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सर्वपितृ अमावस्या पर अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन तर्पण का केंद्र बना इंदौर

भागीरथपुरा के दिवंगतों और पुणे के केतन अग्रवाल को दी गई श्रद्धांजलि, उज्जैन सिद्धवट सहित विभिन्न तीर्थस्थलों पर तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन

Sarvapitri Amavasya
सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर 'कृष्णा गुरुजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी' द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सामूहिक तर्पण का केंद्र इंदौर बना। आध्यात्मिक चिंतक कृष्णकांत मिश्रा ‘कृष्णा गुरुजी’ के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने इंदौर, उज्जैन और पुणे को श्रद्धा एवं संवेदना के एक सूत्र में बांध दिया। देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों के साथ-साथ अज्ञात एवं असमय दिवंगत हुए लोगों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना की।
 
आयोजन के दौरान इंदौर के भागीरथपुरा की दूषित पेयजल त्रासदी में कालकवलित हुए लोगों, पुणे के युवा केतन अग्रवाल तथा विभिन्न आपदाओं एवं दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को सामूहिक श्रद्धांजलि दी गई। विशेष रूप से उन दिवंगतों के लिए तर्पण किया गया, जिनका स्मरण या तर्पण करने वाला कोई नहीं था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अतृप्त आत्माओं की शांति और सद्गति के लिए भी प्रार्थना की गई।
 
उज्जैन के पावन सिद्धवट से लालू गुरु ने ऑनलाइन जुड़कर तर्पण संपन्न कराया तथा सहभागियों को सिद्धवट मंदिर एवं मां शिप्रा के दर्शन कराए। इसके साथ ही हरिद्वार से पंडित राजीव शर्मा, ऋषिकेश से पंडित दिनेश जी और पुष्कर से योगेश पराशर जी ने भी अपने-अपने तीर्थस्थलों से सहभागिता की। संस्था की ओर से इन सभी तीर्थस्थलों पर ब्राह्मण भोजन कराया गया।
 
पुणे के केतन अग्रवाल की स्मृति में आयोजित प्रार्थना के लिए उनके पिता श्री विशाल अग्रवाल को आमंत्रित किया गया था। कृष्णा गुरुजी ने उनसे दूरभाष पर चर्चा कर केतन की स्मृति में किए गए तर्पण की जानकारी दी और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
 
आयोजकों के अनुसार अमेरिका, कनाडा, दुबई, सिंगापुर और यूरोप के विभिन्न देशों से श्रद्धालु इस नि:शुल्क आयोजन में सम्मिलित हुए। तीर्थस्थलों के प्रत्यक्ष दर्शन और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से विदेशों में बसे परिवारों को भी अपनी जड़ों से जुड़कर श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला।
 
कृष्णा गुरुजी ने बताया कि वे विगत 12 वर्षों से सर्वपितृ अमावस्या पर इस सेवाभाव के साथ आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ ही दूसरों के दुःख में सहभागी बनना अत्यंत आवश्यक है। भागीरथपुरा के पीड़ित परिवार हों या केतन अग्रवाल के परिजन, समाज को पूरी संवेदना के साथ उनके साथ खड़ा होना चाहिए।"
 
ब्राह्मण भोजन के अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर जरूरतमंदों के लिए अन्नक्षेत्र (भोजन सेवा) संचालित किया गया। मुंबई के हाजी अली स्थित दिव्यांगजन संस्था में भी भोजन की व्यवस्था की गई। कृष्णा गुरुजी ने वृद्धाश्रमों, कुष्ठ आश्रमों और असहाय परिवारों के बीच भोजन वितरित कर 'श्रद्धा को सेवा से जोड़ने' का संदेश दिया।
 
कार्यक्रम का समापन ‘पितृ देवेभ्यो नमः’ के जाप और सामूहिक शांति पाठ के साथ हुआ। अंत में सहयोगी आचार्यों, जयलक्ष्मी जी तथा देश-विदेश से जुड़े सभी सहभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
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