नीतीश का तंज, खुद अंदर गए तो पत्नी को गद्दी दे दी, बाकी महिलाओं की अनदेखी

Last Updated: शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020 (16:04 IST)
खगड़िया/सीतामढ़ी/शिवहर। बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्य में महिलाओं के अधिकार को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और कहा कि अंदर (जेल) गए तो पत्नी (राबड़ी देवी) को गद्दी पर बैठा दिया, लेकिन उस सरकार ने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया।
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जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार ने खगड़िया जिले के परबत्ता और खगड़िया, सीतामढ़ी जिले के बेलसंड और शिवहर में राजग उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राजग से पहले के 15 साल की सरकार ने महिलाओं के लिए कोई काम नहीं किया। अंदर गए तो पत्नी को गद्दी पर बैठा दिया, लेकिन महिलाओं के लिए कुछ भी नहीं किया। लेकिन, हमारी सरकार बनी तो हमने पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। इनके अलावा अनुसूचित जाति (एससी) को 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को एक प्रतिशत और अतिपिछड़ा वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया है।
अब महिलाओं की भागीदारी बढ़ी : कुमार ने कहा कि पहले की सरकार में नाम मात्र की महिला जनप्रतिनिधि होती थीं, लेकिन आज हर क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी है। सबको जन प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। सबकी इज्जत बढ़ी है और सबको सेवा करने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि वह तो हमेशा कहते रहे हैं जब महिला और पुरुष दोनों साथ मिलकर काम करेंगे तभी समाज आगे बढ़ेगा। आज प्रगति पथ पर बिहार के निरंतर अग्रसर होने का सबसे बड़ा कारण हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी का बढ़ना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए उनकी सरकार ने काफी काम किए है। जब महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पूरे देश में स्वयं सहायता समूह का गठन हो रहा था उस समय बिहार में ऐसा एक भी समूह नहीं था। जब राज्य में उनकी सरकार बनी तो उन्होंने विश्व बैंक से ऋण लेकर जीविका समूह के नाम से स्वयं सहायता समूह का गठन कराया। आज इनकी संख्या 10 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि बिहार के जीविका समूह की परिकल्पना इतनी कारगर रही कि तत्कालीन केंद्र सरकार ने बिहार के इस मॉडल को अपनाया और पूरे देश में इसे आजीविका समूह का नाम दिया।
कुमार ने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती सरकार ने सदैव महिलाओं की उपेक्षा की। किसी ने भी उनके उत्थान के लिए काम नहीं किया, लेकिन उनकी सरकार ने इस ओर ध्यान दिया और सभी क्षेत्रों में उन्हें भागीदार बनाया। उन्होंने कहा कि लोग महिलाओं की पूजा तो करते हैं लेकिन उनकी उपेक्षा में भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते।

महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण : नीतीश ने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवा में 35 प्रतिशत का आरक्षण दिया है। इसका परिणाम है कि पहले जहां पुलिस बल में महिलाएं न के बराबर होती थी, वहीं आज पुलिस में उनकी अच्छी खासी भागीदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की सरकार में राज्य की शिक्षा-व्यवस्था की क्या स्थिति थी यह किसी से छुपा नहीं है। गरीब घर के बच्चे तो पढ़ ही नहीं पाते थे। लेकिन, नवंबर 2005 में उनकी सरकार बनी तो सर्वे कराया गया, जिसमें पता चला कि सबसे अधिक महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे विद्यालयों से बाहर हैं। उन बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए सरकार ने टोला सेवक और तालीमी मरकज स्वयंसेवक बहाल किए। इस काम में 30 हजार लोगों को लगाया गया। अब विद्यालयों से बाहर रहने वाले बच्चों की संख्या न के बराबर है।
महिला शिक्षा पर ध्यान : कुमार ने कहा कि इसके बाद छात्राओं का आत्मविश्वास इतना अधिक बढ़ गया कि नौवीं कक्षा में पहले जहां छात्राओं की संख्या एक लाख 70 हजार से भी कम थी, वह अब बढ़कर छात्रों की संख्या के बराबर हो गई है। इस बार मैट्रिक की परीक्षा में छात्रों से अधिक छात्राएं शामिल हुई हैं। वर्ष 2010 से उनके लिए भी साइकिल योजना की शुुरुआत की गई।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों का नियोजन किया गया। इतना ही नहीं हर जिले में इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, पैरा मेडिकल, आईटीआई, एएनएम और जीएनएम संस्थानों की स्थापना हो रही है। इनके अलावा स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता भत्ता योजना, कुशल युवा कार्यक्रम की शुरुआत की गई। उनकी सरकार ने न्याय के साथ हर क्षेत्र और हर तबके का विकास किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से सेवा का मौका मिला है तब से अस्पतालों में सुधार के लिए काम, चिकित्सकों की बहाली एवं दवा का प्रबंध किया गया है। इसी का नतीजा है कि पहले जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हर महीने महज 39 मरीज इलाज कराने आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 10 हजार हो गई है।

