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मैसूर का दशहरा 21 अक्टूबर को, जानिए 5 रोचक बातें

mysore dusssera
Mysuru Dasara: कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर का दशहरा दुनिया भर में अपनी भव्यता, शाही परंपरा और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। 21 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले मैसूर दशहरा से जुड़ी 5 बेहद खास और रोचक बातें निम्नलिखित हैं। मैसूर का दशहरा दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो कर्नाटक का प्रादेशिक त्योहार है, मैसूर में दशहरा लंबे समय तक मनाया जाता है जिसमें भारत के अलावा दुनियाभर से लोग यहां पहुंचते हैं।

1. 400 से अधिक वर्षों का गौरवशाली इतिहास

मैसूर में दशहरा मनाने की शुरुआत विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने 14वीं शताब्दी में की थी। जब विजयनगर का पतन हुआ, तब 1610 ईस्वी में वोडेयार (Wodeyar) राजवंश के राजा राजा वोडेयार प्रथम ने इस परंपरा को मैसूर में फिर से शुरू किया। तब से लेकर आज तक यह उत्सव इसी भव्यता के साथ मनाया जाता आ रहा है।

2. देवी चामुंडेश्वरी की विजय का उत्सव

मैसूर का नाम पौराणिक राक्षस 'महिषासुर' के नाम पर पड़ा है। मान्यताओं के अनुसार, देवी चामुंडेश्वरी (दुर्गा जी का रूप) ने इसी पावन भूमि पर महिषासुर का संहार किया था। इसी विजय की खुशी में मैसूर में 10 दिनों तक नाडहब्बा (राज्य उत्सव) मनाया जाता है।
 

3. 'जंबो सवारी' (Jumbo Savari)- शाही हाथी जुलूस

दशहरे का सबसे मुख्य और आकर्षक अंग 'जंबो सवारी' यानी हाथियों का भव्य जुलूस है। विजयादशमी के दिन मुख्य हाथी (जिसका नाम 'अभिमन्यु' रहा है) अपनी पीठ पर 750 किलोग्राम वजनी सोने का हौदा (Golden Howdah) उठाकर चलता है। इस सोने के सिंहासन रूपी हौदे में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा विराजमान होती है।

4. 1 लाख से अधिक बल्बों से जगमगाता मैसूर महल

उत्सव के दौरान मैसूर पैलेस (Mysore Palace) का दृश्य किसी दिव्य लोक जैसा दिखता है। पूरे 10 दिनों तक शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक महल को लगभग 1,00,000 (एक लाख) विशेष बल्बों से रोशन किया जाता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक पहुंचते हैं।
 

5. मैसूर पैलेस का 'खास दरबार' (Private Durbar)

यद्यपि अब राजशाही समाप्त हो चुकी है, लेकिन वोडेयार राजवंश के वंशज आज भी महल के भीतर अपनी प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हैं। विजयादशमी के दिनों में महल में 'खास दरबार' लगाया जाता है, जहाँ राजपरिवार के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में अपने स्वर्ण सिंहासन पर बैठकर पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न करते हैं।
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