टोक्यो ओलंपिक: दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन में इस साल क्या है ख़ास?

BBC Hindi| Last Updated: गुरुवार, 25 मार्च 2021 (11:36 IST)
सूर्यांशी पांडे (बीबीसी संवाददाता)

खेलों का महाकुंभ यानी ओलंपिक हर चार साल पर होता है लेकिन कोरोनावायरस महामारी के कारण 2020 में इसका आयोजन नहीं हो सका। अब साल भर की देरी से जापान के टोक्यो में इसका आयोजन होने जा रहा है। इसकी शुरुआत 23 जुलाई से होगी और 8 अगस्त को इसका समापन हो जाएगा।
हालांकि 'सॉफ़्टबॉल' खेल प्रतियोगिता उद्घाटन समारोह से दो दिन पहले यानी 21 जुलाई को ही फु़कुशिमा में शुरू हो जाएगी। ओलंपिक में इस बार 33 खेलों में 339 मेडल के लिए मुक़ाबले होंगे। पहला पदक समारोह 24 जुलाई को होगा। जापान को 2020 में कोरोनावायरस महामारी के चलते इस आयोजन को लेकर अपनी तैयारियों को स्थगित करनी पड़ी थीं और 2021 में इसके आयोजन पर आशंकाओं के बादल छा गए थे। लेकिन जापान सरकार और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने तमाम मुद्दों पर विचार करने के बाद इसके आयोजन को हरी झंडी दी। हालांकि यह फ़ैसला लिया गया कि जापान के अलावा किसी दूसरे मुल्क के दर्शक टोक्यो जाकर इस खेल को नहीं देख सकेंगे। जापान पहले भी 3 बार ओलंपिक का आयोजिन कर चुका है- 1964, 1972 और 1988 में।
का मैस्कट (शुभंकर) क्या है?

टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के शुभंकर को 'मिराइतोवा' और 'सोमाइटी' नाम दिया गया है। इसे ख़ास जापानी इंडिगो ब्लू रंग का पैटर्न दिया गया है। यह जापान की सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिकता दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 'मिराइतोवा' जापानी कहावत से प्रेरित है। जापानी शब्द मिराइतोवा में 'मिराइ' का अर्थ 'भविष्य' और तोवा का 'अनंत काल' होता है।
कैसे बनाए गए हैं टोक्यो ओलंपिक के पदक?

टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को दिए जाने वाले पदक पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामानों और फ़ोन से बनाए हैं। इसके लिए आयोजकों ने फ़रवरी 2017 में जापान के लोगों से इलेक्ट्रॉनिक सामानों और फ़ोन दान करने कि अपील की थी। साल 2010 में वैंकूवर में आयोजित ओलंपिक में भी इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक सामानों के इस्तेमाल से पदक बनाए गए थे। पदक के पीछे के हिस्से में टोक्यो ओलंपिक का लोगो लगा है, आगे स्टेडियम की तस्वीर के सामने विजय का प्रतीक माने जाने वाली ग्रीक देवी 'नाइक' को दर्शाया गया है।
25 मार्च से ओलंपिक मशाल रिले

ग्रीस में प्राचीन ओलंपिया के पवित्र स्थल पर हेरा के मंदिर में बीते वर्ष 12 मार्च को टोक्यो ओलंपिक की मशाल जलाई गई थी। इसके बाद पैनाथेनिक स्टेडियम में एक समारोह के दौरान मशाल को जापान को सौंप दिया गया।

अब टोक्यो ओलंपिक की मशाल रिले जापान में 25 मार्च यानी बुधवार से शुरू होगी और 23 जुलाई को खेलों के महाकुंभ के आगाज के साथ ख़त्म होगी।
मशाल रिले 2011 में सुनामी की मार झेल चुके फुकुशिमा प्रान्त के जे विलेज नेशनल ट्रेनिंग सेंटर से शुरू होगी और 121 दिनों तक चलेगी। इस दौरान यह जापान के 47 प्रांतों से गुज़रेगी।

मशाल रिले समारोह को भी कोरोना के चलते सभी दर्शकों के लिए खोलकर नहीं रखा गया है लेकिन टोक्यो ओलंपिक की मुख्य वेबसाइट पर इसका सीधा प्रसारण होगा।

वैसे टोक्यो ओलंपिक की सीइओ तोशिरो मुतु ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि स्थानीय लोग सड़क के किनारे खड़े होकर समारोह को देख सकते हैं बशर्ते सब मास्क पहनें और एक-दूसरे से उचित दूरी बनाए रखें।
महामारी के बीच इस साल होने जा रहे टोक्यो ओलंपिक की व्यवस्था की जटिलता को देखते हुए जापान की फ़ुटबॉल खिलाड़ी नहोमी कावासुमी ने ओलंपिक मशाल रिले में हिस्सा लेने से मना कर दिया है।

