suvichar

अनिका के लिए जमा हुए 8 करोड़ रुपए, इस वजह से बढ़ गई इंजेक्शन की कीमत, फिर बढ़ी मां-पिता की परेशानी

Updated: गुरुवार, 13 अगस्त 2026 (16:59 IST)
दुर्लभ बीमारी से ग्रसित इंदौर की मासूम अनिका की इंजेक्शन के लिए जंग जारी है। माता-पिता रोजाना पैसा जमा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अनिका का इलाज तभी ही संभव हो सकेगा जब अमेरिका से उसका इंजेक्शन आएगा।

बता दें कि उसके लिए पर्याप्‍त रकम जमा हो गई थी, लेकिन हाल ही में डॉलर और रुपए के एक्सचेंज रेट में बदलाव होने के कारण 9 करोड़ का इंजेक्शन अब 9.50 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ऐसे में उनका संघर्ष भी बढ़ गया है।

बता दें कि इंदौर की मासूम अनिका शर्मा के इलाज के लिए उसके माता-पिता पिछले 9 महीनों से क्राउड फंडिंग के जरिए 8 करोड़ रुपए से अधिक जुटा चुके हैं, लेकिन डॉलर के बढ़ते रेट के कारण अमेरिका से आने वाले जीवनरक्षक इंजेक्शन की कीमत अब 9 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।

अब उस इंजेक्शन को मंगाने के लिए 9 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत होगी। अब माता-पिता को इंतजार है कि जिन लोगों ने राशि देने का वादा किया था, वे भी जल्द राशि उपलब्ध करा दें, ताकि उनकी बेटी का इलाज जल्द शुरू हो सके।

कहां से मिली मदद : बता दें कि इंदौर में सबसे ज्यादा उन्हें मदद मिली। इसके बाद वे मुंबई भी गए और वहां से कई लोगों ने उन्हें मदद की, लेकिन अभी भी उतनी राशि नहीं जुट पाई है, जितनी इंजेक्शन खरीदने के लिए जरूरी है। मासूम अनिका का मामला इंदौर हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है और कोर्ट ने सरकार को मदद करने के लिए कहा है।

9 माह में जुटे 8 करोड़ : जब माता-पिता को पता चला कि अनिका को यह बीमारी है, तो उन्होंने इलाज के बारे में जानकारी जुटाई। अनिका मध्यमवर्गीय परिवार से है। उसकी बीमारी के इलाज के लिए एक इंजेक्शन जरूरी है, जिसकी कीमत 9 माह पहले साढ़े 8 करोड़ रुपये थी। अब उस इंजेक्शन की कीमत बढ़कर 9 करोड़ रुपये हो गई है। अनिका को वह इंजेक्शन तभी दिया जा सकता है, जब उसका वजन साढ़े 13 किलो से कम हो। माता-पिता के लिए पैसे जुटाने के अलावा अनिका का वजन कम रखना भी चुनौती से कम नहीं है। उसे कम कैलोरी की डाइट देकर वजन को नियंत्रित किया गया है। फिलहाल उसका वजन साढ़े 11 किलो हो चुका है।

क्या है बीमारी : स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रॉफी टाइप 2 एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है। यह मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका कोशिकाओं (मोटर न्यूरॉन्स) को नुकसान पहुंचाती है। यह आमतौर पर 6 से 18 महीने की उम्र के बच्चों में सामने आती है। इस स्थिति से पीड़ित बच्चे बिना सहारे के बैठ सकते हैं, लेकिन वे अपने दम पर खड़े नहीं हो सकते और चल नहीं सकते हैं।

Show comments

Cockroach Janta Party का 'Jantar-Mantar Season 2' जल्द, कौनसे होंगे मुद्दे, अभिजीत दिपके ने प्लान के बारे में क्या बताया

Weather Update : 5,000 KM का क्लाउड बेल्ट क्यों है खास? क्या है चिंता कारण, IMD ने जारी किया अलर्ट

Electric Scooter : महंगे पेट्रोल से मिलेगा छुटकारा, बाजार में आया सस्ता इलेक्ट्रिक स्कूटर, 3kWh बैटरी और USB पोर्ट

'लुंगी वाला' बयान पर संसद में बवाल, सुष्मिता देव को उपसभापति ने लगाई फटकार, सदन में जमकर हंगामा

Google Pixel 11 Series Launch की लॉन्चिंग डेट, कन्फर्म 7 साल के अपडेट के साथ आएंगे नए Pixel फोन

सभी देखें

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

Weather Alert : अगले 7 दिन कैसा रहेगा मौसम, IMD ने जारी किया अलर्ट

राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में अनोखा प्रदर्शन, दान पात्र में मिले 2.15 लाख रुपए हनुमान मंदिर में चढ़ाए

15 अगस्त 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर साझा करने के लिए खास शुभकामनाएं और विचार

नांदेड़ में पंजाब के पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला, अस्पताल में भर्ती, जानें कौन हैं सुखबीर बादल

अगला लेख