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कविता : हवा महल
किसी जादूगर ने निहत्थे आकाश की हवा में, छड़ी घुमाकर और छूमंतर बोलकर, नहीं बनाया है हवा महल। न ही गुब्बारे में कैद आंधी ... -
बाल एकांकी: काला सोना
मंच का परदा खुलता है और उस पर एक आकृति काला लबादा ओढ़े दिखाई देती है। वह आकृति नाचते हुए गा रही है। आद्या --ये भाई .... ... -
बाल गीत: हमको पैदल चलना है
नहीं कार में, ना ही बस में, ना बाइक पर जाना है। दादाजी के संग में पैदल, चलकर हमें दिखाना है। सूर्योदय से पहले घर से, ... -
बाल एकांकी: नालंदा की सुनो कहानी
मंच का पर्दा धीरे-धीरे खुल रहा है तभी मंच के पीछे से मध्यम लेकिन ओज पूर्ण स्वर में आवाज आ रही है। नालंदा की सुनो कहानी, ... -
पद्य कथा: छोटे प्राणी बड़े काम के
गई एक दिन चुनमुन चींटी, नदी किनारे पानी पीने। फिसला पैर गिरी पानी में, डर से छूटे उसे पसीने। नदी किनारे वहीँ पेड़ पर, एक ... -
बाल गीत : संविधान में लिखी हुई है
वोट डालकर हमको चुनना, है सरकार हमारी। संविधान में लिखी हुई है, यही व्यवस्था सारी। मिली हमें आज़ादी थी तो, नूतन पथ था ... -
वर्तमान में जीने वाले : एक पद्य कथा
एक पद्य कथा और प्रेषित है वेबदुनिया के लिए। एक बड़ा ज्योतिष विज्ञानी, तारों से बातें करता था। तारों को ही देख- देख कर, ... -
एक पद्य कथा : अभिमानी का सिर नीचा
यहां एक मौलिक और अप्रकाशित पद्य कथा प्रस्तुत हैं... एक संत के पास एक दिन, एक आदमी आया। बोला पानी पर चलने का, मंत्र सीख ... -
कविता: बेटी
अब बेटी है बनी कलेक्टर, बनी पुलिस कप्तान। बड़े सूरमाओं तक के अब, बेटी काटे कान। बेटी, बेटे से कुछ कम है, सोच नहीं यह ... -
क्रिसमस पर कविता: परियां उतरीं आसमान से
परियां उतरीं आसमान से चॉकलेट हाथों में लेकर, परियां उतरीं आसमान से। कुछ आईं हैं पंख लगाकर, कुछ उतरीं हैं वायुयान से। ... -
बाल गीत : आज मनाना क्रिसमस डे
डोर वैल की ट्रिन-ट्रिन सुनकर, मीना ने दरवाजा खोला। बाहर सांताक्लाज़ खड़े थे, टांगे थे कंधे पर झोला। हाथ बढ़ाकर बोले बेटी, ... -
हिन्दी दिवस पर बाल गीत : हिन्दी ऊपर लाना है
Hindi Diwas Poem in Hindi : खुलीं कापियां खुलीं किताबें, निकल पड़े बस्तों से पेन। मुन्ना बांच रहा पुस्तक में, मुरगी का ... -
बाल गीत: बुढ्ढी के बाल
लेकर आया लल्लू लाल, लाल लाल बुढ्ढी के बाल। हरे गुलाबी पीले भी हैं। स्वेत बैगनी नीले भी हैं। सजे धजे बैठे डिब्बे में, ... -
बाल कविता : चंद्र ग्रहण
बहुत दिनों से सोच रहा हूं, मन में कब से लगी लगन है। आज बताओ हमें पिताजी, कैसे होता सूर्य ग्रहण है। कहा पिताजी ने प्रिय ... -
बाल गीत: गरम जलेबी
मंगवा देना गरम जलेबी गरम जलेबी पापाजी से, मंगवा देना मम्मी। दो दो दादा दादी को दो, मुझे खिलाना दो मम्मी। -
बाल कविता: अम्मा हमने कार खरीदी
अम्मा हमने कार खरीदी यह तो बहुत काम की होती, मत कहना बेकार खरीदी। वर्षा जब होती है झम झम, हम इससे ही शाला जाते। पिंटू ... -
बच्चों की मनोरंजक कविता: ऊधम का घोड़ा
अम्मा में लाया हूं कागज़, नाव बना दो अभी फटाफट। कल जो नाव बनाई थी मां, वह दीदी ने ली थी छीन। फाड़-फूड़ कर करी बराबर, टुकड़े ... -
बाल कविता: इनको करो नमस्ते जी
आज गांव से आए काका, इनको करो नमस्ते जी। जब-जब भी वे मिलने आते, खुशियों की सौगातें लाते। यादें सभी पुरानी ... -
बाल गीत: बड़ी चकल्लस है
रोज-रोज का खाना खाना, बड़ी चकल्लस है। दादी दाल-भात रख देती, करती फतवा जारी। तुम्हें पड़ेगा पूरा खाना नहीं चले ... -
बाल गीत: सूरज रोज निकलता है
सुबह निकलकर दिन भर चलता, हुई शाम तो ढलता है। सूरज रोज निकलता है जी, सूरज रोज निकलता है। पूरब से हंसता मुस्काता। सोना ...
