Hanuman Chalisa

गणेश उत्सव पर दोहे

सुशील कुमार शर्मा
सोमवार, 1 सितम्बर 2025 (17:01 IST)
गणपति घर में लाइए, गणपति सुख की खान।
ज्ञान बुद्धि के देव हैं, गणपति विज्ञ विधान।।
 
मोदक लड्डू भोग हो, पूजन अर्चन ध्यान।
रक्त पुष्प अरु दूब से, हो प्रसन्न भगवान।।
 
सूंड बड़ी है ज्ञान की, आंखों में है नेह।
मस्तक चौड़ा भव्य है,सत्य समाहित देह।
 
कर्ण सूप है छानते, सत्य असत्य विवेक।
लंबोदर उदरस्थ है, घृणा द्वेष, अतिरेक।।
 
एक दंत का त्याग भी, देता है संदेश।
साहस बुद्धि विवेक से, मिटते जीवन क्लेश।।
 
मूषक वाहन भव्य है, अहंकार का रूप। 
जिसको वश गणपति करें, महिमा दिव्य अनूप।।
 
जोड़े हर इंसान को गणपति का यह पर्व।
मनवांछित सिद्धि मिले, गणपति सिद्ध अथर्व।।
 
मिट्टी के गणपति बने, इको फ्रेंडली आज।
प्रकृति पुत्र हैं गणपति, करते पूर्ण काज।।
 
शुरू किया था तिलक ने,जन-जन का यह पर्व।
सूत्र एकता में बंधा, भारत मानस सर्व।।
 
लंबोदर करते सदा, विघ्नों का संहार। 
जब गणपति की हो कृपा, हो जीवन उद्धार।।

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है।)

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

सावन मास पर एक भावपूर्ण और मौलिक हिंदी कविता

Shravan Essay: आस्था, प्रकृति और पवित्रता का उत्सव श्रावण मास, पढ़ें रोचक निबंध

आगे तो बढ़ रहे हैं… पर किस दिशा में? कहीं ऐसा तो नहीं कि जीवन बेहतर बनाने की दौड़ में हम जीना ही भूलते जा रहे हैं?

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

सभी देखें

कविता: लाल किला तुझे सलाम

Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

ये हमारी कहानी नहीं हैं, हमारी कहानी कुछ और है, जिसे हमें खोजना है

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा

अगला लेख