कानपुर में नगर निगम की सख्त कार्रवाई के चलते एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है, क्योंकि नगर निगम ने भारी हाउस टैक्स बकाया के चलते जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय को सील कर दिया। सरकारी विभाग द्वारा एक सरकारी कार्यालय सील करने से सरकार से तरह-तरह चर्चाओं का बाजार गर्म है गया है। डीआईओएस कार्यालय पर 58.62 लाख रुपये के बकाया का नोटिस चस्पा किया गया, जिसके बाद पूरे कार्यालय का कामकाज ठप हो गया और शिक्षा विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होने लगे।
नगरनिगम की कार्रवाई के बाद जब अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंचे, तो मुख्य द्वार पर सील और नोटिस देखकर हैरान रह गए। नोटिस में हाउस टैक्स बकाया संयुक्त शिक्षा निदेशक (JD) कार्यालय का बताया गया था, जबकि सील DIOS कार्यालय को किया गया। नगरनिगम की इस कार्रवाई शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। नाराजगी जताते हुए कई लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया पर भी साझा किया।
कार्यालय सील होने के बाद DIOS के अधिकारी और कर्मचारी पास स्थित जीआईसी (गवर्नमेंट इंटर कॉलेज) परिसर में बने संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय में अस्थायी रूप से शिफ्ट हो गए। हालांकि, मूल कार्यालय में रखी फाइलें, दस्तावेज और मूल्यांकन से जुड़े कार्य बाधित हो गए हैं। स्कूल निरीक्षण, शिक्षक स्थानांतरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
DIOS कार्यालय की वित्त एवं लेखाधिकारी खुशबू सोनी के अनुसार, नगर निगम ने जिस हाउस टैक्स बकाया का हवाला दिया है, वह नोटिस संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय के नाम पर है। ऐसे में DIOS कार्यालय को सील किया जाना संभवतः एक प्रशासनिक चूक या गलतफहमी भी हो सकती है। शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों ने इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की है।
वहीं, संयुक्त शिक्षा निदेशक राजेश कुमार ने भी स्पष्ट किया कि उनका कार्यालय जीआईसी परिसर में स्थित है और नया भवन अभी निर्माणाधीन है। उन्होंने इस नोटिस को त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि नगर निगम से वार्ता जारी है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। DIOS को भी नगर निगम भेजा गया है ताकि सील खुलवाकर सामान्य कामकाज बहाल किया जा सके।
गौरतलब है कि नगर निगम इन दिनों बकाया वसूली अभियान के तहत सरकारी और निजी संस्थानों पर सख्ती बरत रहा है। पहले भी कई बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण कार्यालय पर सील लगने से सवाल उठने लगे हैं कि क्या कार्रवाई से पहले सही जांच की गई थी।
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल प्रशासनिक काम बाधित होते हैं, बल्कि हजारों छात्रों और शिक्षकों से जुड़े जरूरी कार्य भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने नगर निगम और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।
फिलहाल, पूरे मामले को लेकर शिक्षा विभाग में चिंता का माहौल है और सभी को इस बात का इंतजार है कि कब तक यह विवाद सुलझेगा और DIOS कार्यालय में कामकाज सामान्य हो पाएगा।
यदि वास्तव में कानपुर शिक्षा विभाग से जुड़े इस दफ्तर में टैक्स बकाया है तो यह कार्रवाई सरकार की पारदर्शिता का उदाहरण होगी, यदि यह त्रुटि के चलते हुए है तो यह कर्मचारियों और अधिकारियों के सम्मान को चोट पहुंचाने वाली कार्रवाई होगी।