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  4. What is the connection of Shirdi Sai Baba with Dussehra

शिरडी के साईं बाबा का दशहरा से क्या है कनेक्शन?

Sai Punyatithi
महाराष्ट्र के शिरडी में स्थित साईं बाबा का भव्य समाधि मंदिर है। यहां पर प्रतिदिन लाखों भक्तों दर्शन करने के लिए दूर दूर से आते रहते हैं। शिरडी के साईं बाबा एक चमत्कारिक संत हैं। उनकी समाधि पर जो भी गया झोली भरकर ही लौटा है। सांई बाबा का दशहरे या विजयादशमी से क्या कनेक्शन है आओ जानते हैं इस संबंध में खास बातें।ALSO READ: Dussehra 2024 Date: कब है दशहरा? 12 या 13 अक्टूबर को, कंफ्यूजन करें दूर
 
1. तात्या की मृत्यु : कहते हैं कि दशहरे के कुछ दिन पहले ही सांईं बाबा ने अपने एक भक्त रामचन्द्र पाटिल को विजयादशमी पर 'तात्या' की मृत्यु की बात कही। तात्या बैजाबाई के पुत्र थे और बैजाबाई सांईं बाबा की परम भक्त थीं। तात्या, सांईं बाबा को 'मामा' कहकर संबोधित करते थे, इसी तरह सांईं बाबा ने तात्या को जीवनदान देने का निर्णय लिया।
 
2. रामविजय प्रकरण : जब बाबा को लगा कि अब जाने का समय आ गया है, तब उन्होंने श्री वझे को 'रामविजय प्रकरण' (श्री रामविजय कथासार) सुनाने की आज्ञा दी। श्री वझे ने एक सप्ताह प्रतिदिन पाठ सुनाया। तत्पश्चात ही बाबा ने उन्हें आठों प्रहर पाठ करने की आज्ञा दी। श्री वझे ने उस अध्याय की द्घितीय आवृत्ति 3 दिन में पूर्ण कर दी और इस प्रकार 11 दिन बीत गए। फिर 3 दिन और उन्होंने पाठ किया। अब श्री. वझे बिलकुल थक गए इसलिए उन्हें विश्राम करने की आज्ञा हुई। बाबा अब बिलकुल शांत बैठ गए और आत्मस्थित होकर वे अंतिम क्षण की प्रतीक्षा करने लगे।
 
3. साईं बाबा ने ली समाधि : सांईं बाबा ने शिर्डी में 15 अक्टूबर दशहरे के दिन 1918 में समाधि ले ली थी। 27 सितंबर 1918 को सांईं बाबा के शरीर का तापमान बढ़ने लगा। उन्होंने अन्न-जल सब कुछ त्याग दिया। बाबा के समाधिस्त होने के कुछ दिन पहले तात्या की तबीयत इतनी बिगड़ी कि जिंदा रहना मुमकिन नहीं लग रहा था। लेकिन उसकी जगह सांईं बाबा 15 अक्टूबर, 1918 को अपने नश्वर शरीर का त्याग कर ब्रह्मलीन हो गए। उस दिन विजयादशमी (दशहरा) का दिन था।
 
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