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Last Updated :अंडमान सागर , बुधवार, 15 अप्रैल 2026 (15:44 IST)

अंडमान सागर में बड़ा हादसा: रोहिंग्या शरणार्थियों से भरी नाव डूबी, 300 लोग लापता

boat accident
अंडमान सागर में मंगलवार को रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव डूब गई। दक्षिणी बांग्लादेश के टेकनाफ से मलेशिया जा रही इस नाव में लगभग 300 लोग सवार थे। तेज हवाओं और बहुत ज्यादा भीड़ की वजह से यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। ALSO READ: राज्यसभा में 'डिप्टी लीडर' बनते ही अशोक मित्तल पर ED का शिकंजा, क्या बोले केजरीवाल और भगवंत मान?
 
संयुक्त राष्ट्र संघ हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (UNHCR) और इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) ने एक संयुक्त बयान जारी कर हादसे पर 'गहरा दुख' जताया है।
 
बयान में कहा गया कि अंडमान सागर इन खतरनाक यात्राओं पर जाने वाले लोगों की जान लेता रहता है। माना जा रहा है कि लापता यात्रियों में परिवार, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जो इस इलाके में बेघर समुदायों के सामने बढ़ते मानवीय संकट को दिखाता है।
 
यूएनएचसीआर के अनुसार, गलत जानकारी और मानव तस्करी के जाल की वजह से कई लोग खतरनाक समुद्री यात्रा की सफर करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। उसने आगे बताया कि अक्सर विदेश में ज्यादा वेतन और बेहतर सुविधाओं का लालच देकर इस खतरनाक रास्ते से अन्य देश में ले जा रहे हैं। उसने आगे कहा कि अंडमान सागर के मार्ग में इस प्रकार की कई घटनाओं हो चुकी है।
 
बयान में आगे कहा गया, 'हम अंततराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वे बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए जान बचाने वाली मदद और बांग्लादेशी होस्ट कम्युनिटी की मदद के लिए एकजुटता दिखाएं और फंडिंग बनाए रखें। बांग्लादेश अपना नया साल मना रहा है, यह दुखद घटना म्यांमार में विस्थापन के असली कारणों को दूर करने और ऐसे हालात बनाने की तुरंत जरूरत की याद दिलाती है, जिससे रोहिंग्या शरणार्थी अपनी मर्ज़ी से सुरक्षित और इज्जत के साथ घर लौट सकें।
 
इसमें आगे चेतावनी दी गई, 'सब मिलकर काम किए बिना, समुद्र में और खतरनाक रास्तों से गुजरते हुए और भी जानें जाएंगी।'
 
गौरतलब है कि 2017 में म्यांमार में हिंसा के बाद बढ़े रोहिंग्या संकट के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ है और लाखों लोगों ने बांग्लादेश में शरण ली है। कई लोग भीड़भाड़ वाले कैंपों में रहते हैं, जहाँ लंबे समय तक रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं है, जिससे वे ह्यूमन ट्रैफिकिंग और स्मगलिंग नेटवर्क के शोषण के शिकार हो सकते हैं।
edited by : Nrapendra Gupta 
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