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शिरडी के साईं बाबा और दशहरा, जानिए 3 खास बातें

सोमवार,अक्टूबर 7, 2019
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संतों में सांई बाबा सर्वोच्च हैं। वे सिद्ध पुरुष, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, दलायु और चमत्कारिक हैं। जिन्होंने साईं को भजा उसके संकट उसी तरह दूर हो गए जिन्होंने हनुमान को भजा और तुरंत ही आराम पाया। आप जानिए साई बाबा और हनुमानजी के बीच क्या है कनेक्शन।
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शिरडी में जब साईं बाबा पधारे तो उन्होंने एक मस्जिद को अपने रहने का स्थान बनाया। आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। क्या वहां रहने के लिए और कोई स्थान नहीं था या उन्होंने जान-बूझकर ऐसा किया?
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सांई बाबा ने अपना प्रारंभिक जीवन मुस्लिम फकीरों के संग बिताया था, लेकिन उन्होंने किसी के साथ कोई भी व्यवहार धर्म के आधार पर नहीं किया। उनके लिए हिन्दू और मुस्लिम एक ही थे। वे जब मुस्लिमों से मिलते तो कहते थे, राम भला करेगे और जब हिन्दुओं से मिलते तो ...
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शिरडी के साईं बाबा के अनमोल वचन जो उन्होंने विभिन्न अवसरों पर कहे थे। कहते हैं कि जो भी शिरडी के साईं बाबा को दिल से पुकारता है बाबा उसके आसपास होने की अनुभूति दे ही देते हैं। आओ जानते हैं कि साईं बाबा अपने भक्तों के बारे में क्या कहते हैं।
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यूं तो शिरडी साईं बाबा के सैंकड़ों चमत्कार है लेकिन हम यहां बता रहा है मात्र दस ही चमत्कार। हो सकता है कि हमें कुछ महत्वपूर्ण चमत्कार या बाबा की कृपा के किस्से छुट गए हों।
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सांईं बाबा के पास एक ईंट हमेशा रहती थी। वे उस ईंट पर ही सिर रखकर सोते थे। उसे ही उन्होंने अपना तकिया बनाकर रखा था। दरअसल, यह ईंट उस वक्त की है, जब सांईं बाबा वैंकुशा के आश्रम में पढ़ते थे। वैकुंशा के दूसरे शिष्य सांईं बाबा से वैर रखते थे, लेकिन ...
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दशहरे का दिन खास तौर पर साईं की आराधना और उनके मंत्रों का जाप करना बहुत ही लाभकारी होता है। उनके इन चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से सभी मनोकामनाएं चाहे नौकरी की हो या शादी की
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शिरडी के साईं बाबा को लेकर कई फिल्में बनाई गई है। फिल्मों के अलावा उनके जीवन चरित्र पर एनिमेटेड स्टोरी भी बनाई गई है। आप ये फिल्लें या एनिमेटेड स्टोरी यूट्यूब पर देख सकते हैं। इसके अलावा साईं बाबा पर कई भाषओं में टीवी सीरियल भी बन चुके है और बन रहे ...
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बचपन में मां-बाप मर गए तो सांईं और उनके भाई अनाथ हो गए। फिर सांईं को एक वली फकीर ले गए। बाद में वे जब अपने घर पुन: लौटे तो उनकी पड़ोसन चांद बी ने उन्हें भोजन दिया और वे उन्हें लेकर वैंकुशा के आश्रम ले गईं और वहीं छोड़ आईं।
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साईं बाबा के दशहरे के दिन समाधि लेने लेना का रहस्य क्या है? इससे पहले उन्होंने रामविजय प्रकरण क्यों सुना? इस प्रकरण में कथा है कि राम ने रावण से 10 दिनों तक युद्ध लड़ा था और दशमी के दिन रावण मारा गया था। रावण के मारे जाने के कारण दशमी को ही दशहरा ...
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वर्तमान में साईं बाबा के विरोधी उन्हें चांद मिया मानते हैं। साईं विरोधियों अनुसार वे एक मुस्लिम थे और हिन्दुओं को किसी मुस्लिम की पूजा नहीं करनी चाहिए। आओ जानते हैं कि आखिर यह चांद मिया कौन थे। who is chand miya, chand miya sai baba in hindi, chand ...
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शिर्डी स्थित श्री साईं बाबा महा समाधि के 100 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। सन् 1918 में जब 15 अक्टूबर को दशहरा आया था, उस दशहरे के दिन दोपहर के समय श्री साईं बाबा ने आखिरी सांस ली थी।
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पहली बार शिर्डी आकर बाबा शिर्डी से पंचवटी गोदावरी के तट पर पहुंच गए थे, जहां उन्होंने ध्यान-तप किया। यहां बाबा की मुलाकात ब्रह्मानंद सरस्वती से हुई। बाबा ने उन्हें आशीर्वाद दिया। पंचवटी के बाद बाबा शेगांव जा पहुंचे, जहां वे गजानन महाराज से मिले। ...
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सांईं बाबा हिन्दू थे या मुस्लिम, यह मायने नहीं रखता। वे एक सच्चे और सिद्ध संत थे जिन्होंने अपने जीवन में और देह छोड़ने के बाद भी गरीबों, दलितों और भक्तों की नि:स्वार्थ मदद की। यहां हम उनके जन्म से लेकर उनके शिर्डी में आने तक की कहानी को बयां कर रहे ...
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शंकराचार्य के आदेश के तहत आजकल साईं बाबा की मूर्ति को कुछ प्रमुख मंदिरों से हटाया जा रहा है। लेकिन कितने लोग जानते हैं कि यदि बाबा को मंदिर में ही रहने का आसरा मिल जाता तो वे खंडहरनुमा मस्जिद में क्यों रहते?
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श्री सांईं बाबा जब शिर्डी में अपनी लीला कर रहे थे तब उनके साथ कई लोग थे। उनमें से कुछ उनके विरोधी भी थे, तो कुछ समर्थक। आज भी यह सिलसिला जारी है। यूं तो बाबा को साक्षात देखने वालों की लिस्ट में सैकड़ों लोग हैं लेकिन यहां उन लोगों के नाम लिख रहे हैं ...
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नासिक के प्रसिद्ध ज्योतिष, वेदज्ञ, 6 शास्त्रों सहित सामुद्रिक शास्त्र में भी पारंगत मुले शास्त्री एक बार नागपुर के धनपति सांईं भक्त बापूसाहेब बूटी के साथ शिरडी पधारे। जब दोनों अन्य लोगों के साथ बाबा के पास पहुंचे तो बाबा उस वक्त बाबा भक्तों को आम ...
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शिरडी के सांईं बाबा के भक्त म्हालसापति का पूरा नाम म्हालसापति चिमनजी नगरे था। वे पेशे से सुनारी का कार्य करते थे। म्हालसापति ने ही बाबा को सबसे पहले 'आओ साईं' कहकर पुकारा और उन्हें साईं नाम दिया। म्हालसापति पर बाबा को अटूट विश्वास था।
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शिरडी सांईं बाबा, साई बाबा, कोलंबा, भिक्षा पात्र, पांच घर, सखाराम पाटील शैलके, वामनराव गोंदकर, बय्याजी अप्‍पा कोते पाटील, बायजाबाई कोते पाटील, नंदराम मारवाडी
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