पेपर लीक की वजह से मानुषी छिल्लर को दोबारा देना पड़ा था मेडिकल एंट्रेस एग्जाम, बयां किया दर्द
NEET पेपर लीक को लेकर हाल ही में छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया। देशभर में छात्रों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के इस आंदोलन का कई सेलेब्स ने सपोर्ट किया। अब पूर्व मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड अभिनेत्री मानुषी छिल्लर ने अपने छात्र जीवन के एक बेहद कठिन दौर को साझा किया है।
मानुषी छिल्लर ने सोहा अली खान के यूट्यूब टॉक शो 'ऑल अबाउट हर' में साल 2015 में हुए ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) के पेपर लीक और उसके बाद दोबारा परीक्षा देने के अपने दर्दनाक अनुभव को खुलकर सामने रखा। प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. अंजलि छाबरिया की मौजूदगी में हुए इस एपिसोड में प्रतियोगी परीक्षाओं के तनाव, बर्नआउट और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चर्चा हुई।
अच्छी रैंक के बाद अचानक परीक्षा रद्द
बातचीत के दौरान जब सोहा अली खान ने मानुषी से उस दौर को याद करने को कहा, जब महीनों की कड़ी मेहनत और अच्छी रैंक हासिल करने के बावजूद उन्हें पता चला कि परीक्षा रद्द हो गई है, तो मानुषी ने कहा कि यह समय उनके जीवन की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक था।
मानुषी ने बताया, इसके दो पहलू हैं—एक मेरा व्यक्तिगत अनुभव और दूसरा देश के लाखों छात्रों की कड़वी सच्चाई। मेरे माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं, इसलिए वे इस प्रक्रिया को समझते थे और मुझे मानसिक संबल मिला। लेकिन एक छात्र के रूप में यह बेहद कठिन था। मैंने खुद को साबित करने के लिए अपनी हर खुशी का त्याग कर दिया था। मैं एक प्रशिक्षित कुचिपुड़ी नृत्यांगना थी, मुझे पेंटिंग पसंद थी, लेकिन मेडिकल परीक्षा में ध्यान केंद्रित करने के लिए मैंने एक साल तक इन सब से दूरी बना ली थी।
मानुषी ने आगे बताया कि जब महीनों की अटूट मेहनत के बाद आपको अचानक यह मालूम चले कि आपको अगले 45 दिनों तक फिर से उसी चक्रव्यूह में रहना है, तो इंसान अंदर से टूट जाता है। आप सोचने लगते हैं कि आपके अंदर और कितनी ताकत बची है।
मानुषी ने इस बात को सहजता से स्वीकार किया कि वे भाग्यशाली थीं कि उनके पास एक मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि थी। लेकिन उन्होंने अपने आसपास उन छात्रों के संघर्ष को देखा जो बेहद सीमित साधनों में तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया, "मेरी लड़ाई उन लाखों छात्रों की तुलना में कुछ भी नहीं थी जिन्हें मैंने कोचिंग सेंटरों में देखा।
मानुषी ने कहा, कई छात्रों के माता-पिता ने अपनी हैसियत से बाहर जाकर कर्ज लिया था ताकि बच्चे कोटा या अन्य शहरों में पढ़ सकें। वे बेहद छोटे और घुटन भरे पीजी कमरों में रहकर दिन-रात एक ही एग्जाम के लिए मेहनत कर रहे थे। जब परीक्षा रद्द होती है, तो कई छात्रों के कमरों का किराया खत्म हो जाता है, लीज पूरी हो जाती है और उन्हें मजबूरी में अपने गांव या शहर लौटना पड़ता है। ऐसे में दोबारा उसी माहौल को बना पाना उनके लिए नामुमकिन सा हो जाता है।"
परीक्षा के उस भारी-भरकम माहौल में खुद को अवसाद से बचाने के लिए मानुषी के माता-पिता की रणनीति बेहद कारगर साबित हुई। मानुषी ने साझा किया कि उनके माता-पिता ने एक नियम बनाया था—चाहे कुछ भी हो जाए, दिन में एक घंटा शारीरिक गतिविधि (जैसे बास्केटबॉल खेलना या जिम जाना) अनिवार्य थी। इस एक घंटे ने उन्हें पढ़ाई के दबाव से बाहर निकलने, दुनिया से जुड़े रहने और अपने मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद की।
मेडिकल कॉलेज का 'बर्नआउट' और करियर की नई दिशा
यह पूछे जाने पर कि क्या कभी ऐसा मोड़ आया जब उन्हें लगा कि डॉक्टरी उनका अंतिम लक्ष्य नहीं है, मानुषी ने स्पष्ट किया कि यह कोई रातों-रात लिया गया फैसला नहीं था। उन्हें मेडिकल की पढ़ाई से बहुत लगाव था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में दाखिले के बाद का सफर बेहद थका देने वाला था।
उन्होंने बताया, हमारे सीनियर्स मजाक में कहा करते थे कि मेडिकल कॉलेज में इंसान सिर्फ दो दिन खुश रहता है— पहला दिन जब उसका एडमिशन होता है और आखिरी दिन जब वह डिग्री लेकर निकलता है। पीछे मुड़कर देखती हूँ तो समझ आता है कि वह बर्नआउट था। हम सब सोचते थे कि एंट्रेंस क्लियर करना ही मंजिल है, लेकिन कॉलेज पहुँचकर अहसास हुआ कि असली पहाड़ तो अभी चढ़ना बाकी है।
गौरतलब है कि मानुषी छिल्लर ने 2017 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अक्षय कुमार के साथ फिल्म 'सम्राट पृथ्वीराज' (2022) से बॉलीवुड डेब्यू किया। इसके बाद वे 'द ग्रेट इंडियन फैमिली', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'ऑपरेशन वैलेंटाइन' जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं।

