विजयादशमी 2026: दशहरा की 10 खास बातें, जानें पर्व का महत्व और परंपराएं
Vijayadashami Festival 2026: 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन अबूझ मुहूर्त रहता है यानी कि इस दिन पूरे दिन ही शुभ मुहूर्त रहता है इसलिए मुहूर्त देखकर कार्य करने की जरूरत नहीं। विजयादशमी का पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इस पावन अवसर से जुड़ी 10 सबसे खास और महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं।
1. दोहरी पौराणिक कथाएं: इस दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था। साथ ही, इसी दिन माँ दुर्गा ने नौ दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर का संहार किया था।
2. रावण दहन का महत्व: विजयादशमी की शाम को रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई को खत्म करने का संदेश दिया जाता है।
3. शमी वृक्ष का पूजन: पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे। इसी कारण दशहरे पर शमी पूजन की विशेष परंपरा है।
4. 'सोना' यानी शमी पत्र बांटना: इस दिन अपनों को शमी के पत्ते भेंट कर समृद्धि की कामना की जाती है। इन पत्तों को सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
5. शस्त्र और वाहन पूजा: इस शुभ दिन पर अस्त्र-शस्त्रों, वाहनों, औजारों और व्यापारिक बही-खातों का पूजन किया जाता है।
6. अबूझ मुहूर्त (सीधा शुभ समय): विजयादशमी तिथि स्वयं में सिद्ध मुहूर्त मानी जाती है। इस दिन बिना कोई पंचांग देखे नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीदारी की जा सकती है।
7. बच्चों को 'दशहरी' की परंपरा: विजयादशमी के दिन घर के बड़े-बुजुर्ग छोटे बच्चों को प्यार और आशीर्वाद के रूप में रुपए, मिठाई या वस्त्र देते हैं, जिसे 'दशहरी' कहा जाता है।
8. पारंपरिक खान-पान: भारत के कई हिस्सों में इस दिन गिल्की के पकौड़े (भजिए) और मीठे गुलगुले बनाने का विशेष रिवाज़ है।
9. अन्नप्राशन और विद्यारंभ: छोटे बच्चों को पहला ठोस आहार देने (अन्नप्राशन) और पहली बार पढ़ाई की शुरुआत कराने के लिए यह दिन बेहद शुभ माना गया है।
10. सद्भाव और बड़ों का आशीर्वाद: रावण दहन के बाद लोग एक-दूसरे के घर जाकर गले मिलते हैं और बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। दशहरा मिलन समारोह मनाया जाता है।

