साहित्यकार विष्णु प्रभाकर का निधन

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
हिन्दी के वयोवृद्ध गाँधीवादी का शुक्रवार रात को निधन हो गया। वे 96 वर्ष के थे। पिछले कुछ दिनों से वे बीमार चल रहे थे। उनके परिवार में दो पुत्र और दो पुत्रियाँ हैं।

प्रभाकर के पुत्र अतुल प्रभाकर ने बताया कि प्रभाकर को पिछले दिनों में साँस लेने में तकलीफ के कारण भर्ती कराया गया था। करीब दो सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद कल रात पौने एक बजे उन्होंने अंतिम साँसें लीं।
विष्णु प्रभाकर ने अपनी वसीयत में अपना संपूर्ण अंगदान करने की इच्छा व्यक्त की थी इसीलिए उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके पार्थिव शरीर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान को सौंप दिया जाएगा।

अतुल प्रभाकर ने बताया कि आयुर्विज्ञान संस्थान को इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। आज दोपहर दो बजे उनका पार्थिव शरीर एम्स को सौंप दिया जाएगा।
विष्णु प्रभाकर का जन्म 1912 को उत्तरप्रदेश के मुज्जफरनगर के मीरापुर गाँव में हुआ। उनके पिता का नाम दुर्गाप्रसाद था।

प्रभाकर को पद्म विभूषण के साथ ही हिन्दी अकादमी पुरस्कार, शलाका सम्मान, साहित्य अकादमी पुरस्कार, शरत पुरस्कार आदि कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

उनकी प्रसिद्ध कृतियों में अर्द्धनारीश्वर, धरती अभी घूम रही, डॉक्टर, सत्ता के आर-पार, मेरे श्रेष्ठ रंग, आवारा मसीहा, शरतचन्द्र चटर्जी की जीवनी, सरदार शहीद भगत सिंह, ज्योतिपुंज हिमालय शामिल हैं।



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