यह नरेन्द्र मोदी का विश्वास है या 'अति आत्मविश्वास'

लोकसभा चुनाव के चुनाव प्रचार के अंतिम दिन एक पल को तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबको चौंका ही दिया था, लेकिन यह 'आश्चर्य' लंबे समय तक कायम नहीं रह पाया। दरअसल, टीवी चैनलों पर एक लाइन ब्रेक हुई थी कि नरेन्द्र मोदी में पत्रकारों से बात करेंगे।

स्वाभाविक तौर पर इस खबर से लोगों को चौंकना ही था, क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब प्रधानमंत्री पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। लोगों को लगा था कि दुतरफा संवाद होगा, लेकिन यह संवाद एकतरफा रहा। मोदी ने सिर्फ अपनी बातें कहीं, पत्रकारों के सवालों के जवाब पूरे समय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिए।

हालांकि नरेन्द्र मोदी ने अपनी बात पूरी दमदारी से रखी। उन्होंने कह कि हमारी मुहिम आखिरी व्यक्ति तक पहुंचने की है और मेरे लिए चुनाव जनता-जनार्दन को पांच साल के कार्यकाल के लिए धन्यवाद का माध्यम था। उन्होंने कहा कि ईमानदारी की शुरुआत तो 17 मई 2014 को लोकसभा चुनाव के परिणामों के साथ ही हो गई। उस समय सट्‍टाखोर अच्छे-खासे डूब गए थे।

जब मोदी कह रहे थे कि लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार कई सालों बाद देखने को मिलेगी। नई सरकार एक के बाद एक निर्णय लेते हुए आगे बढ़ेगी, उनके भाव ऐसे थे कि मानो वे सरकार को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे। लेकिन, भाजपा अमित शाह की बात ने कहीं न कहीं उस डर को भी उजागर किया, जिसमें बहुमत को लेकर थोड़ी आशंका नजर आई। शाह ने कहा कि केन्द्र में एनडीए की सरकार बनेगी एवं जो भी कोई और दल सरकार में शामिल होना चाहेगा, उसका भी स्वागत है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूरे समय अमित शाह ही पत्रकारों के सवालों का जवाब देते नजर आए। राफेल मामले से जुड़े एक सवाल का जवाब में अमित शाह ने कहा कि राफेल मामले में राजनीति करने के लिए सुरक्षा से समझौता किया गया। इसके लिए सिर्फ कांग्रेस जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि यदि राफेल मामले में यदि राहुल गांधी को कोई जानकारी थी तो वे उसे सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध करवाते।

खैर, जो भी है। भाजपा के इन दोनों दिग्गजों की बातों को देखकर तो साफ लग रहा है कि केन्द्र में एक बार फिर भाजपा नीत एनडीए की सरकार बन रही है। हकीकत के लिए हमें 23 मई का इंतजार करना होगा, जब चुनाव परिणाम सामने आएंगे।

 

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