खंडग्रास चंद्रग्रहण 26 को
प्राकृतिक आपदा के बन रहे योग
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ग्रहण समय की स्थिति के बारे में ज्योतिष विलसनलाल ने बताया कि जुलाई से सितंबर माह तक बाढ़, आतंकी कार्रवाई, भूकंप, समुद्री तूफान आदि से जनधन की हानि का योग है। खंडग्रास चंद्रग्रहण ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन 26 जून को आसाम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, पं. बंगाल में शाम 3.49 बजे से ग्रहण प्रारंभ होगा, जो शाम 6.33 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का पर्वकाल 2 घंटा 45 मिनट रहेगा।
पश्चिम प्रदेशों में चंद्रोदय ग्रहणकाल के बाद आएगा। इसके कारण इन क्षेत्रों में ग्रहण दिखाई नहीं देगा। ग्रहण का सूतक 26 जून की सुबह 6.45 बजे प्रारंभ होगा। उन्होंने बताया कि नागालैंड की राजधानी कोहिमा में ग्रहण प्रारंभ के समय राशि -धनु, नक्षत्र- मूल, योग- ब्रह्मा, करण- बव, लग्न- वृश्चिक ग्रहविहीन है।
उन्होंने बताया कि ग्रह स्थिति के अनुसार जुलाई से सितंबर 2010 तक गंभीर आतंकी दुर्घटनाएँ, प्राकृतिक हलचल, नेता, अभिनेता एवं उद्योगपतियों के लिए दुखद समाचार का अशुभ योग बन रहा है। मेष, वृषभ राशि पर सामान्य फलकारी, मिथुन, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धुन एवं मकर राशि के जातकों के लिए कष्टकारी, तुला, कर्क, कुंभ, मीन राशि के जातकों के लिए खंडग्रास चंद्रग्रहण शुभकारी योग में रहेगा।
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ग्रहण स्पर्श के समय तो भारत में चंद्र दिखाई ही नहीं देगा लिहाजा चंद्रग्रहण का प्रभाव पड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता। क्योंकि इस दिन भारत के पूर्वी संभाग में कोलकाता और अगरतला में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 17 मिनट पर होगा, जो ग्रहण मोक्ष के ठीक 15 मिटन पहले हो रहा है।
जहाँ ग्रहण दृष्य होगा, वहाँ भी सामान्य स्नान आदि से शुद्धि हो सकती है। भारत में अदृष्य ग्रहणों में 11 जुलाई को सूर्य ग्रहण और 21 दिसंबर को खग्रास चंद्रग्रहण की घटना घटित होगी। ये दोनों ग्रहण विदेशों में ही दिखाई देने के कारण भारत में मान्य नहीं होगा।

