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जगन्नाथ पुरी में श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्रा देवी की अधूरी मूर्ति स्थापित होने की रोचक कथा

मंगलवार,जून 22, 2021
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भारत में गायत्री माता के कई प्राचीन मंदिर है परंतु राजस्थान के पुष्करजी में स्थित गायत्री माता के मंदिर को सबसे प्राचीन माना जाता है। पुष्करजी में एक तो माता सती का शक्तिपीठ है, दूसरा ब्रह्माजी का प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां पर गायत्री माता भी विराजमान ...
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विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां तीन गणेशजी विराजमान हैं चिंतामन, मंछामन और इच्छामन। ...
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15 जून को देवभूमि कैंची धाम में मेले का आयोजन होता है और यहां पर देश विदेश से बाबा नीम करौली के भक्त आते हैं। इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता। यह ...
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चार धाम की यात्रा करते समय हो सकता है कि ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम हो कि ये चारों धाम कहां हैं और इनकी यात्रा का महत्व क्या है।
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हिन्दू सनातन धर्म में चार धाम की यात्रा का बहुत ही महत्व है। मई माह में अक्सर चार धाम की यात्रा प्रारंभ होने के बारे में हम सुनते आएं हैं। परंतु यह चार धाम की यात्रा नहीं बल्कि एक धाम की ही यात्रा रहती है। आओ जानते हैं कि बड़ा चार धाम और और छोटा चार ...
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विश्व की एक मात्र उत्तर प्रवाह मान क्षिप्रा नदी के पास बसी सप्तपुरियों में से एक भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षा स्थली अवं‍तिका अर्थात उज्जैन को राजा महाकाल और विक्रमादित्य की नगरी कहा जाता है। यहां पर साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल, कालभैरव, ...
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पितरों की मुक्ति हेतु किए जाने वाले कर्म तर्पण, भोज और पिंडदान को उचित रीति से नदी के किनारे किया जाता है। इसके लिए देश में कुछ खास स्थान नियुक्त हैं। देश में श्राद्ध पक्ष के लिए लगभग 55 स्थानों को महत्वपूर्ण माना गया है।
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बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग काशी में है जिसे बाबा विश्वनाथ कहते हैं। काशी को बनारस और वाराणसी भी कहते हैं। शिव और काल भैरव की यह नगरी अद्भुत है जिसे सप्तपुरियों में शामिल किया गया है। दो नदियों 'वरुणा' और 'असि' के मध्य बसे होने के ...
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भारतीय राज्य ओड़िसा में सप्तपुरियों में से एक है पुरी जहां पर प्रभु जगन्नाथ का विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर है। इसे चार धामों में एक माना जाता है। इस मंदिर को राजा इंद्रद्युम्न ने हनुमानजी की प्रेरणा से बनवाया था। कहते हैं कि इस मंदिर की रक्षा का दायित्व ...
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आप यह तो जानते ही होंगे कि महाराष्ट्र के एक गांव शनि शिंगणापुर में शनिदेव का सिद्ध स्थान है। यह बहुत ही चमरिक स्थान है। इसी तरह मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित है शनिश्चरा मन्दिर। इसके बारे में किंवदंती है कि यहां हनुमानजी के द्वारा लंका से ...
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पूर्वोत्तर बिहार में पूर्णिया प्रमंडल मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर धरहरा गांव स्थित सिकुलीगढ़ का भी अपना धार्मिक और पुरातात्विक महत्व है।
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रामायण काल में मिथिला के राजा जनक थे। उनकी राजधानी का नाम जनकपुर है। जनकपुर नेपाल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह नेपाल की राजधानी काठमांडू से 400 किलोमीटर दक्षिण पूरब में बसा है। यह शहर भगवान राम की ससुराल के रूप में विख्यात है। इस नगर में ही माता ...
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हमने जिस तरह आपको पंच कैलाश, पंच केदार आदि हिन्दू तीर्थ के बारे में बताया था उसी तरह अब जानिए सप्त बद्री के बार में संक्षिप्त जानकारी जो उत्तराखंड के चमोली में स्थित है और सभी जगह श्रीहरि विष्णु विराजमान हैं।
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उत्तराखंड पंचबद्री के अलावा पंचकेदार और पंचप्रयाग की महिमा का वर्णन मिलता है। मुख्‍य केदारनाथ मंदिर के अलावा भी चार ऐसा मंदिर है जिन्हें केदारनाथ ही माना जाता है। आओ जानते हैं इन मंदिरों के नाम और ये कहां स्थित है।
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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल सप्तमी तिथि को मां गंगा स्वर्गलोक से शिवशंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा सप्तमी पर्व मंगलवार, 18 मई 2021 को मनाया जा रहा है। जिस दिन गंगाजी की ...
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भारतीय राज्य उत्तराखंड में गिरिराज हिमालय की केदार नामक चोटी पर स्थित देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सर्वोच्च केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर। इस संपूर्ण क्षेत्र को केदारनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। यह स्थान छोटा चार धाम में से एक है। ...
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गंगा तट पर बसी तीर्थ और कुंभ नगरी हरिद्वार में कई प्राचीन मंदिर, आश्रम और तपोवन है। यहां पर शक्ति त्रिकोण है अर्थात माता के तीन प्रमुख मंदिर है। मनसा देवी, चंडी देवी और महामाया शक्तिपीठ। गंगा के तट पर ब्रह्मकुंड नामक तट है जहां पर कुंभ मेले का आयोजन ...
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देशभर में जो ज्योर्तिलिंग है वे सभी स्वंभू माने जाते हैं। शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुखशांति और सौभाग्य प्राप्त होता हैं। 12 ज्योतिर्लिंग के पूजन या दर्शन से जितना पुण्यकाल प्राप्त होता है उतना किसी भी शिवलिंग के पूजन या दर्शन से नहीं ...
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भगवान शनिदेव के कई चमत्कारिक पीठ या कहें कि मंदिर है। महाराष्ट्र के एक गांव शिंगणापुर में उनका खास मंदिर है जहां उनका जन्म हुआ था। उत्तरप्रदेश के कोशी से छह किलोमीटर दूर कौकिला वन में स्थित है सिद्ध शनिदेव का मन्दिर। इसके अलावा मध्यप्रदेश के ...
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