टाटा मोटर्स में छह दिन काम ठप

जमशेदपुर (वार्ता)| वार्ता|
हमें फॉलो करें
देश की सबसे बड़ी व्यावसायिक वाहन निर्माता कंपनी के संयंत्र में तकनीकी तौर पर पाँच दिन की घोषित पूर्ण बंदी (ब्लॉक क्लाजर) के बावजूद वास्तविक रूप से छह दिनों तक उत्पादन ठप रहेगा।


वैश्विक मंदी से उपजे ऋण संकट के कारण उद्योग जगत में मची अफरातफरी के बीच माँग में जबरदस्त गिरावट से कंपनी को एक माह के भीतर दूसरी बार बंदी का सामना करना पड़ रहा है।

कंपनी ने आधिकारिक रूप से 25 से 29 नवंबर तक पाँच दिन की बंदी की घोषणा की है, लेकिन 30 नवंबर को रविवार के दिन सामान्य अवकाश के कारण उस दिन भी उत्पादन शुरू नहीं किया जाएगा और संयंत्र में वास्तविक रूप से कामकाज एक दिसंबर से ही शुरू होगा। इस तरह पाँच दिन के घोषित ब्लॉक क्लोजर के बावजूद वास्तविक बंदी छह दिनों की होगी।

इससे पहले संयंत्र में छह से आठ नवंबर तक घोषित तीन दिन की बंदी के दौरान भी पाँच नवंबर को छठ के समायोजित अवकाश और नौ को रविवार के सामान्य अवकाश को शामिल कर लेने से वास्तविक बंदी पाँच दिन की हो गई थी।


कंपनी की बंदी के कारण इस पर निर्भर उपकरण निर्माता सहयोगी इकाई एचवी एक्सेल लिमिटेड समेत कुछ अन्य में भी इस दौरान उत्पादन ठप रहेगा। कंपनी ने प्रवक्ता कैप्टन पीजे सिंह ने कल यहाँ कहा था कि मंदी के कारण ऑटो सेक्टर में पैदा हुए ऋण संकट के चलते गिरी माँग और उत्पादन में संतुलन स्थापित करने के लिए ब्लॉक क्लोजर किया जा रहा है।
टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने बताया उत्पादन के मार्च में लगभग 14 से 15 हजार ईकाई से गिर कर वर्तमान में करीब चार से पाँच हजार इकाई प्रतिमाह के औसत पर आ जाने के कारण संयंत्र में इस माह में दूसरी बार उत्पादन रोकना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर पिछले एक दशक में यह चौथी बार होगा, जब संयंत्र में उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाएगा। उत्पादन में गिरावट के कारण अब तक जमशेदपुर संयंत्र के सभी तीन हजार अस्थायी कर्मियों को बैठाया जा चुका है। इसके अतिरिक्त संयंत्र में लगभग साढ़े आठ हजार नियमित कर्मी काम करते हैं।
संयंत्र के डाँवाडोल हालत के कारण इस पर निर्भर निकटवर्ती आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के लगभग 50 सहायक उद्योग बंदी की कगार पर है तथा सैकड़ों अन्य खस्ताहाल हैं।

ज्ञातव्य है कि कंपनी ने उत्पादन में जबरदस्त गिरावट के कारण गत तीन नवंबर को लगभग 700 और अस्थायी कर्मियों को काम से हटाते हुए उत्पादन शिफ्ट को भी दो से घटा कर मात्र एक कर दिया था।
इससे पहले अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में भी दो बार 20 और 23 तारीख को कुल मिला कर लगभग 700 अस्थायी मजदूरों की छँटनी की गई थी।



और भी पढ़ें :