1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. हिन्दू धर्म
  4. bhagwan vishwakarma jayanti kab hai
Written By WD Feature Desk
Last Updated : गुरुवार, 29 जनवरी 2026 (18:03 IST)

कब है भगवान श्री विश्‍वकर्मा जी की जयंती, जानिए महत्व और पूजा विधि

vishwakarma jayanti
अधिकतर राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल) में भगवान विश्वकर्मा की जयंती हर साल 17 सितंबर को मनाई जाती है। यह तिथि 'कन्या संक्रांति' के आधार पर तय होती है, इसलिए यह अंग्रेजी कैलेंडर में लगभग स्थिर रहती है। कुछ विद्वानों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, विश्वकर्मा जयंती माघ मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 31 जनवरी 2026 (शनिवार) को है।
 

भगवान विश्वकर्मा का महत्व (The Divine Architect)

  • भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला वास्तुकार (Architect) और इंजीनियर माना जाता है।
  • उन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारका, हस्तिनापुर और लंका जैसी भव्य नगरियों का निर्माण किया था।
  • सनातन धर्म में उन्हें "देवताओं का वास्तुकार" माना गया है।
  • मान्यता है कि सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेता युग की स्वर्ण लंका, द्वापर युग की द्वारका और हस्तिनापुर का निर्माण उन्होंने ही किया था।
  • भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र भी विश्वकर्मा जी ने ही बनाया था।
  • ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ मूर्तियों का निर्माण भी उन्होंने ही किया था।
 

विश्वकर्मा पूजा की विधि (Step-by-Step)

पूजा: इस दिन कारीगर, शिल्पकार और इंजीनियर अपने औजारों, मशीनों और कारखानों की पूजा करते हैं। यह पूजा मुख्य रूप से कारखानों, दुकानों और कार्यशालाओं में की जाती है।
सफाई और तैयारी: सबसे पहले अपने कार्यस्थल, मशीनों, औजारों और वाहनों की अच्छी तरह सफाई करें।
कलश स्थापना: एक चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पास में ही कलश की स्थापना करें।
औजारों की पूजा: अपने उन सभी उपकरणों (Tools) को चौकी के पास रखें जिनका आप प्रतिदिन उपयोग करते हैं। उन पर तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
मन्त्र जाप: पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है:- "ॐ विश्वकर्मणे नमः"
आरती और भोग: भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं और धूप-दीप से आरती करें।
कार्य का विराम: इस दिन मशीनों का उपयोग नहीं किया जाता। कारीगर और शिल्पी इस दिन आराम करते हैं और मशीनों को विश्राम देते हैं।
 

आधुनिक युग में विश्वकर्मा पूजा की प्रासंगिकता

आज के समय में विश्वकर्मा पूजा केवल पारंपरिक कारीगरों तक सीमित नहीं है। अब सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपने लैपटॉप/कंप्यूटर की पूजा करते हैं, और पायलट अपने विमानों की। यह दिन हमें सिखाता है कि हम जिन उपकरणों से अपनी जीविका चलाते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना आवश्यक है।
ये भी पढ़ें
Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 30 जनवरी 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय