परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,अप्रैल 13,2026
परीक्षा, तनाव और वितनाव कोई शत्रु नहीं है। थोड़ी मात्रा में तनाव हमें सजग बनाता है, पर जब वह डर में बदल जाए, तब समस्या ...
एक सामयिक व्यंग्य: विश्वशांति का महायुद्ध
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,अप्रैल 8,2026
Iran and America War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी को देखिए। दोनों ही पक्ष अत्यंत गंभीर, जिम्मेदार और ...
प्रेम कविता: जिनके लिए
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,अप्रैल 6,2026
जिनके लिए देर तक रुका रहा मैं अपने ही समय की देहरी पर अपनी धड़कनों को धीरे धीरे समझाता हुआ और वे समय की सटीकता ओढ़े ...
श्री हनुमंत स्तवन: अतुल्य शक्ति
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,अप्रैल 2,2026
अतुल्य शक्ति पुंज रूप राज देव रंजनं, प्रचंड वेग वायु पुत्र शत्रु सैन्य भंजनं। सुवर्ण शैल काय दीप्ति भाल चंद्र सोहने, ...
कुंडलिया छंद : हनुमत स्तवन
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,अप्रैल 2,2026
बलवीरा हनुमंत तुम, संकट मोचन नाम। रामदूत अतुलित प्रभा, त्रिभुवन पूजित काम।। त्रिभुवन पूजित काम, दहन लंका करि डारे। ...
राम- राष्ट्र की जीवनधारा और शाश्वत चेतना का प्रवाह
सुशील कुमार शर्मा | गुरुवार,मार्च 26,2026
राम नवमी केवल एक जन्मतिथि का उत्सव नहीं, बल्कि उस जीवनदर्शन का स्मरण है, जिसने भारत को ‘भारत’ बनाया। यह उस मर्यादा का ...
सीता परित्याग पर दोहे
सुशील कुमार शर्मा | बुधवार,मार्च 11,2026
सन्नाटे में थी सभा, सम्मुख खड़ा समाज। कठिन घड़ी थी राम को, चुनना धर्म-जहाज॥ धोबी तो बस नाम था, संशय था चहुं ओर। मर्यादा ...
सामयिक व्यंग्य: होली के शूरवीर
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,मार्च 7,2026
होली साल का वो इकलौता दिन है जब इंसान स्वेच्छा से बंदर बनने के लिए तैयार होता है। सुबह-सुबह आप नहा-धोकर, क्रीम लगाकर ...
विश्व नारी दिवस पर कविता: नारी, सृष्टि की अजस्र धारा
सुशील कुमार शर्मा | शनिवार,मार्च 7,2026
जब सृष्टि की प्रथम भोर अभी पूर्णत: खुली भी नहीं थी जब पृथ्वी की निस्तब्ध मिट्टी में जीवन की हल्की हलचल भर उठी थी तभी ...
बहुआयामी कविताएं
सुशील कुमार शर्मा | सोमवार,फ़रवरी 23,2026
कविताएं केवल शब्दों का अनुशासन नहीं होतीं वे चेतना की वह खुली खिड़की होती हैं जहां से समय, समाज और आत्मा एक साथ झांकते ...

