विजयादशमी 2026: दशहरा की 2 पौराणिक कथाएं जिनके कारण मनाया जाता है यह त्योहार
विजयादशमी को दशहरा भी कहते हैं। बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में यह पर्व आश्विन माह के शुक्ल की दशमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन से जुड़ी यूं तो 4 पौराणिक कथाएं हैं। पहली दुर्गा महिषासुर से जुड़ी कथा, दूसरी राम रावण युद्ध से जुड़ी कथा, तीसरी कुबेर और राजा रघु से जुड़ी कथा और चौथी पांडव विजय उत्सव। इसमें से पहली और दूसरी को ही विशेषरूप से विजयादशमी और दशहरा से जोड़कर देखा जाता है और इसी के कारण ही यह पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 20 अक्टूबर 2026 को रहेगा।
1. विजयादशमी- महिषासुर मर्दिनी कथा:
रम्भासुर का पुत्र था महिषासुर, जो अत्यंत शक्तिशाली था। उसने कठिन तप किया था। ब्रह्माजी ने प्रकट होकर कहा- 'वत्स! एक मृत्यु को छोड़कर, सबकुछ मांगों। महिषासुर ने बहुत सोचा और फिर कहा- 'ठीक है प्रभो। देवता, असुर और मानव किसी से मेरी मृत्यु न हो। किसी स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु निश्चित करने की कृपा करें।' ब्रह्माजी 'एवमस्तु' कहकर अपने लोक चले गए। वर प्राप्त करने के बाद उसने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमाकर त्रिलोकाधिपति बन गया। तब सभी देवताओं ने भगवती महाशक्ति की आराधना की। सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य तेज निकलकर एक परम सुन्दरी स्त्री के रूप में प्रकट हुआ। हिमवान ने भगवती की सवारी के लिए सिंह दिया तथा सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र महामाया की सेवा में प्रस्तुत किए। भगवती ने देवताओं पर प्रसन्न होकर उन्हें शीघ्र ही महिषासुर के भय से मुक्त करने का आश्वासन दिया। माता ने महिषासुर ने 9 दिन तक युद्ध करने के बाद 10वें दिन उसका वध कर दिया इसलिए विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है। महिषासुर एक असुर अर्थात दैत्य था वह राक्षस नहीं था। कहते हैं कि इसी दिन देवी सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अग्नि में समा गई थीं। बाद में उन्होंने हिमावान के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया था।
2. दशहरा- राम रावण कथा:
अयोध्या के राजा दशहरथ के पुत्र प्रभु श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास हुआ। वन में उनके साथ उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी गए। वन में 12 वर्ष गुजर जाने के बाद एक समय वे गोदावरी नदी के पास पंचवटी में कुटिया बनाकर रहने लगे। वहां पर लंका के राजा रावण ने छल से माता सीता का अपहरण कर लिया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने हनुमानजी, सुग्रीव, जामवंत और वानर सेना के माध्यम से समुद्र पर सेतु बनाया और लंका पर चढ़ाई कर दी। कहते हैं कि प्रभु श्रीराम और रावण का युद्ध कई दिनों तक चला अंत में श्रीराम ने दशमी के दिन रावण का वध कर दिया था। रावण एक राक्षस था वह असुर नहीं था। रावण वध के कारण ही दशहरा मनाया जाता है। इस दिन रावण के पुतले का दहन होता है।

