वर्तमान में जीने वाले : एक पद्य कथा
एक बड़ा ज्योतिष विज्ञानी,
तारों से बातें करता था।
तारों को ही देख- देख कर,
लोगों का भविष्य पढ़ता था।
उस भविष्य वक्ता के तो थे,
लाखों-लाख लोग दीवाने।
कुछ बातें सच्ची होती तो,
लोग खड़े रहते सिरहाने।
तारों को ही देख-देख वह,
रात-रात भर पैदल चलता।
दिन भर तो वह सोता रहता,
होती रजनी तभी निकलता।
एक रात वह निकला घर से,
पैदल आगे बढ़ता आया।
आसमान को देख रहा था,
नीचे देख नहीं वह पाया।
तभी राह में आया गड्ढा,
फिसला पैर गिर गया नीचे।
बेहोशी में पड़ा रह गया,
बहुत देर तक आंखें मीचे।
आया होश जरा देरी में,
खुद को कीचड़ में था पाया।
बाहर नहीं निकल पाया तो,
जोरों से चीखा चिल्लाया।
सुनी चीख जब कुछ पथिकों ने,
तब उसको बाहर खिचवाया।
हाथ पैर मुंह धुलवाकर के,
धैर्य बंधाकर फिर समझाया।
व्यर्थ भागते हो भविष्य की,
बातें लोगों को बतलाने।
अच्छा तो बस यह होता है,
बातें वर्तमान की जानें।
अभी-आज में जीना ही तो,
सबसे अच्छा होता भाई।
वर्तमान में जीने वाले,
ने ही सदा सफलता पाई।
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