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Last Modified: नई दिल्ली , मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 (18:56 IST)

लोकसभा सीटें 815 या 850? जानकारों ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल

Lok Sabha seats
केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 515 (या 550) करने जा रही है। इसके लिए 131वां संशोधन विधेयक लाया जा रहा है। इसे संसद के विशेष सत्र में पेश किया जाने वाला है, जो कि गुरुवार से शुरू होने वाला है। हालांकि जानकार इस मामले में सरकार की मंशा पर भी सवाल उठा रहे हैं। दरअसल, नारी शक्ति वंदन ‍अधिनियम को 2023 में मंजूरी मिली थी और इसे 2034 के चुनाव से लोकसभा और विधानसभा में लागू किया जाना था।  

क्या होगा परिसीमन का आधार

सरकार इस विधेयक को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले लाना चाहती है। इस मामले में विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से बंगाल चुनाव में फायदा उठाना चाहती है। हालांकि सीटों का सही आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन यह सीटें 815 या 850 हो सकती हैं। जबकि, महिलाओं की सीटों की संख्या 273 रखी जाने की बात कही जा रही है। सीटों का परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। 
 
इस विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा कितनी गंभीर है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंबेडकर जयंती पर प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी महिलाओं के नाम खुला खत लिखा है। उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के सांसद को पत्र लिखें और कहें कि वे इसका समर्थन करें। यदि यह विधेयक पास हो जाता है कि 2029 में लोकसभा चुनाव का परिदृश्य कुछ और ही होगा। 

योगेन्द्र यादव के सवाल

पॉलिटिकल एक्टीविस्ट योगेन्द्र यादव ने कहा कि संसद में पेश होने वाला 131वां संशोधन विधेयक 2026, उससे भी बुरा है, जितना सबसे सोचा था। यह राज्यों के लिए सीटों के पूरी तरह से फिर से बंटवारे और चुनावी क्षेत्रों की मनमानी सीमा निर्धारण के रास्ते खोल देता है। उन्होंने कहा कि जैसी कि उम्मीद थी, महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के नाम पर, यह असल में जल्दी सीमा-निर्धारण करने और लोकसभा का आकार बढ़ाकर 815 करने का एक कदम है।

क्या हैं आशंकाएं

लेकिन, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के आश्वासन के विपरीत, इस विधेयक में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यह सुनिश्चित करे कि हर राज्य के लिए सीटों का मौजूदा अनुपात बना रहेगा। यह मौजूदा रोक (जो 1971 की जनगणना पर आधारित थी और जिसे 2026 के बाद तक बढ़ाया गया था) को पूरी तरह से हटा देता है, बिना किसी ऐसे सुरक्षा उपाय के जिसका सरकार वादा कर रही थी। इससे भी बुरा यह है कि सीटों के फिर से बंटवारे का आधार कौन सी जनगणना होगी, इस बारे में फैसला संविधान से हटाकर कानून के दायरे में डाल दिया गया है, यानी संसद में साधारण बहुमत से।
 
यादव ने एक्स पर लिखा- सीटों का असल फिर से बंटवारा और सीमाओं का निर्धारण सीमा-निर्धारण आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाएगा, जिसके बारे में संविधान चुप है। और इसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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