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इस वटवृक्ष को माता पार्वती ने लगाया था, तीन तरह की सिद्धि होती पूर्ण

बुधवार,जनवरी 20, 2021
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गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं। उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां हैं। गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर 24 शक्ति बीज हैं। गायत्री मंत्र की उपासना करने से उन मंत्र शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं।
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आपने बहुत तरह की परिक्रमा के नाम सुने होंगे, जैसे नर्मदा परिक्रमा, गोवर्धन परिक्रमा, ब्रज मंडल की चौरासी कोस परिक्रमा, अयोध्या पंचकोशी परिक्रमा, प्रयाग पंचकोशी, छोटा चार धाम परिक्रमा, राजिम परिक्रमा, तिरुमलै और जगन्नाथ परिक्रमा, क्षिप्रा परिक्रमा ...
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धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिंद महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। निम्न प्रमुख समुद्र तटों से समुद्र को निहारना बहुत ही रोमांचक अनुभव होता है। ये ...
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धरती के 70.8% प्रतिशत भाग पर समुद्र है जिसमें से 14% भाग पर बसा है विराट हिंद महासागर। भारत तीन ओर से समुद्र से घिरा है और जिसके 13 राज्यों की सीमा से समुद्र लगा हुआ है। निम्न प्रमुख समुद्र तटों से समुद्र को निहारना बहुत ही रोमांचक अनुभव होता है। ये ...
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भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों महापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है। इस राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर बना था जिसे तोड़ दिया गया था। आओ जानते हैं ...
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भारत में सैंकड़ों सरोवर हैं जिनमें से तो कुछ लुप्त हो गए हैं। 'सरोवर' का अर्थ तालाब, कुंड या ताल नहीं होता। सरोवर को आप झील कह सकते हैं। श्री नगर, जम्मू, नैनीताल, जयपुर, उदयपुर और भोपाल आदि जगहो पर आपने झीलें देखी होगी।
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जगद्‍गुरु शंकराचार्य सहित कई साधु-संत पुण्य नगरी अवंतिका (वर्तमान में उज्जैन) जाने से पहले अपने अखाड़े के साथ इसी मंदिर के परिसर में रुका करते थे।
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दादाजी धूनीवाले का अपने भक्तों के बीच वही स्थान है जैसा कि शिर्डी के साईं बाबा का। उनका समाधि स्थल खंडवा शहर में है।
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देशभर में कई जगहों पर पाताल भैरव नाम से कई मंदिर है। उन्हीं मंदिरों में से खास 5 पाताल भैरव या भैरवी के मंदिर के बारे में जानिए रोचक जानकारी। हालांकि देश में और भी कई मंदिर हो सकते हैं परंतु उक्त मंदिरों की प्रसिद्धि ज्यादा है।
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जम्मू, कश्मीर और लद्दाख दरअसल तीन अलग-अलग क्षेत्र हैं। तीनों ही के कुछ भाग पाकिस्तान ने अपने कब्जे में ले रखे हैं। जम्मू संभाग का क्षे‍त्रफल पीर पंजाल की पहाड़ी रेंज में खत्म हो जाता है। इस पहाड़ी के दूसरी ओर कश्मीर है। अनुमानित रूप से कश्मीर का ...
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पंढरपुर की यात्रा आजकल आषाढ़ में तथा कार्तिक शुक्ल एकादशी को होती है। देवशयनी और देवोत्थान एकादशी को वारकरी संप्रदाय के लोग यहां यात्रा करने के लिए आते हैं। यात्रा को ही 'वारी देना' कहते हैं। प्रत्येक वर्ष देवशयनी एकादशी के मौके पर पंढरपुर में लाखों ...
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जम्मू, कश्मीर और लद्दाख दरअसल यह तीन अलग-अलग क्षेत्र हैं। भारत सरकार ने लद्दाख को संवैधानिक तरीके से वहां की जनता की मांग के अनुसार एक नया राज्य बना दिया गया है। भारत सरकार के 370 धारा हटाने के बाद लद्दाख को अलग केंद्रिय क्षेत्र घोषित कर दिया है। ...
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भारत की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित केरल भारत का सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक स्थलों वाला राज्य है। इसकी राजधानी तिरुवनन्तपुरम (त्रिवेन्द्रम) है। यहां की भाषा मलयालम है। पुदुच्चेरी (पांडिचेरि) और लक्षद्वीप ...
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देवी लक्ष्मी को धन और समृद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी के मंदिर में जाकर पूजन-अर्चन करने से आर्थिक संकट समाप्त हो जाता है। खासकर शुक्रवार को यहां जाना चाहिए। महालक्ष्मी और लक्ष्मी के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर ...
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शनिवार, 7 नवंबर 2020 को पुष्य नक्षत्र 8.05.00 से लगेगा, जो रविवार, 8 नवंबर 2020 को 8.45.00 बजे तक रहेगा।
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कन्याकुमारी हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है और साथ ही यह पर्यटन प्रेमियों के लिए बहुत ही अद्भुत डेस्टिनेशन है। भारत के दक्षिणी छोर पर बसा कन्याकुमारी हमेशा से ही टूरिस्ट्स की फेवरेट जगह रही है। आओ जानते हैं इस तीर्थ स्थान के बारे में खास 10 बातें।
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा में बहुत ही प्राचीन स्थान है जहां पर माता दंतेश्वरी का मंदिर है। परंपरा से देवी दन्तेश्वरी बस्तर राज्य के आदिवासियों की कुलदेवी हैं। इसे काकतीय राजाओं की कुलदेवी भी माना जाता है।
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देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है ...
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देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है ...
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