पीएम नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के मायने, क्या ये चीन और मालदीव के लिए मास्टर स्ट्रोक है?
- क्या है लक्षद्वीप यात्रा के पीछे पीएम मोदी का मकसद
- क्या ये मास्टर स्ट्रोक चीन और मालदीव के लिए खतरे की घंटी है
- लोकल फॉर वोकल से लेकर पयर्टन तक, क्या है मोदी का प्लान
ऐसे में पीएम मोदी की लक्षद्वीप के कई राजनीतिक मायने सामने आ रहे हैं। जानकार भी इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगा रहे हैं। क्या मोदी का यह कदम मालदीव के लिए बड़ा झटका हो सकता है?
लक्षद्वीप: केरल कनेक्शन : पीएम मोदी के लक्षद्वीप यात्रा के पीछे केरल कनेक्शन भी देखा जा रहा है। दरअसल, भाजपा केरल में चुनाव में अब तक कोई उल्लेखनीय सफलता प्राप्त नहीं कर पाई है। ऐसे में पार्टी की इस राज्य पर लंबे समय से नजर है। भाजपा केरल को एक तरह से अपना राजनीतिक गढ़ बनाने के प्रयास में है। ऐसे में इस राज्य में राजनीतिक एंट्री करने के लिए लक्षद्वीप ही एक रास्ता है। पीएम मोदी का यह कदम इस दिशा में अहम साबित हो सकता है।
बता दें कि केरल मेनलैंड इस केंद्र शासित प्रदेश से सबसे नजदीक है और लक्षद्वीप अपनी कई जरूरतों के लिए इस राज्य पर निर्भर रहता है। दोनों राज्यों के लोग करीबी सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध साझा करते हैं। लक्षद्वीप में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा भी मलयालम है।
मालदीव से चीन की नजदीकी : मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद मालदीव की नजदीकी चीन से बढी है। मुइज्जू का रूख भारत के खिलाफ रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने मालदीव की परंपरा को तोडते हुए भारत यात्रा के बजाए तुर्की की यात्रा की थी। इन सारी घटनाओं के बाद से भारत और मालदीव में खटास भी बढ़ी है। ऐसे में भारत मालदीव के साथ ही चीन को भी राजनीतिक, आर्थिक और पर्यटन के लिहाज से मैसेज देना चाहता है। मोदी का यह दाव सीधे मालदीव के साथ ही चीन को लगेगा। बता दें कि पड़ोसी श्रीलंका और मालदीव में चीन की गतिविधियां बढ़ी हैं।
लक्षद्वीप का पर्यटन एंगल : लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित प्रदेश है। यह एक बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल है। लक्षद्वीप भी हिंद महासागर में स्थित है, यह मालदीव के काफी करीब है, ऐसे में दोनों में खूबसूरती से लेकर मौसम तक कई समानताएं हैं।
लोकल फॉर वोकल : बता दें कि भारत से मालदीव के लिए बड़ी संख्या में पर्यटन जाते हैं। ऐसे में भारत से बड़ा रेवेन्यू मालदीव को पर्यटन कमाई के तौर पर जाता है। ऐसे में मालदीव की तुलना में पीएम मोदी भारत के लक्षद्वीप को डेवलप करना चाहते हैं। एक तरह से राष्ट्रपति मुइज्जू को मोदी का यह सीधा संदेश है। आपको याद होगा कि इसके पहले भी पीएम मोदी जनता से देश के भीतर ही वेडिंग डेस्टिनेशन चुनने की अपील कर चुके हैं। यानी पीएम ने लोगों से कहा था कि वे देश में शादियों के लिए तमाम शहर, पर्यटन स्थलों का इस्तेमाल करे, ताकि लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा दिया जा सके।
पिछली सरकारों पर निशाना : बता दें कि लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती में परियोजनाओं की घोषणा करते समय पीएम मोदी ने एक तरह से पिछली सरकारों को भी निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से केंद्र में रही सरकारों की प्राथमिकता दशकों तक केवल अपनी पार्टी का फायदा रही है। दूरदराज के राज्यों, सीमाई इलाकों और समुद्र में मौजूद राज्यों पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया गया।
क्या है लक्षद्वीप : बता दें कि 32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला लक्षद्वीप 36 छोटे-छोटे द्वीपों का समूह है। यह भाजपा के ग्रांड इंडिया प्रोजेक्ट का एक छोटा सा हिस्सा लगता लगता है। यह पर्यटन के लिहाज से अहम जगह है। एक केंद्र शासित प्रदेश की तरफ रूख करने का मतलब यह भी हो सकता है कि नरेंद्र मोदी भाजपा के सबका साथ सबका विकास वाले नारे को बुलंद कर रहे हैं।
Edited By : Navin Rangiyal

