Vishwakarma Jayanti : क्यों की जाती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा, मशीन और औजारों का जयंती से क्या है संबंध?
Vishwakarma Jayanti 2026: विश्वकर्मा जयंती (विश्वकर्मा पूजा) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो देवशिल्पी और ब्रह्मांड के पहले वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। विश्वकर्मा जयंती सूर्य कैलेंडर (कन्या संक्रांति) के अनुसार मनाई जाती है। जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है, उसी दिन यह पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 17 सितंबर, गुरुवार 2026 को मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं इस दिन क्यों होती है भगवान विश्वकर्मा की पूजा? मशीन और औजारों का भगवान विश्वकर्मा जयंती से क्या है संबंध?
सृजन, शिल्प और आधुनिक तकनीक के मुख्य आधार भगवान विश्वकर्मा के प्राकट्य दिवस के रूप में विश्वकर्मा जयंती (विश्वकर्मा पूजा) का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता और विज्ञान का यह अद्भुत संगम मानव श्रम और निर्माण कला के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर है।
भगवान विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:52 से 05:39 तक।
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:08 से 12:57 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:39 से 07:03 तक।
अमृत काल: सुबह 08:24 से 10:10 तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रात: 06:26 से शाम 07:53 तक।
भगवान विश्वकर्मा पूजा की विधि
- इस दिन कारीगर, शिल्पकार और इंजीनियर अपने औजारों, मशीनों और कारखानों की पूजा करते हैं।
- सबसे पहले अपने कार्यस्थल, मशीनों, औजारों और वाहनों की अच्छी तरह सफाई करें।
- एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- पास में ही कलश की स्थापना करें।
- अपने उन सभी उपकरणों (Tools) को चौकी के पास रखें जिनका आप प्रतिदिन उपयोग करते हैं।
- सभी उपकरणों पर तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान 'ॐ विश्वकर्मणे नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
- तत्पश्चात भगवान विश्वकर्मा को फल और मिठाई का भोग लगाएं और धूप-दीप से आरती करें।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मांड के प्रथम इंजीनियर और देवशिल्पी सनातन ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का मुख्य वास्तुकार और महान शिल्पी स्वीकार किया गया है। यह त्योहार सिखाता है कि जिस साधन या औजार से हम अपनी आजीविका कमाते हैं, उसका सम्मान करना ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।
अस्त्र-शस्त्रों के रचयिता हैं भगवान विश्वकर्मा
देवताओं के पास जितने भी अलौकिक अस्त्र-शस्त्र और विमान (जैसे पुष्पक विमान) थे, वे सभी भगवान विश्वकर्मा की ही रचना हैं। यह पर्व सृजन, शिल्प, तकनीक और कड़ी मेहनत के प्रति सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक है। भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग लोक, श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी, पांडवों का इंद्रप्रस्थ, भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु जी का सुदर्शन चक्र, रावण की सोने की लंका और यमराज का कालदंड तैयार किया था।
क्यों होती है औजारों और मशीनों की पूजा?
इस दिन कारीगर, इंजीनियर, फैक्ट्री श्रमिक, मैकेनिक, और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग अपने औजारों, मशीनों, वाहनों और गैजेट्स (जैसे कंप्यूटर/लैपटॉप) की सफाई करके उनका पूजन करते हैं। कई कारखानों और कार्यशालाओं (Workshops) में इस दिन काम बंद रखा जाता है और मशीनों को विश्राम देकर केवल पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है।