कावासुमी अमेरिका की फ़ुटबॉल टीम स्काई ब्लू एफसी के लिए खेलती हैं। पिछले साल उन्होंने इन ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया था।

क्यों जलाई जाती है मशाल?
दर्पण की मदद से सूर्य की किरणों की तेज़ से प्रज्जवलित होने वाली यह मशाल ओलंपिक खेलों के आगाज़ से महीनों पहले दुनिया भर की अपनी यात्रा ख़त्म कर मेजबान देश में पहुंचती है।

ग्रीस में प्राचीन ओलंपिया के पवित्र स्थल पर स्थित हेरा के मंदिर में मशाल जलाई जाती है जिसे वहां से कई खिलाड़ी मेज़बान देश तक पहुंचाते हैं। फिर मेजबान देश में मशाल रिले का आयोजन होता है।

इसके बाद मेजबान देश का एक जाना माना एथलीट उद्घाटन समारोह के दिन इससे स्टेडियम में लगाए गए मशाल को प्रज्जवलित करता है और इसके साथ ही ओलंपिक खेलों की शुरुआत हो जाती है।
मशाल को प्राचीन और आधुनिक खेल के संगम से जोड़कर देखा जाता है। मशाल जलाने की प्रथा 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक खेलों से फिर से शुरू की गयी थी। लेकिन ओलंपिक मशाल रिले कि शुरुआत 1936 के बर्लिन गेम्स से हुई थी। इसके 24 साल बाद 1960 में रोम ओलंपिक की मशाल यात्रा का पहली बार टेलीविजन प्रसारण हुआ था।

इस बार के टोक्यो ओलंपिक में क्या है ख़ास?

इस बार 5 नए खेल ओलंपिक में जोड़े गए हैं- सर्फ़िंग, स्केटबोर्डिंग, स्पोर्ट्स क्लाइंबिंग, कराटे और बेसबॉल।
यही नहीं, बेसबॉल (पुरुष) और सॉफ्टबॉल (महिला) की ओलंपिक में वापसी हो रही है। टेबल टेनिस: 2020 टोक्यो ओलंपिक में मिक्स्ड डबल्स को जोड़ा गया है।

जूडो: जूडो खेल 1964 में ओलंपिक में आ गया था, लेकिन इस बार मिक्स्ड टीम इवेंट है।

स्वीमिंग: इस साल स्वीमिंग में एक नया बदलाव लाया गया है। 800 मीटर की रेस को पुरुषों के इवेंट में शामिल किया गया है। जबकि 1,500 फ्रीस्टाइल इवेंट महिला प्रतियोगिता में शामिल हुई है।
वॉटर पोलो: रियो ओलंपिक में वॉटर पोलो में 8 महिला टीमों ने भाग लिया था। इस बार महिलाओं की दो नई टीमों के साथ यह संख्या 10 होगी।

कयाक: 2020 टोक्यो ओलंपिक में कयाक खेल में भी महिलाओं के 3 इवेंट बढ़ाकर पुरुष खेलों से 3 इवेंट कम कर दिए गए है। महिलाओं के इवेंट में कयाक सिंगल 200 मीटर, कयाक डबल्स 500 मीटर इवेंट को जोड़ा गया है।

रोइंग: रोइंग खेल में पुरुषों के हल्के चार इवेंट को 2020 ओलंपिक से हटा दिया गया है जबकि महिलाओं के चार इवेंट्स जोड़े गए हैं। 1966 के बाद ओलंपिक रोइंग कार्यक्रम में यह पहला बदलाव है।
आर्चरी: 1972 से शामिल इस खेल में इस बार मिक्स्ड टीम इवेंट भी शामिल किया गया है।

बॉक्सिंग: महिला खिलाड़ियों की संख्या को 3 से बढ़ाकर 5 कर दिया है जबकि पुरुष खिलाड़ियों की संख्या 10 से आठ कर दी गई है। यह फ़ैसला लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

भारत के कितने और कौन खिलाड़ी ओलंपिक के लिए क्वॉलीफ़ाई कर चुके हैं?

