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गुरु समर्थ रामदास नवमी कब है, क्यों मनाई जाती है?

Written By WD Feature Desk
Updated: बुधवार, 11 फ़रवरी 2026 (10:35 IST)
Das Navami: छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु और महान संत समर्थ रामदास स्वामी की पुण्यतिथि को 'दास नवमी' के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र और पूरे भारत में इस दिन का बहुत अधिक आध्यात्मिक महत्व है। यहां वर्ष 2026 में इसकी तिथि और महत्व के बारे में पूरी जानकारी दी गई है:ALSO READ: Mahashivratri 2026: 11 शुभ योग और 5 ग्रहों का राजयोग! जानें शिव पूजा का सबसे सटीक मुहूर्त और राहुकाल की चेतावनी
 
  1. समर्थ रामदास नवमी कब है? 
  2. क्यों मनाई जाती है?
  3. समर्थ रामदास स्वामी के बारे में खास बातें
  4. शिवाजी महाराज के गुरु
  5. 'दासबोध' ग्रंथ
  6. हनुमान भक्ति और शक्ति
  7. जय जय रघुवीर समर्थ
  8. कैसे मनाई जाती है दास नवमी?
  9. सज्जनगढ़ पर उत्सव
  10. ग्रंथ पाठ
  11. कीर्तन और प्रवचन
  12. उनका अमर संदेश
 

समर्थ रामदास नवमी कब है? 

हिंदू पंचांग के अनुसार, समर्थ रामदास नवमी माघ मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है तथा अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार तारीख 11 फरवरी, 2026, दिन बुधवार को मनाई जा रही है। 

 

क्यों मनाई जाती है? 

माघ कृष्ण नवमी के दिन ही समर्थ रामदास स्वामी ने महाराष्ट्र के सज्जनगढ़ किले पर अपनी देह त्यागी थी और महासमाधि ली थी। उनकी याद में ही यह 'दास नवमी' मनाई जाती है। उन्होंने समाज को गुलामी की मानसिकता से बाहर निकालने और बल/ शक्ति व भक्ति का मार्ग दिखाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इसीलिये प्रतिवर्ष 11 फरवरी को उनका महासमाधि दिवस मनाया जाता है।ALSO READ: Mahashivratri upay: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, रात को इस समय जलाएं दीपक
 

समर्थ रामदास स्वामी के बारे में खास बातें

 

1. शिवाजी महाराज के गुरु

वे छत्रपति शिवाजी महाराज के मार्गदर्शक थे। उन्होंने शिवाजी को धर्म की रक्षा और स्वराज्य स्थापना के लिए प्रेरित किया था।
 

2. 'दासबोध' ग्रंथ

उन्होंने प्रसिद्ध ग्रंथ 'दासबोध' की रचना की, जो आज भी जीवन जीने की कला, भक्ति और राजनीति का अनुपम संगम माना जाता है।
 

3. हनुमान भक्ति और शक्ति

उन्होंने युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए महाराष्ट्र में जगह-जगह 11 मारुति (हनुमान) मंदिरों की स्थापना की और 'अखाड़े' बनवाए।

 

4. जय जय रघुवीर समर्थ

उनका प्रसिद्ध मंत्र 'जय जय रघुवीर समर्थ' आज भी लाखों लोगों को ऊर्जा देता है।
 

कैसे मनाई जाती है दास नवमी?

सज्जनगढ़ पर उत्सव

महाराष्ट्र के सतारा स्थित सज्जनगढ़ किले पर बहुत बड़ा उत्सव होता है। हजारों भक्त वहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
 

ग्रंथ पाठ

इस दिन घरों और मंदिरों में 'दासबोध' और 'मनाचे श्लोक' (मन के श्लोक) का सामूहिक पाठ किया जाता है।
 

कीर्तन और प्रवचन

समर्थ रामदास जी की शिक्षाओं और उनके जीवन के प्रसंगों पर आधारित कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।
 

उनका अमर संदेश

"सावधान होकर काम करें, आलस्य को त्यागें और धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें।"
 
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Raajshri Kasliwal
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