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Tue, 6 Oct 2026

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संक्रांति पर हास्य व्यंग्य : पतंगबाजों की महिमा

patang movie
गिरीश पण्ड्या
पतंगों का मौसम है। सारे पतंगबाज पतंगों को उड़ाने, लूटने और अटकाने जैसी आवश्यक क्रियाओं में लिप्त हैं। ये पतंगबाज संक्रांत के पूर्व से अपनी क्रियाएं आरंभ करके संक्रांत के बाद तब तक जारी रखते हैं, जब तक मोहल्ले की सारी केबल लाइनें, सारे इलेक्ट्रिक पोल और सारे घरों की छतें पतंगों से पट नहीं जातीं।
 

यदि किसी मोहल्ले में अटकी हुई पतंगें कम हैं तो इसका यह अर्थ बिलकुल नहीं कि वहां के पतंगबाज सक्रिय नहीं हैं, बल्कि इसका अर्थ तो यह है कि वहां के पतंगबाज पतंगों को उड़ाने की अपेक्षा लूटने की क्रिया में अधिक पारंगत हैं। पतंग लूटना अपने आपमें बहुत ही जटिल कार्य है, जिसका प्रशिक्षण पतंग लुटेरों की टोलियों के साथ कई दिनों तक घूमकर प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि अपने निजी हाथों से दूसरों की पतंगों को लूटना मन को एक विशेष आनंद की अनुभूति प्रदान करता है। 
 
पतंग लुटेरों की विशेषता यह होती है कि वे आसमान की ओर देखते हुए शहर की किसी भी व्यस्ततम सड़क को आसानी से पार कर लेते हैं, पर हां... इसके लिए सड़क पर गुजरने वाले वाहन चालकों को थोड़ा-सा एडजस्टमेंट करना पड़ता है। पतंग लुटेरें वाहनों के अनुसार एडजस्ट नहीं होते, क्योंकि उनका एडजस्टमेंट तो कटी हुई पतंग की दिशा में स्वतः रूप से होता रहता है। 
 
हाथों में डंडा या झड़ थामने का अभ्यास भी इन पतंग लुटेरों को होता है। हालांकि कई पतंग विशेषज्ञ इस मौसम में पतंग लुटेरों के पास नहीं होने की सलाह देते हैं, क्योंकि रात के सपने में पतंग लुटेरों द्वारा झड़ घुमाने का खतरा रहता है, जो पास में सोने वाले के गाल का रंग परिवर्तित कर सकता है। 
 
जहां तक पतंग उड़ाने वालों की बात है, उन्हें पतंग लुटेरों की तरह 'फील्ड वर्क' नहीं करना होता। ऐसे पतंगबाज आमतौर पर उनकी घरों की छतों पर ही पाए जाते हैं। ये पतंगबाज प्रायः समूह में रहकर पतंग उड़ाने की क्रिया सम्पन्न करते हैं, जिसमें पतंग की डोर किसी एक के पास रहती है और बाकी साथी 'काटा है...' कहकर उस पतंगबाज के कुशल होने की मार्केटिंग करते रहते हैं।
 
कई बार तो वे स्वयं की पतंग कटने पर भी 'काटा है...' वाली मार्केटिंग कर डालते हैं, ताकि उनकी प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आए। पतंग उड़ाते समय टेप रिकॉर्डर की तीव्र ध्वनि इन पतंगबाजों में नया जोश उत्पन्न करती रहती है। टेप रिकॉर्डर की ध्वनि का मापदंड यह होता है कि आस-पास के दस घरों में यह पता चल जाना चाहिए कि फलां के घर पर पतंग उड़ाई जा रही है। 
 
पतंग क्रियाओं में डोर बनाना भी एक विशेष कार्य है। पतंगबाजों की डिक्शनरी में इसे 'मंजा (डोर) सूतना' शब्द दिया गया है। यह कार्य किसी अनुभवी को ही दिया जाता है। मंजा सूतने के लिए बनाई जाने वाली लुगदी की क्रिया किसी रेसिपी से कम नहीं होती। 
 
पतंग क्रियाओं में सबसे आसान, किंतु महत्वपूर्ण कार्य होता है- उचका पकड़ना। जिन्हें पतंग उड़ाने का अभ्यास नहीं होता या फिर जिनकी सभी पतंगें कट या फट जाती हैं, ऐसे पतंगबाज उचका पकड़कर ही पतंग का आनंद लेते हैं। ऐसा करने पर पतंग उड़ाने वाला बीच-बीच में इन्हें कुछ सेकंड के लिए पतंग की डोर थामने का मौका देता है। पतंग उड़ाने वाले प्रत्येक महारथी ने पहले किसी न किसी के अंडर में उचका पकड़कर ही पतंग उड़ाने की पीएचडी प्राप्त की होती है। 
 
मैं भी अपनी लेखनी को विराम देते हुए पतंगबाजों की महिमा यहीं समाप्त करता हूं, क्योंकि मेरे पास एक कटी हुई पतंग आकर गिरी है। मैं उसे लूटकर पतंगबाजों की श्रेणी में अपना नाम दर्ज करवाने जा रहा हूं।
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