भारत के अब तक 77 से ज़्यादा खिलाड़ियों ने ओलंपिक के लिए क्वॉलीफ़ाई कर लिया है।
तीरंदाज़ी

1. तरुणदीप राय, पुरुष रिकर्व एकल तीरंदाज़ी

2. अतनु दास, पुरुष रिकर्व एकल तीरंदाज़ी

3. प्रवीण जाधव, पुरुष रिकर्व एकल तीरंदाज़ी

4. दीपिका कुमारी, महिला रिकर्व एकल तीरंदाज़ी

3 पुरुष खिलाड़ी बतौर टीम टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लेंगे।

एथलेटिक्स

भारत के जैवलिन थ्रोअर, नीरज चोपड़ा और शिवपाल सिंह से भारत को ओलंपिक में पदक कि उम्मीद होगी।
मार्च 2019 में के।टी इरफ़ान ने 20मी। रेस वॉक में क्वालीफ़ाई किया और टोक्यो का टिकट पाने वाले पहले भारतीय एथलीट बनें थे।

4x400 मिक्स्ड रिले में जिस भारतीय टीम ने क्वालीफ़ाई किया है उसमें एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले मोहम्मद आनस भी हैं।

यह टीम साल 2020 के वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में तीसरे स्थान तक पहुंची थी।

1. के.टी. इरफान, 20 मी. पुरुष एकल रेस वॉक
2. संदीप कुमार, 20 मी. पुरुष एकल रेस वॉक

3. राहुल रोहिल्ला, 20 मी. पुरुष एकल रेस वॉक

4. अविनाश साबले, 3000 मी. पुरुष एकल स्टीपलचेज़

5. मुरली श्री शंकर, पुरुष एकल लॉन्ग जंप

6. नीरज चोपड़ा, पुरुष एकल जेवलिन थ्रो

7. शिवपाल सिंह, पुरुष एकल जेवलिन थ्रो

8. कमलप्रीत कौर, महिला एकल डिस्कस थ्रो

9. भावना जट, महिला एकल 20किमी. रेस वॉक
10. प्रियंका गोस्वामी, महिला एकल 20किमी. रेस वॉक

11. 4x400 मिक्स्ड रिले

बॉक्सिंग

1. मैरी कॉम, (महिला 51kg)

2. विकास किशन (पुरुष, 69kg)

3. लोवलिना बोरगोहैन (महिला, 69 kg)

4. आशीष कुमार (पुरुष, 75 kg)

5. पूजा रानी, (महिला, 75 kg)

6. सिमरनजीत कौर (महिला, 60 kg)

7. सतीश कुमार (पुरुष, 91 kg)

8. अमित पंघल (पुरुष, 52 kg)
9. मनीष कौशिक, (पुरुष, 63 kg)

फ़ेंसिंग

भारत की तरफ़ से पहली बार भवानी देवी ने फ़ेंसिंग इवेंट के लिए क्वालीफ़ाई किया है।

मार्च में हंग्री में हुए बुडापेस्ट सबरे विश्व कप में उन्होंने टिक्यो का टिकट पाया।

भवानी देवी तलवारबाजी की सेबा विधा में खेलती हैं।

हॉकी

भारतीय महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई किया।
16-16 खिलाड़ियों की इन टीमों ने नवंबर 2019 में क्वालीफ़ाई किया था।

भारतीय पुरुष हॉकी टीम इस वक़्त विश्व रैंकिंग में चौथे नंबर पर है ,वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम तीसरी बार ओलंपिक खेलने गई है।

शूटिंग

1. अंजुम मुगदिल, 10मी। महिला एकल एयर राइफ़ल

2. अपूर्वी चंदेला, 10मी। महिला एकल एयर राइफ़ल

3. दिव्यांश सिंह पनवर, 10मी। पुरुष एकल एयर राइफ़ल
4. दीपक कुमार, 10मी। पुरुष एकल एयर राइफ़ल

5. तेजस्विनी सावंत, 50मी। महिला एकल 3 पोजीशन राइफल

6. संजीव राजपूत, 50मी। पुरुष एकल 3 पोजीशन राइफ़ल

7. ऐश्वर्या प्रताप सिंह तोमर, 50मी। पुरुष एकल पोजीशन राइफ़ल

8. मनु भाकर, 10मी। महिला एकल एयर पिस्टल

9. यशस्विनी सिंह देसवाल, 10मी। महिला एकल एयर पिस्टल

10. सौरभ चौधरी, 10मी। पुरुष एकल एयर पिस्टल
11. अभिषेक वर्मा, 10मी। पुरुष एकल एयर पिस्टल

12. राही सरनोबत, 25मी महिला एकल पिस्टल

13. चिंकी यादव, 25मी। महिला एकल पिस्टल

14. अंगद वीर सिंह बाजवा, पुरुष एकल स्कीट

15. मैराज अहमद ख़ान, पुरुष एकल स्कीट

टेबल टेनिस

1. शरत कमल

2. जी. साथियान

3. सुतीर्थ मुखर्जी

4. मानिका बत्रा
शरत कमल ने चौथी बार ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई किया है।

शरत कमल और मनिका बत्रा मिक्स्ड डबल्स में भी खेलेंगे।

टोक्यो ओलंपिक में महिला कुश्ती में विनेश फोगाट से काफ़ी उम्मीदें हैं।

कुश्ती

1. विनेश फोगाट, महिला एकल फ़्री स्टाइल (53kg)

