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पूर्णागिरि शक्तिपीठ पर क्या बोले सीएम पुष्कर धामी, जानें क्या है इसका धार्मिक महत्व?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नवरात्रि के तीसरे दिन टनकपुर स्थित मां पूर्णागिरि शक्तिपीठ का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि यहां माता सती की नाभि गिरी थी, जिसे पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। इस स्थान पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं और भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, टनकपुर (चम्पावत) में स्थित माँ पूर्णागिरि मंदिर पवित्र शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध धाम है। मान्यता है कि यहां माता सती की नाभि गिरी थी, इसलिए यह स्थल असीम शक्ति और आस्था का केंद्र माना जाता है।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष चैत्र मास में यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुँचते हैं। पहाड़ों की गोद में बसा यह धाम भक्तों को आध्यात्मिक शांति के साथ अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव भी कराता है। आप भी जब टनकपुर आएँ, तो इस पावन धाम के दर्शन अवश्य करें।
टनकपुर (चम्पावत) में स्थित माँ पूर्णागिरि मंदिर पवित्र शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध धाम है। मान्यता है कि यहाँ माता सती की नाभि गिरी थी, इसलिए यह स्थल असीम शक्ति और आस्था का केंद्र माना जाता है।
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) March 21, 2026
हर वर्ष चैत्र मास में यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें देशभर से लाखों… pic.twitter.com/07BwmtB07r
गौरतलब है कि यहां आने के लिए आपको सड़क या रेल मार्ग से टनकपुर आना होगा। पुर्णागिरि मंदिर टनकपुर से मात्र 17 कि॰मी॰ की दूरी पर है। इस तीर्थस्थान पर पहुचने के लिए टनकपुर से ठूलीगाड तक आप वाहन से जा सकते हैं। आगे का रास्ता आपको पैदल ही तय करना पड़ता है।
शक्तिपीठ होने की वजह से यहां पूरे वर्ष देशभर से तीर्थयात्रियों का आना लगा रहता है। चैत्र मास नवरात्रि से दो माह तक यहां पर मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें श्रद्धालुओं के लिए सभी प्रकार की सुविधायें उपलब्ध कराई जाती हैं। यहां से काली नदी निकल कर समतल की ओर जाती है वहां पर इस नदी को शारदा के नाम से जाना जाता है।
