माहजबीं से नाज तक... मीना कुमारी के 6 नाम और उनके पीछे की दिलचस्प दास्तान
भारतीय सिनेमा का इतिहास जब भी संजीदा अभिनय, दर्दभरी आँखों और अमर अदाकारी की बात करेगा, तब-तब एक नाम सबसे ऊपर उभरेगा—मीना कुमारी। अपनी हर फिल्म में दर्द को इस कदर जीवंत कर देने वाली इस अदाकारा को दुनिया भले ही 'ट्रेजडी क्वीन' के नाम से जानती हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनके निजी और पेशेवर जीवन में 6 अलग-अलग नाम जुड़े हुए थे?
माहजबीं के रूप में पैदा हुई एक छोटी बच्ची से लेकर शायरी की दुनिया में 'नाज' बनकर छा जाने तक, मीना कुमारी के ये 6 नाम उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों और रिश्तों की दास्तान बयान करते हैं।
1. माहजबीं: जब घर में गूंजी पहली किलकारी
1 अगस्त 1932 को मुंबई के एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में जब इस महान अभिनेत्री का जन्म हुआ, तो उनके पिता अलीबख्श और मां इकबाल बानो ने उनका नाम 'माहजबीं' रखा। 'माहजबीं' का अर्थ होता है—चांद जैसा चेहरे वाली। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह 'माहजबीं' आगे चलकर पूरे देश के दिलों पर राज करेगी।
2. चीनी: आंखों की मासूमियत से मिला प्यार का नाम
बचपन के दिनों में मीना कुमारी की आंखें बहुत छोटी-छोटी और मासूम हुआ करती थीं। एशियाई/चीनी लोगों की आंखें छोटी होने के कारण परिवार वाले उन्हें प्यार से 'चीनी' कहकर पुकारा करते थे। घर के आंगन में यह छोटा सा नाम उनकी बेफिक्र बचपन की यादों का हिस्सा बना रहा।
3. बेबी मीना: बाल कलाकार के रूप में कैमरे से पहला सामना
घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मीना कुमारी को महज़ चार साल की उम्र में ही कैमरे के सामने उतरना पड़ा। प्रकाश पिक्चर्स के बैनर तले बनी फिल्म 'लेदरफेस' (1939) से उन्होंने बतौर बाल कलाकार अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इस फिल्म के निर्देशक विजय भट्ट ने उन्हें स्क्रीन नेम दिया—'बेबी मीना'।
4. मीना कुमारी: वो नाम जो इतिहास के पन्नों में अमर हो गया
जैसे-जैसे मीना कुमारी बड़ी हुईं, उन्होंने मुख्य अभिनेत्री के रूप में पहचान बनानी शुरू की। 1946 में आई फिल्म 'बच्चों के खेल' में उन्हें आधिकारिक तौर पर नया नाम दिया गया—मीना कुमारी। आगे चलकर 'बैजू बावरा', 'साहिब बीवी और गुलाम', 'पाकीज़ा' और 'दिल एक मंदिर' जैसी कालजयी फिल्मों ने इस नाम को भारतीय सिनेमा के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर दिया।
5. नाज: जब बहने लगा कलम से दर्द का दरिया
मीना कुमारी केवल एक महान अभिनेत्री ही नहीं थीं, बल्कि एक संवेदनशील शायरा और कवयित्री भी थीं। पर्दे पर जिस दर्द को वे आंखों से बयां करती थीं, उसे फुर्सत के लम्हों में पन्नों पर उकेर दिया करती थीं। शायरी की दुनिया में वे अपने मूल नाम के बजाय 'नाज' तख़ल्लुस (उपनाम) का इस्तेमाल करती थीं। उनकी लिखी ग़ज़लों और नज़्मों में उनकी ज़िंदगी का अकेलापन और मुकद्दर का दर्द साफ झलकता है।
6. मंजू: मोहब्बत और रिश्तों का निजी नाम
मीना कुमारी के जीवन में मशहूर फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही का आगमन एक नया मोड़ लेकर आया। दोनों के बीच प्यार हुआ और उन्होंने शादी कर ली। कमाल अमरोही प्यार से मीना कुमारी को 'मंजू' कहकर बुलाया करते थे। यह नाम उनके निजी जीवन, मोहब्बत और उस रिश्ते का प्रतीक था जो जीवन भर सुर्खियों में रहा।
पर्दे पर लाखों चेहरे पर मुस्कान और आँखों में आँसू लाने वाली इस महान अदाकारा का व्यक्तिगत जीवन काफी उतार-चढ़ाव और अकेलेपन से भरा रहा। अत्यधिक शराब की लत और बीमारी के कारण 31 मार्च 1972 को महज़ 38 वर्ष की आयु में मीना कुमारी ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