2. बजरंग पुनिया, पुरुष एकल फ़्री स्टाइल (65kg)

3. रविकुमार दहिया, पुरुष एकल फ़्री स्टाइल (57kg)
4. दीपक पुनिया, पुरुष एकल फ़्री स्टाइल (86kg)

बैडमिंटन

2 मार्च से शुरू हुए बैडमिंटन क्वालीफ़ायर मुक़ाबलों (स्विस ओपन) के ज़रिए अबतक कोई भी भारतीय खिलाड़ी टोक्यो ओलंपिक में जगह नहीं बना पाया है। हालांकि पीवी सिंधु का प्रदर्शन और खिलाड़ियों के मुक़ाबले अच्छा रहा है इसलिए उनसे उम्मीद की जा रही है। वहीं साइना नेहवाल, किदांबी श्रिकांत, चिराग शेट्टी और सात्विक रंकीरेड्डी की भी क्वालीफ़ाई करने की उम्मीद है। 1-6 जून तक चलने वाला सिंगापुर ओपन आखिरी बैडमिंटन क्वालीफ़ायर टूर्नामेंट होगा। साल के सभी मुकाबलों के बाद (जो ओलंपिक क्वालीफ़ाई के लिए चुने गए हैं) 15 जून को जो आखिरी रैंकिंग आएगी, उसके आधार पर चयन होगा।
इक्वेस्टेरियन

दो दशक में ऐसा पहली बार होगा जब ओलंपिक खेलों में इक्वेस्टेरियन (घुड़सवारी) में कोई खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। एशियन गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट फवाद मिर्ज़ा ने टोक्यो ओलंपिक-2021 के लिए क्वालीफ़ाई किया। उन्होंने इससे पहले एशियन गेम्स में 36 साल से चला आ रहा पदकों का सूखा खत्म किया था।

अभी वेटलिफ़्टिंग में मीराबाई चानू का क्वॉलीफ़ाई होना बाकी है। एशियन वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप में वह अपना दम लगाएंगीं, तो तीरंदाज़ी, रोइंग में प्रतिस्पर्धा होनी बाकी है। वहीं जिमनास्टिक में दीपा कर्माकर की ओलंपिक में पहुंचने की उम्मीद कम है क्योंकि कोरोनावायरस महामारी के कारण दो विश्व कप सीरीज रद्द हो चुकी हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक महासंघ (एफआइजी) ने मार्च में होने वाले एक अन्य विश्व कप को स्थगित कर दिया है।
ऐसे में अब कुछ ही मुक़ाबले बचेंगे जिसमें दीपा कर्माकर को भाग लेने का मौका मिल सकता है। जिमानस्ट की ओलंपिक क्वॉलीफ़िकेशन कि आखिरी तारीख 29 जून है।

कोविड-19 के कारण नियमों में बदलाव

कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए 33 पन्नों कि एक रूलबुक जारी कर कुछ बातें साफ की गई हैं, जैसे

अंतराष्ट्रीय प्रशंसकों के लिए टोक्यो ओलंपिक केवल टीवी तक सीमित रहेगा। टोक्यो ओलंपिक के खेल केवल स्थानीय लोगों के लिए खुले रहेंगे। लेकिन उनको भी कोरोना प्रोटोक़ॉल्स को गंभीरता से लेना होगा।
प्रशंसकों को सख्त तौर पर गाना या नाचकर जश्न मनाने के लिए मना किया गया है।
अंतराष्ट्रीय वॉलंटियर भी नहीं आ सकेंगे। इसका मतलब है भारत को अपने ओलंपिक स्टाफ कटौती करनी पड़ सकती है।
खिलाड़ियों को जापान पहुंचते ही 14 दिन क्वारंटीन नहीं होना पड़ेंगा और सीधा ट्रेनिंग कैंप में जाने कि अनुमति होगी, हालांकि उनके पास कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट होनी अनिवार्य है।
खिलाड़ियों का हर चौथे दिन कोरोना टेस्ट होगा। अगर कोई पॉजिटिव पाया जाएगा तो उसे प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा। टेस्ट कितनी बार होंगे, यह नियम बदले भी जा सकते हैं
खिलाड़ियों के लिए कोरोना वैक्सीन लेना अनिवार्य नहीं होगा।
खिलाड़ियों का टूरिस्ट वाली जगहें, रेस्टोरेंट, बार जाना वर्जित होगा।
हालांकि इन सबके बीच 1,50,000 कंडोम खिलाड़ियों को बांटने की योजना है, जिसमें कम से कम लोगों से संपर्क रखने की हिदायत भी साथ रहेगी।

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