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बाल कविता : चलो मार्निंग वॉक पर

Updated: गुरुवार, 20 मार्च 2025 (13:52 IST)
दादाजी अब अंगुली पकड़ो,
चलो मॉर्निंग वॉक पर।
 
सुबह सबेरे पांच बजे ही,
छोड़ दिया बिस्तर मैंने।
ब्रश मंजन कर जूते पहने,
हूं तैयार सूट पहने।
चिड़िया चीं चुंग लगी चहकने,
नीम पेड़ की शाख पर।
 
सूरज अभी नहीं निकला है,
मौसम बड़ा सुहाना है।
दौड़ लगाकर सड़कों पर अब,
मुझको भी मस्ताना है।
गुस्से की मक्खी क्यों बैठी,
आज आपकी नाक पर।
 
अंडे से नन्हा सा चूजा,
जैसे बाहर आ जाता।
वैसे ही सूरज पूरब में,
क्षितिज फोड़ मुंह दिखलाता।
सवा पांच बज चुके उठो अब,
गुस्सा रख दो ताक पर।

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लेखक के बारे में
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
12, शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Mo.-+919131442512).... और पढ़ें

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