dharma sangrah
Thu, 6 Aug 2026

Notifications

  1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. अन्य त्योहार
  4. Mauna Panchami 2017

मौना पंचमी : जानिए व्रत और पूजन का महत्व

Mauna Panchami 2017
* क्यों मनाएं मौना पंचमी, जानिए इस पर्व से जुड़ी बातें... 
 
श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष में आने वाली पंचमी को मौना पंचमी (Mauna Panchami) के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2017 में मौना पंचमी शुक्रवार, 14 जुलाई को मनाई जाएगी। यह पर्व श्रावण माह के 5वें दिन मनाया जाता है। 
हिन्दू धर्म के अनुसार श्रावण मास बहुत ही पवित्र माह माना गया है। इस माह में भोलेनाथ और नागपूजन का विशेष महत्व है। इस दिन नागदेवता को सूखे फल, खीर आदि चढ़ा उनकी पूजा की जाती है। कई क्षेत्रों में इसे सर्प से जुड़ा पर्व भी मानते हैं। इस तिथि के देवता शेषनाग हैं इसलिए इस दिन भोलेनाथ के साथ-साथ शेषनाग की पूजा भी की जाती है। 
 
मौना पंचमी के दिन शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा काफी महत्व रखती है। इस रूप में शिव को ज्ञान, ध्यान, योग और विद्या का जगद्गुरु माना गया है। इस दिन दक्षिणामूर्ति स्वरूप शिव की पूजा से बुद्धि तथा ज्ञान में बढ़ोतरी होती है तथा मनुष्य हर तरफ से जीवन में सफलता पाता है। इस दिन पंचामृत और जल से शिवाभिषेक का बहुत महत्व है।
 
इस दिन झारखंड के देवघर के शिव मंदिर में शर्वनी मेला मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव व शेषनाग की पूजा की जाती है। मौना पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ की आराधना करके मौन व्रत रखने का काफी महत्व है। 
 
मौना पंचमी को शिव पूजा और मौन व्रत का यही संदेश है कि मौन मानसिक, वैचारिक और शारीरिक हिंसा को रोकने का काम करता है। मौन व्रत न केवल व्यक्ति को मानसिक रूप से संयम और धैर्य रखना सिखाता है बल्कि वह शारीरिक ऊर्जा के नुकसान से भी बचकर सफलता पाता है।
 
मौन का अर्थ है- चुप रहना, किसी से बातचीत न करना इसीलिए यह तिथि 'मौना पंचमी' के नाम से जानी जाती है। इस व्रत का संदेश भी यही है कि मनुष्‍य के मौन धारण करने से जीवन में हर पल होने वाली हर तरह की हिंसा से उसकी रक्षा होती है तथा मनुष्य के जीवन में धैर्य और संयम आता है और मनुष्य का मन-मस्तिष्‍क अहिंसा के मार्ग पर चलने लगता है। 
 
कई क्षेत्रों में इस दिन आम के बीज, नींबू तथा अनार के साथ नीम के पत्ते चबाते हैं। ऐसा माना जाता है कि ये पत्ते शरीर से जहर हटाने में काफी हद तक मदद करते हैं। मौना पंचमी के दिन इन दोनों देवताओं का पूजन करने से मनुष्‍य के जीवन में आ रहे काल का भय नष्‍ट होता है तथा हर प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।