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कृष्णा की वैजयंती माला कैसी थी, जानिए 5 रहस्य

Krishna
वैजयंती के वृक्ष पर बहुत ही सुंदर फूल उगते हैं। इसके फूल बहुत ही सुगंधित और सुंदर होते हैं। इसके बीजों की माला बनाई जाती है। वैजयंती माला यानी विजय दिलाने वाली माला वैजयंती के फूल भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को बहुत ही प्रिय है। श्रीकृष्ण को यह माला अत्यन्त प्रिय है। भगवान श्रीकृष्ण हमेशा अपने गले में इसे धारण करते थे।
 
 
1. कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने जब पहली बार राधा और उनकी सखियों के साथ रासलीला खेली थी, तब राधा ने उन्हें वैजयंती माला पहनाई थी। वैजयंती एक फूल का पौधा है जिसमें लाल तथा पीले फूल निकलते हैं। इस फूल कड़े दाने कभी टूटते नहीं, सड़ते नहीं और हमेशा चमकदार बने रहते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब तक जीवन है, तब तक ऐसे ही बने रहो। दूसरा यह माला एक बीज है। बीच सदैव भूमि से जुड़कर ही खुद को विस्तारित करता है। इसका अर्थ यह है कि कितने भी बड़े क्यों न बन जाओ हमेशा अपनी भूमि से जुड़े रहो।
 
 
2. कहते हैं कि श्रीकृष्‍ण वैजयंती माला दो कारणों से पहनते थे। पहला कारण यह कि वैजयन्ती माला में शोभा, सौन्दर्य और माधुर्य की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मीजी छिपी रहती हैं क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण के हृदय में श्रीराधा के चरण विराजमान रहते हैं इसलिए लक्ष्मीजी ने वैजयन्ती माला को अपना निवास बनाया जो हर समय भगवान के वक्षस्थल पर रहती है। दूसरा कारण यह कि श्रीकृष्ण को यह माला निरंतर राधा की याद दिलाती रहती थी जिसे पहले मथुरा का एक माली बनाकर लाता था।
 
 
3. कुछ विद्वानों का कहना है कि इस वैजयन्ती माला में पांच प्रकार की मणियों को गूंथा जाता है जो पंचमहाभूतों की प्रतीक हैं। इन मणियों के नाम है इन्द्रनीलमणि (पृथ्वी), मोती (जल), पद्मरागमणि (अग्नि), पुष्पराग (वायुतत्त्व) वज्रमणि अर्थात हीरा (आकाश)।
 
4. वैजयंती माला का महत्व : एक कथा के अनुसार इन्द्र ने अंहकारवश वैजयंतीमाला का अपमान किया था, परिणामस्वरूप महालक्ष्मी उनसे रुष्ट हो गईं और उन्हें दर-दर भटकना पड़ा था। देवराज इन्द्र अपने हाथी ऐरावत पर भ्रमण कर रहे थे। मार्ग में उनकी भेंट महर्षि दुर्वासा से हुई। उन्होंने इन्द्र को अपने गले से पुष्पमाला उतारकर भेंटस्वरूप दे दी। इन्द्र ने अभिमानवश उस पुष्पमाला को ऐरावत के गले में डाल दिया और ऐरावत ने उसे गले से उतारकर अपने पैरों तले रौंद डाला। अपने द्वारा दी हुई भेंट का अपमान देखकर महर्षि दुर्वासा को बहुत क्रोध आया। उन्होंने इन्द्र को लक्ष्मीहीन होने का श्राप दे दिया।
 
 
5. वैजयंती के लाभ : वैजयंती के फूल और माला अति शुभ और पवित्र है। वैजयंती फूलों का बहुत ही सौभाग्यशाली वृक्ष होता है। इसकी माला पहनने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस माला को किसी भी सोमवार अथवा शुक्रवार को गंगाजल या शुद्ध ताजे जल से धोकर धारण करना चाहिए।
 
वैजयंती के बीजों की माला से भगवान विष्णु या सूर्यदेव की उपासना करने से ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव खत्म हो जाता है। खासकर शनि का दोष समाप्त हो जाता है। इस माला को धारण करने से देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है। इसको धारण करने या प्रतिदिन इस माला से अपने ईष्ट का जप करने से नई शक्ति का संचार तथा आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है।
 
इस माला को धारण करने से मान सम्मान में वृद्धि होती है। मानसिक शांति प्राप्त होती है जिससे व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में मन लगाकर कार्य करता है। मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में वैजयंती के बीजों की माला धारण करना बहुत ही शुभ फलदायक है। यह सभी तरह की मनोकामना पूर्ण करता है। वैजयंती माला से 'ऊं नमः भगवते वासुदेवाय' का मन्त्र नित्य जापने से विवाह में आ रही हर प्रकार की बाधा दूर हो जाती है। जप के बाद केले के पेड़ की पूजा करना चाहिए।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें
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