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क्या आप जानते हैं नदी में सिक्के क्यों फेंके जाते हैं, जानिए 10 हिन्दू परंपराएं

मंगलवार,जून 2, 2020
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शास्त्रों के अनुसार एकादशी व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष माहेश्वरी समाज द्वारा महेश नवमी पर्व 31 मई को 2020, रविवार को मनाया जाएगा।
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सुहागिन महिलाओं द्वारा हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखा जाता है। वट वृक्ष का पूजन और सावित्री-सत्यवान की कथा का स्मरण करने के विधान के कारण ही यह व्रत वट सावित्री के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
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श्री शनिदेव अध्यात्म के मालिक हैं, किसी भी आराधना, साधना, सिद्धि हेतु शनिदेव की उपासना परमावश्यक है।
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शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता सिर्फ और सिर्फ भगवान परशुराम ही माने जाते हैं। परशुराम जी के शिष्यत्व का लाभ दानवीर कर्ण ही ले पाए जिसे उन्होंने ब्रह्मास्त्र की दीक्षा दी।
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इस वर्ष रविवार, 26 अप्रैल 2020 को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अक्षय शुभफल मिलता है। इस तिथि को हिन्दू पंचांग में बेहद शुभ माना जाता है।
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्‍यापी लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ा दिया है। देश को दिए अपने संबोधन में मोदी ने अपने भाषण में सप्तपदी यानी 7 बातों पर अमल करने को कहा। पीएम मोदी के मुताबिक इन 7 बातों को मानने के ...
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गणगौर माता के दरबार में हाजिरी देने के समय उखाणे / उखाने बोले जाते हैं। पूजा करने वाली महिलाएं एक-एक करके माता के सामने अपने पल्लू के कोने को कलश के पानी में डुबो कर माता जी के मुख को छुआती हुई इन उखाणे का उच्चारण करतीं हैं जिनमें उनके पति के नाम ...
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नव-संवत्सर हिन्दू नव वर्ष का आरंभ है जो चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को शक्ति-भक्ति की उपासना, नवरात्रि के साथ प्रारंभ होता है
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होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।
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पूरे विश्वभर में मशहूर बरसाना की लठमार होली में महिलाएं, पुरुषों के पीछे अपनी लाठी लेकर भागती हैं और लाठी से मारती हैं।
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फाल्गुन मास चंद्र देव की आराधना के लिए सबसे सही और उपयुक्त समय होता है, क्योंकि यह चंद्रमा का जन्म माह माना जाता है।
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पौराणिक शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। इस दिन भगवान शिव जी की विधिपूर्वक आराधना करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। आइए जानें कैसे करें पूजन :-
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प्रयागराज। आस्था, विश्वास और संस्कृतियों के संगम में तीर्थराज प्रयाग के माघ मेला के तीसरे सबसे बड़े स्नान पर्व 'मौनी अमावस्या' पर शुक्रवार शाम 6 बजे तक 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में ...
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भारत के छत्तीसगढ़ राज्य का राजिम क्षेत्र रायपुर जिले में महानदी के तट पर स्थित है। यहां 'राजिम' या 'राजीवलोचन' भगवान रामचंद्र का प्राचीन मंदिर है। राजिम का प्राचीन नाम पद्मक्षेत्र था। पद्मपुराण के पातालखण्ड अनुसार भगवान राम का इस स्थान से संबंध ...
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अधिकतर हिन्दू व्रत और त्योहार का संबंध ऋतु और मौसम से रहता है। 13 दिसंबर 2019 से पौष माह लगने वाला है जो नववर्ष 2020 में 20 जनवरी के दिन समाप्त होगा। इस माह में ठंड अधिक रहती है। दरअसल, शीत ऋतु दो भागों में विभक्त है। हल्के गुलाबी जाड़े को हेमंत ऋतु ...
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गीता पाठ से भगवान का सानिध्य मिलता है। जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानी व्यक्ति को कर्तव्य पथ से विचलित नहीं कर पाती। गीता का अभ्यासी संसार का सच जान लेने के बाद पथभ्रष्ट नहीं होता।
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श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का अद्भुत भंडार है। गीता मानव मात्र को जीवन में प्रतिक्षण आने वाले छोटे-बड़े संग्रामों के सामने हिम्मत से खड़े रहने की शक्ति देती है।
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धर्म शास्त्रों के अनुसार सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए शंख को अपने घर में स्थापित करना चाहिए। माना जाता है कि मार्गशीर्ष के महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है।
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