1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. जय गंगा मां
  4. ganga-dussehra-2026-mata-ganga-ki-saral-puja-vidhi-aur-shubh-muhurat

गंगा दशहरा 2026: माता गंगा की सरल पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

The image features Mother Ganga, the River Ganga, a woman performing worship, a *kalash*, a lamp, and a temple in the background.
गंगा सप्तमि और गंगा दशहरा या किसी भी विशेष तिथि पर गंगा जी की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और हस्त नक्षत्र के दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन माता गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। इस बार यह पर्व 25 मई को तिथि अनुसार और 26 मई 2026 को उदयातिथि और नक्षत्र के अनुसार मनाया जाएगा। जानिए कि कैसे करें इस दिन माता गंगा की पूजा और पूजा का क्या है शुभ मुहूर्त। 
 
  • दशमी तिथि प्रारम्भ- 25 मई 2026 को प्रात: 04:30 बजे से।
  • दशमी तिथि समाप्त- 26 मई 2026 को प्रात: 05:10 बजे तक।
  • हस्त नक्षत्र प्रारम्भ- 26 मई 2026 को प्रात: 04:08 बजे से।
  • हस्त नक्षत्र समाप्त- 27 मई 2026 को प्रात: 05:56 बजे तक।

25 मई 2026 को शुभ मुहूर्त:

अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:51 से 12:46 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:09 से 07:30 तक।
 

26 मई 2026 को शुभ मुहूर्त:

अभिजीत मुहूर्त: दिन में 11:50 से 12:45 तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम को 07:10 से 07:30 तक।
 

।। गंगा पूजन विधि।।

विधि 1: गंगा नदी के तट पर पूजा (यदि आप घाट पर हैं)

गंगा प्रणाम व क्षमा प्रार्थना: नदी में सीधे पैर न रखें। पहले किनारे से जल को हाथ जोड़कर प्रणाम करें और कहें— "हे माँ, अपने शुद्ध जल में मुझे पैर रखने की अनुमति दें और मेरे अपराधों को क्षमा करें।"
गंगा स्नान: माँ गंगा में 3, 5, या 7 बार डुबकी लगाएं।
महिलाएं ध्यान रखें कि शास्त्रों के अनुसार बाल बांधकर डुबकी लगाना श्रेष्ठ माना जाता है।
स्नान के समय मन में 'ॐ नमः शिवाय' या 'गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती...' मंत्र का जप करें।
सूर्य अर्घ्य: स्नान के बाद अंजलि (दोनों हाथों) में गंगाजल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
सामग्री अर्पण: किनारे आकर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद गंगा मैया को सिंदूर/चंदन, अक्षत (चावल), लाल या पीले फूल, और कोई भी मिठाई या फल अर्पित करें। कई लोग माँ गंगा को चुनरी या साड़ी भी चढ़ाते हैं।
दीपदान: आटे या मिट्टी का एक दीपक बनाएं, उसमें घी और बत्ती जलाकर माँ गंगा की धारा में श्रद्धापूर्वक प्रवाहित कर दें।
आरती: अंत में कपूर या दीये से माँ गंगा की आरती करें।

विधि 2: घर पर गंगा पूजा (यदि आप नदी पर नहीं जा सकते)

पवित्र स्नान: नहाने के साफ पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। मन में माँ गंगा का ध्यान करते हुए स्नान करें। 
माना जाता है कि ऐसा करने से घर पर ही गंगा स्नान का पुण्य मिल जाता है।
चौकी स्थापना: पूजा घर में एक साफ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान शिव और माता गंगा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। यदि मूर्ति न हो, तो तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर उसे ही माँ गंगा का स्वरूप मानकर स्थापित करें।

पूजन विधि:- 

  • कलश या मूर्ति पर चंदन, रोली और अक्षत का तिलक लगाएं।
  • श्वेत या पीले रंग के फूल अर्पित करें।
  • धूप-दीप (घी का दीया) जलाएं।
  • भोग के रूप में मिश्री, मखाने या सफेद मिठाई अर्पित करें।
  • मंत्र और स्तोत्र का पाठ: पूजा के दौरान इस सरल मंत्र का कम से कम 11 या 108 बार जाप करें:
  • मंत्र: ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः।
  • यदि संभव हो, तो इस दिन 'गंगा स्तोत्र' का पाठ अवश्य करें।
  • आरती और क्षमा याचना: अंत में हाथ में कपूर जलाकर माँ गंगा की आरती गाएं और पूजा में हुई किसी भी भूलचूक के लिए क्षमा मांगें।
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
अगला लेख
गंगा दशहरा 2026: मां गंगा का पृथ्वी अवतरण और इन 8 दिव्य वस्तुओं के दान का महापुण्य