रिलीज से पहले विवादों में घिरी रणबीर कपूर की 'रामायणम्', रामलीला महासंघ की चेतावनी- पहले हमें फिल्म दिखाओ
बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर और दिग्गज निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायणम्' अपनी रिलीज से पहले ही एक विवाद के घेरे में आ गई है। दो भागों में बन रही इस भव्य महागाथा के पहले भाग की दिवाली पर होने वाली रिलीज से पहले, हिंदू संगठनों ने फिल्म के कंटेंट और दृश्यों को लेकर चिंता जताई है।
दिल्ली स्थित 'श्री रामलीला महासंघ' ने फिल्म के निर्माताओं और निर्देशक को एक औपचारिक पत्र लिखकर थियेट्रिकल रिलीज से पहले एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करने की पुरजोर मांग की है। श्री रामलीला महासंघ ने निर्देशक नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पर लिखकर चेतावनी दी है।
महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्क्रीनिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फिल्म में भगवान राम, लंका या किसी अन्य पौराणिक पात्र का चित्रण ऐसा न हो जिससे हिंदू समाज और सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचे।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माताओं ने उनकी इस मांग को अनदेखा किया, तो वे दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों में सिनेमाघरों के बाहर विरोध-प्रदर्शन करेंगे। मीडिया से बातचीत के दौरान अर्जुन कुमार ने साल 2023 में रिलीज हुई प्रभास और ओम राउत की फिल्म 'आदिपुरुष' की नाकामयाबी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड को अतीत की गलतियों से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा, हाल ही में प्रभास की फिल्म 'आदिपुरुष' आई थी, जिसके प्रमोशन के लिए हमने खुद दिल्ली के लाल किले पर कार्यक्रम आयोजित किया था। लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद उसमें कई आपत्तिजनक चीजें मिलीं। सोने की लंका को काला दिखाया गया, अनुचित तरीके से चमड़े के वस्त्रों का उपयोग हुआ और पात्रों का चित्रण मुगलकालीन शैली से मिलता-जुलता था। इन्हीं गलतियों के कारण वह मेगा-बजट फिल्म दर्शकों द्वारा नकार दी गई।
अर्जुन कुमार ने आगे कहा, रणबीर कपूर स्टारर इस नई 'रामायणम्' का हम स्वागत करने और हजारों लोगों के लिए मुफ्त शो आयोजित करने को तैयार हैं। लेकिन फिल्म के शुरुआती टीजर/झलक में रणबीर कपूर का राम के रूप में चित्रण थोड़ा कमजोर नजर आ रहा है, जिसमें वह पौराणिक तेज और गंभीरता नहीं दिखती जो भगवान राम के चरित्र का आधार है।
महासंघ की मुख्य आपत्तियां एवं चिंताएं
महासंघ का मानना है कि रणबीर कपूर का लुक और बॉडी लैंग्वेज भगवान राम की पारंपरिक और शास्त्र सम्मत छवि से पूरी तरह मेल नहीं खाती। फिल्म में सोने की लंका के बजाय आधुनिक या काले रंग की लंका दिखाना और रावण की सेना को अस्वाभाविक रूप में पेश करना पारंपरिक मान्यताओं के खिलाफ है।
निर्माताओं के सामने चुनौती: क्या होगी स्पेशल स्क्रीनिंग?
महासंघ के अध्यक्ष ने अपने बयान के अंत में कहा कि वे कोई आधिकारिक सेंसर बोर्ड नहीं हैं, लेकिन अगर पवित्र ग्रंथों और पौराणिक चरित्रों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाएगा तो धार्मिक संगठन चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि यदि स्क्रीनिंग के दौरान कोई आपत्तिजनक दृश्य पाया जाता है, तो मेकर्स से समय रहते बदलाव करने का अनुरोध किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि 4,000 करोड़ के विशाल बजट और वैश्विक वीएफएक्स (VFX) के साथ तैयार हो रही इस फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता श्री रामलीला महासंघ की इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या बॉलीवुड 'आदिपुरुष' जैसे विवाद से बचने के लिए रिलीज से पहले धार्मिक संगठनों को फिल्म दिखाएगा? यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

