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एक्‍सीडेंटल महापौर और जख्‍मी इंदौर, आखिर किसके पाप की सजा भुगत रही जनता, कांग्रेस ने उठाए सवाल

नगर निगम के 311 ऐप पर अब तक 20 लाख शिकायतें, 3 महीने में ही 25 हजार शिकायतें

Updated: बुधवार, 3 जून 2026 (13:32 IST)
जहरीला पानी। 36 मौतें। खराब सड़कें। बदहाल ट्रैफिक। दुविधाओं से भरे प्रोजेक्‍ट्स। भीषण गर्मी में जल संकट। बार-बार गुल होती बत्‍ती और विकास के नाम पर हरियाली का नाश। ये वर्तमान इंदौर की कुल जमा कहानी है। इंदौर की बर्बादी की ये स्‍क्रिप्‍ट लिखने वाले इंदौर के ही जनप्रतिनिधि और जिम्‍मेदार हैं। जिन्‍होंने इंदौर को अपने हाल पर छोड़ दिया है। जबकि वार्ड और पंचायतों से लेकर नगर निगम प्रशासत तक। प्रदेश से लेकर केंद्र तक एक ही दल की सत्‍ता है। काम करने वाले भी यही और काम नहीं करने वाले भी यही।

इस पूरी कहानी के पीछे बार-बार सीधेतौर पर जिसे जिम्‍मेदार ठहराया जा रहा है वो हैं इंदौर के महापौर पुष्‍यमित्र भार्गव। पानी के संकट को लेकर तो महापौर और कांग्रेस नेता जीतू पटवारी आमने सामने हैं ही। इस बीच कांग्रेस नेता सज्‍जन सिंह वर्मा ने महापौर को ‘एक्‍सीडेंटल महापौर’ कहकर आग में घी डालने का काम कर दिया है। कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही हैं, जब महापौर आपका, नगरीय प्रशासन मंत्री आपके शहर का यहां तक कि मुख्‍यमंत्री आपका तो फिर आप ही का ये शहर किस के पाप की सजा भुगत रहा है।

सज्‍जन वर्मा बोले : महापौर, नगरीय प्रशासन मंत्री के अलावा कौन जिम्‍मेदार?
मध्‍यप्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सज्‍जन सिंह वर्मा ने वेबदुनिया को फोन पर बताया कि इंदौर की जनता को प्‍यासा मारने से लेकर उनकी जहरीले पानी से जान लेने तक और इंदौर की इस बर्बादी के पीछे महापौर, नगरीय प्रशासन मंत्री हैं। विपक्ष क्‍या करेगा और कितना करेगा। हम सडक पर बैठ गए, आंदोलन कर लिए, प्रदर्शन कर लिए। अब क्‍या लठ लेकर मारने जाएं। झूठे वादे कर के जनता के वोट ले लिए और जनता को ठग लिया इन्‍होंने। हमने पानी की जांच करा ली, ऑडिट करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन इन्‍होंने जो किया उससे तो पूरे देश में इंदौर की छवि धूमिल करने का मैसेज चला गया। इन तीनों के अलावा कौन जिम्‍मेदार है आप बता दो कोई दूसरा जिम्‍मेदार हो तो।

क्‍या है कांग्रेस का दावा : कांग्रेस नेता और प्रदेश अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में आयोजित एक प्रेसवार्ता में बताया कि उन्‍होंने इंदौर में पिये जाने वाले पानी के 240 सैंपल की जांच करवाई थी, जिसमें से 98 पानी के सैंपल फेल पाए गए है। उन्‍होंने दावा किया कि इस पानी में ई-कोलाई समेत दूसरे हानिकारक बैक्टीरिया मिले हैं, जो लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हैं। कांग्रेस ने इंदौर के 29 वार्डों से पानी के सैंपल लिए, जिन्हें रासायनिक जांच के लिए दिल्ली भी भेजा गया। जांच में 240 में से 98 सैंपल फेल पाए गए। पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया सहित अन्य हानिकारक बैक्टीरिया मिले, जो डायरिया और हैजा जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से इंदौर का वाटर ऑडिट कराने की मांग की है।

महापौर ने पिया नल का पानी : इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने विपक्ष के दावों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए हाल ही में जनता के सामने खुद नल का पानी पीकर इंदौर के पानी को सुरक्षित बताया है।

