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संत दादू दयाल जी कौन थे? उन्होंने कौन सा आंदोलन चलाया था?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026 (10:50 IST)

कौन थे संत दादू दयाल जी?

Dadu Dayal philosophy: संत दादू दयाल का जन्म फाल्गुन सुदी अष्टमी संवत् 1601 तथा सन् 1544 ई. को अहमदाबाद हुआ था। उनके पिता का नाम लोदीराम जो कि पिंजारा रुई धुनने वाली जाति के थे, जिन्हें धुनिया कहा जाता है और माता का नाम बसी बाई था। संत दादू दयाल (1544–1603) 16वीं शताब्दी के महान निर्गुण भक्ति संत, कवि और समाज-सुधारक थे। लेकिन उनका अधिकांश जीवन राजस्थान (विशेषकर नारैणा, जयपुर के पास) में बीता।ALSO READ: Tortoise Vastu: कौनसा कछुआ देगा शुभ फल तांबे या क्रिस्टल का? जानें अपनी मनोकामना के अनुसार सही कछुआ चुनने का तरीका
 
  • कौन थे संत दादू दयाल जी?
  • उन्होंने कौन सा आंदोलन चलाया था?
  • निर्गुण भक्ति आंदोलन
  • दादू पंथ
  • मुख्य सिद्धांत
 
वे भक्ति काल के उन संतों में से थे जिन्होंने ईश्वर को निर्गुण (बिना रूप) माना और जाति-पांति और ऊंच-नीच का विरोध किया। उन्होंने जहां हिंदू–मुस्लिम एकता पर जोर दिया था, वहीं आडंबर और कर्मकांड का विरोध भी किया। उनकी वाणी सरल भाषा में थी, जिससे सामान्य लोग भी आध्यात्मिक ज्ञान समझ सकें।
 

उन्होंने कौन सा आंदोलन चलाया था?

संत दादू दयाल ने निर्गुण भक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाया और दादू पंथ की स्थापना की।
 

1. निर्गुण भक्ति आंदोलन

यह आंदोलन ईश्वर की निराकार उपासना पर आधारित था। इस आंदोलन के प्रमुख संतों में कबीर, रैदास और दादू दयाल शामिल थे। इसका उद्देश्य था सामाजिक समानता, धार्मिक सहिष्णुता वौर आंतरिक साधना यानी मन की शुद्धि।
 

2. दादू पंथ

दादू दयाल के अनुयायियों ने उनके उपदेशों पर आधारित एक पंथ की स्थापना की, जिसे दादू पंथ कहा जाता है। यह पंथ आज भी राजस्थान और मध्य भारत में सक्रिय है। दादू पंथ के साधु 'दादूपंथी' कहलाते हैं।
 

3. मुख्य सिद्धांत

- उनकी शिक्षाओं में मुख्य सिद्धांत- 'एक ही ईश्वर है'
- प्रेम और भक्ति ही मुक्ति का मार्ग है
- बाहरी दिखावे से अधिक अंतरात्मा की शुद्धता जरूरी है
- सभी मनुष्य समान हैं, आदि थे।
 
संत दादू दयाल का निधन जेठ वदी अष्टमी, संवत् 1660 (सन् 1603 ई.) को हुआ था। उनकी शिक्षाएं आज भी सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
 
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