अयोध्या में रचा इतिहास, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पहली बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
Ayodhya, Shri Ram Janmabhoomi Temple: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व ऐतिहासिक, अलौकिक और भव्य स्वरूप में संपन्न हुआ। धार्मिक समिति के गठन के बाद यह पहला अवसर है जब रामलला के प्रांगण में नटखट गोपाल का जन्मोत्सव इतने विशाल और दिव्य पैमाने पर मनाया गया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा इस पावन अवसर के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। देश के विभिन्न कोनों से मंगाए गए दुर्लभ एवं सुगंधित फूलों से संपूर्ण राम दरबार और गर्भगृह परिसर को कलात्मक रूप से सजाया गया था।
धार्मिक समिति के वरिष्ठ सदस्य महंत राजकुमार दास ने बताया कि गर्भगृह की अलौकिक सजावट के लिए विशेष कारीगरों को आमंत्रित किया गया था। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज के कुशल मार्गदर्शन में सभी सदस्य और सेवादार रात-दिन ठाकुर जी के इस उत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे रहे।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अलौकिक क्षण
- मध्यरात्रि में दिव्य कपाट उद्घाटन : रात्रि के ठीक 12:00 बजते ही मंदिर प्रांगण घंटे, घड़ियाल, शंखध्वनि और "जय श्री कृष्णा" व "जय श्री राम" के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। जैसे ही कपाट खुले, अपने आराध्य की एक झलक पाते ही श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
- झूले पर विराजे नटखट गोपाल : भगवान को अत्यंत सुंदर झूले युक्त आसन पर विराजमान कराकर जन्मोत्सव एवं प्राकट्य उत्सव अत्यंत भक्तिभाव से मनाया गया।
- 501 बत्तियों से महाआरती एवं भव्य महाभिषेक : इस पावन अवसर पर श्री रामलला सरकार का भव्य महाभिषेक किया गया। मंदिर के अर्चक अपने पारंपरिक परिधान से इतर विशेष पीले वस्त्रों में सुसज्जित होकर 501 बत्तियों की महाआरती उतारते नज़र आए—यह दृश्य भक्तों के लिए अत्यंत अद्भुत और अविस्मरणीय था।
- माखन-मिश्री व छप्पन भोग : महाआरती के उपरांत ठाकुर जी को माखन-मिश्री, विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों, ताजे फलों और पारंपरिक धनिया पंजीरी का भोग समर्पित किया गया।
- श्रीमद्भागवत गीता परायण व सांस्कृतिक संध्या : परिसर के इतिहास में पहली बार श्रीमद्भागवत गीता का विशेष परायण आयोजित हुआ। इसके साथ ही मनमोहक भजन-कीर्तन और संस्कृत संध्या के सुरम्य भजनों ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
वरिष्ठ संतों व अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक महाउत्सव के साक्षी बनने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि, ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य महंत दिनेन्द्र दास, उत्सव प्रमुख इंद्रदेव आचार्य, नवगठित धार्मिक समिति के समस्त सदस्यगण तथा अयोध्या के उच्च प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मध्यरात्रि के पावन पूजन, महाप्रसाद वितरण और शयन आरती के बाद मंदिर के कपाट बंद किए गए। राम मंदिर में आयोजित यह अनूठा उत्सव वहां उपस्थित हर रामभक्त के हृदय में एक दिव्य स्मृति बनकर अंकित हो गया।

