4 साल की उम्र में श्रेया घोषाल ने ली संगीत की शिक्षा, अमेरिका में मनाया जाता है 'श्रेया घोषाल दिवस'
बॉलीवुड की फेमस सिंगर श्रेया घोषल 12 मार्च को अपना जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जन्मीं श्रेया ने बहुत ही कम उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसे पाने का सपना हर कलाकार देखता है। श्रेया के संगीत के प्रति प्रेम की नींव उनके बचपन में ही पड़ गई थी।
महज 4 साल की उम्र में उन्होंने संगीत सीखना शुरू किया और उनकी पहली गुरु उनकी मां ही थीं। श्रेया ने 6 साल की उम्र में शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा लेनी शुरू की। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 16 साल की उम्र में उन्होंने टीवी रियलिटी शो 'सारेगामापा' (चाइल्ड स्पेशल) का खिताब जीतकर देशभर में अपनी पहचान बना ली थी।
'देवदास' और 'बैरी पिया' का दिलचस्प किस्सा
श्रेया घोषाल की किस्मत ने तब करवट ली जब फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने उनकी आवाज सुनी। उन्होंने साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म 'देवदास' में श्रेया को 'पारो' (ऐश्वर्या राय) की आवाज बनने का मौका दिया।
एक इंटरव्यू में श्रेया ने बताया था कि वह 'बैरी पिया' गाने का सिर्फ रिहर्सल कर रही थीं। जब उन्होंने गाना खत्म किया, तो संजय लीला भंसाली ने मुस्कुराते हुए कहा कि गाना इतना परफेक्ट था कि उन्होंने रिहर्सल को ही फाइनल रिकॉर्डिंग मानकर रिकॉर्ड कर लिया है। इसी गाने के लिए उन्हें अपना पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।
श्रेया घोषाल की सफलता केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सहित 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं। उनकी झोली में अब तक कुल 5 नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स आ चुके हैं। गायकी के साथ-साथ वे कई टेलीविजन रियलिटी शो में बतौर जज नजर आती हैं, जहां वे नए टैलेंट को तराशने का काम करती हैं।
सात समंदर पार 'श्रेया घोषाल दिवस'
शायद ही कोई भारतीय कलाकार होगा जिसे विदेश में इतना सम्मान मिला हो। अमेरिका के ओहियो राज्य के गवर्नर ने श्रेया की गायकी से प्रभावित होकर 26 जून को 'श्रेया घोषाल दिवस' के रूप में घोषित किया है। यह सम्मान किसी भी भारतीय गायक के लिए बहुत गर्व की बात है। इसके अलावा, श्रेया पहली भारतीय सिंगर हैं जिनका मोम का पुतला मैडम तुसाद म्यूजियम में लगाया गया है।