उन्होंने पूर्ववर्ती राजद सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले अपराध के मामले में कितना बुरा हाल था, कितने सामूहिक नरसंहार हो रहे थे, कितने लोगों का अपहरण हो रहा था, शाम होते कोई घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पाता था, लेकिन उनकी सरकार ने राज्य में कानून का राज कायम किया है, जिसकी बदौलत अपराध पर लगाम लगे और अब अपराध के मामले में राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के हाल के आंकड़े में बिहार 23वें स्थान पर आ गया है।
लालटेन का दौर खत्म : कुमार ने कहा कि बिहार के विकास को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोला और कहा कि वर्ष 2005-06 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद मात्र 76 हजार 466 करोड़ रुपए था जो अब बढ़कर चार लाख 14 हजार 977 करोड़ रुपए हो गया है। प्रति व्यक्ति आय में भी साढ़े 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहले ‘लालटेन’ का जमाना था, गांव तो छोड़िए शहर में भी बिजली बहुत कम मिल पाती थी।

पहले पूरे बिहार में बिजली की खपत मात्र 700 मेगावाट ही थी, लेकिन उनकी सरकार ने हर घर तक बिजली पहुंचाई और हर खेती के काम के लिए बिजली का उपयोग हो रहा है। इससे अब राज्य में 6000 मेगावाट से अधिक बिजली की खपत हो रही है। अब लालटेन का दौर खत्म हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में ‘हर घर नल का जल’ योजना का 83 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और शेष काम भी शीघ्र ही पूरा हो जाएगा। हर घर तक पक्की नाली-गली और हर घर शौचालय का काम पूर्ण हो चुका है। प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा और कहा कि कोई कह रहा है कि नौकरी लाएंगे, यह सब बकवास की बात है। उन लोगों को तो बस यूं ही बोलना है, लोगों को गुमराह करना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने छह लाख से भी अधिक लोगों को नौकरी दी लेकिन उन लोगों ने 15 साल में क्या दिया था।
भविष्य की योजनाएं : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अगली बार मौका मिला तो प्रत्येक गांव में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाएंगे। हर खेत तक सिंचाई की व्यवस्था करेंगे। जो भी काम कराया है, उसका अनुरक्षण भी करेंगे। साफ-सफाई का काम गांव और शहर दोनों के लिए भी करेंगे। युवाओं को नई टेक्नेलॉजी सीखने की व्यवस्था कराएंगे ताकि उनकी आमदनी बढ़े और वे दूसरों को रोजगार दे सकें। इसके लिए हर जिले में मेगा स्किल सेंटर बनाए जाएंगे। हर गांव तक सड़क बनाने का काम लगभग पूर्ण हो गया है। अगली बार हर गांव को प्रमुख सड़कों से जोड़ा जाएगा। बाईपास और फ्लाइओवर भी बनवाए जाएंगे। (वार्ता)



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