इंदौर में जहरीले पानी से 36 मौतें : इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित (जहरीले) पानी के कारण मौतें हुई हैं, जिसमें विपक्ष (कांग्रेस) और स्थानीय लोगों का दावा 36 मौतों का है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 22 मौतों की पुष्टि की है। यह दुखद घटना मुख्य रूप से दिसंबर 2025 के दौरान सामने आई थी जब पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज (गटर) का गंदा पानी मिल जाने से पूरे इलाके में उल्टी-दस्त और हैजा जैसी महामारी फैल गई थी।

311 पर 20 लाख शिकायतें दर्ज : इंदौर की जनता तमाम समस्‍याओं से कितनी परेशान है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम की अपनी हेल्पलाइन सेवा 311 पर अब तक लाखों शिकायतें मिल चुकी हैं। खास बात है कि खुद नगर निगम प्रशासन ने अपने जारी किए गए प्रेसनोट में अपनी ही पोलपट्टी को उजागर किया है। मोबाइल ऐप 311 सेवा पर निगम के ही मुताबिक 9 लाख से ज्यादा सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, तो अब तक नागरिकों द्वारा इस ऐप के माध्यम से 20 लाख शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। निगम का दावा है कि इनमें से ज्‍यादातर शिकायतें हल कर दी गई हैं। उनका कहना है कि समाधान का औसत समय 12 घंटे रहा है। ऐसे में सवाल है कि अगर समस्‍याएं हल हो रही हैं तो लोग शिकायतों का अंबार क्‍यों लगा रहे हैं।

बिना रसूख के नहीं होता काम : नगर निगम भले यह दावा करे कि ऐप के माध्‍यम से लोगों की शिकायतें हल हो रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि जब तक आम लोग किसी प्रभावशाली नेता या रसूखदार की मदद नहीं लेते कोई समस्‍या सुनने को तैयार नहीं है। निगम प्रशासन ने भले ही कंट्रोल रूम से लेकर हेल्पलाइन सर्विस तक सेवाएं शुरू कर रखी हैं, लेकिन इंदौर के नागरिकों की समस्याएं जस की तस हैं।

लोगों की शिकायतें कैसी कैसी : लोग जो शिकायतें कर रहे हैं इनमें सडक़, ड्रेनेज, गंदे पानी की शिकायतों से लेकर अवैध निर्माण, अतिक्रमण और गड्ढों से लेकर उसी तरह की समस्याएं हैं, जिसका सामना सभी 85 वार्डों के नागरिकों को करना पड़ता है। जगह जगह खुदी हुई सडकें और गढ्डे मिल जाएंगे।

इंदौर नगर निगम के हाल
ऐप की लोकप्रियता बता रही इंदौर का हाल : बीते एक साल में ऐप 311 को 75 हजार 205 लोगों ने डाउनलोड किया है। वर्तमान में ऐप के कुल डाउनलोड की संख्या बढकर 12 लाख 23 हजार 525 तक पहुंच गई है। इनमें से 9 लाख 32 हजार 111 एक्‍टिव यूजर्स हैं। जो नियमित रूप से ऐप का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, वहीं अब तक पंजीकृत नागरिकों द्वारा ऐप के माध्यम से लगभग 20 लाख शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। जिससे यह साबित होता है कि लोगों के पास कितनी समस्‍याएं हैं जो मैनुअली हल नहीं हो पा रही है।

3 महीने में कुल 25 हजार 786 शिकायतें : बता दें कि इस साल जनवरी, फरवरी एवं मार्च में स्वच्छता प्रबंधन (SWM) से संबंधित कुल 25 हजार 786 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 25 हजार 700 शिकायतों का निर्धारित समयसीमा के भीतर सफलतापूर्वक निराकरण करने का निगम प्रशासन ने दावा किया है।
लेखक के बारे में
नवीन रांगियाल
नवीन रांगियाल DAVV Indore से जर्नलिज्‍म में मास्‍टर हैं। वे इंदौर, भोपाल, मुंबई, नागपुर और देवास आदि शहरों में दैनिक भास्‍कर, नईदुनिया, लोकमत और प्रजातंत्र जैसे राष्‍ट्रीय अखबारों में काम कर चुके हैं। करीब 15 साल प्रिंट मीडिया में काम करते हुए उन्‍हें फिल्‍ड रिपोर्टिंग का अच्‍छा-खासा अनुभव है। उन्‍होंने अखबार.... और पढ़ें

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