ये है भारत की साइलेंट सिटी जहां है No Horn का रिवाज, यहां हॉर्न नहीं सुनाई देती है शांति
No horn city of India
No horn city of India: हमारे देश में ट्रेफिक के बढ़ते शोर से लगभग हर शहर प्रभावित है। बढ़ते शोर के कारण लोग सुकून को तरसते हैं लेकिन आज हम आपको भारत के ऐसे शहर के बारे में बता रहे हैं, जहां आपको ट्रैफिक का कोई शोर सुनने को नहीं मिलेगा। भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में बसा है मिजोरम, जिसकी राजधानी है अजवाइल। मिजोरम पहुंचकर आपको गाड़ियों के हॉर्न से ज्यादा फिजाओं का संगीत सुनाई देगा। मिजोरम में लोग बेवजह हॉर्न मारना पसंद नहीं करते।
मिजो कल्चर और शांति का रिश्ता
मिजो कल्चर कुछ ऐसा है, जिसे शब्दों में बयान करना जरा मुश्किल है। इसका मकसद मेहमाननवाजी, दयालु और स्वार्थ से परे दूसरों की मदद करना है। कम्युनिटी के तौर पर मिजो हमेशा समुदायों के वेलफेयर को आगे रखते हैं, ना कि खुद के। इसलिए मिजोरम के लोग हॉर्न नहीं मारने का पालन इतनी सख्ती से करते हैं।
अजवाइल में ट्रैफिक और शांति का संतुलन
अजवाइल में 3.5 लाख लोग रहते हैं, जिसमें से 1.5 लाख रजिस्टर्ड वाहन अजवाइल के हैं। चूंकि यहां कार काफी ज्यादा हैं और सड़कें संकरी हैं इसलिए 15 किलोमीटर का रास्ता तय करने में भी कई घंटों का समय लग जाता है। लेकिन बावजूद इसके शहर ने अपनी एक खास इमेज बनाई है। यहां जिंदगी की भाग-दौड़ नहीं है।
हालांकि, पुलिस भी इस व्यवस्था को बनाए रखने में मदद करती है, जैसे कि वह तेज आवाज वाली बाइकों को इजाजत नहीं देती, ट्रैफिक जाम में ओवरटेक करने की कोशिश करने वालों को फटकार लगाई जाती है। साथ ही टूरिस्ट्स को भी इस नियम के बारे में बताया जाता है।
अजवाइल से सीख
अजवाइल हमें सिखाता है कि शांति और सभ्यता के साथ भी हम सहजता से रह सकते हैं। यह हमें याद दिलाता है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है।
अजवाइल एक ऐसा शहर है जहां शोर नहीं, बल्कि शांति बोलती है। यह शहर हमें सिखाता है कि हम कैसे एक शांत और सौहार्दपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं।

