन उपाय

बांग्लादेश : ईंधनके प्रयोग की मात्रा निर्धारित (Rationing) और बिजली प्रतिबन्ध (एयर-कंडीशनिंग, कूलिंग और प्रकाश उपकरणों के प्रयोग पर सीमा) और विश्वविद्यालयों को बन्द करने सहित अनिवार्य उपाय।
कम्बोडिया : सार्वजनिक क्षेत्र में ऊर्जा उपयोग में कटौती, दफ़्तरी बैठकों का ऑनलाइन आयोजन, सरकारी यात्राओं में कटौती, तापमान नियंत्रण, उपभोक्ताओं की मदद के लिए ईंधन कर में कमी और पम्प क़ीमतों पर सख़्त निगरानी।
इथियोपिया : ईंधन के मितव्ययी यानी किफ़ायती उपयोग को प्रोत्साहन।
म्यांमार : ईंधन प्रयोग की मात्रा में कटौती (Rationing), वैकल्पिक-ड्राइविंग दिन (Odd-Even), सार्वजनिक अधिकारियों के लिए अनिवार्य रूप सके अपने घरों से ही कामकाज करना (Remote working)।
लाओ पीडीआर : सिविल सेवकों के लिए Remote Work और कामकाज की पारियों में बदलाव,सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने वाले सार्वजनिक अभियान, ईंधन राशनिंग, परिवहन प्रतिबन्ध, ईंधन कर में कटौती और अनुदान की व्यवस्था।
सेनेगल : परिवारों और उद्योगों व कम्पनियों से ऊर्जा की खपत कम करने की अपील।
इस चिन्ताजनक पृष्ठभूमि के बीच, UNCTAD ने उल्लेख किया कि दुनिया के 15 अल्पविकसित देश, अभी तक कोविड के उतार-चढ़ाव वाले वर्षों से उबर नहीं पाए हैं और उनकी अर्थव्यवस्थाएं 2019 की तुलना में बदतर स्थिति में हैं।
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