असदउद्दीन ओवैसी ने इंडिया गेट के सारे 'नंबर' ग़लत बताए? फ़ैक्ट चेक

BBC Hindi| Last Updated: शनिवार, 20 जुलाई 2019 (11:56 IST)
प्रशांत चाहल
फ़ैक्ट चेक टीम, बीबीसी न्यूज़

सोशल मीडिया पर ये दावा किया जा रहा है कि 'दिल्ली स्थित पर भारत की आज़ादी के लिए अपनी जान गंवाने वाले लोगों के नाम लिखे हुए हैं जिनमें से 65 फ़ीसदी नाम हिन्दुस्तान के मुसलमानों के हैं'।
जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया है, उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुसलमीन पार्टी के चीफ़ और हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के सांसद असदउद्दीन ओवैसी के एक हालिया का हवाला दिया है। ओवैसी ने मुंबई के चांदीवली इलाक़े में 13 जुलाई 2019 को यह भाषण दिया था जिसके कुछ हिस्से अब सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं।
अपने इस भाषण में ओवैसी ने दावा किया था, "जब मैं इंडिया गेट गया तो मैंने वहां उन नामों की फ़ेहरिस्त को देखा जिन्होंने हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए अपनी जान गंवा दी। उस इंडिया गेट पर 95,300 लोगों के नाम लिखे हुए हैं। आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि उनमें से 61,945 सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं। यानी 65 फ़ीसदी सिर्फ़ मुसलमानों के नाम हैं।

इसके बाद ओवैसी ने सभा में मौजूद लोगों से कहा कि बीजेपी, आरएसएस और शिवसेना का कोई आदमी अगर उनसे कहे कि वो देशभक्त नहीं हैं, तो वो उसे इंडिया गेट देखकर आने को कहें।
13 जुलाई को 'मीम न्यूज़ एक्सप्रेस' नाम के एक यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड हुए उनके इस भाषण को सवा लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और उनके हवाले से सोशल मीडिया यूज़र्स अब इस दावे को वॉट्सऐप पर सर्कुलेट कर रहे हैं, लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि सांसद असदउद्दीन ओवैसी का ये दावा बिलकुल ग़लत है।

कितने सैनिकों के नाम?
दिल्ली सरकार की वेबसाइट के अनुसार नई दिल्ली में स्थित 'इंडिया गेट' साल 1931 में बनकर तैयार हो गया था। यानी भारत की आज़ादी से क़रीब 16 साल पहले।
42 मीटर ऊंचा ये स्मारक अंग्रेज़ों के शासन के दौरान ब्रिटिश आर्मी के लिए लड़ते हुए मारे गए भारतीयों की याद में बनाया गया था जिसे पहले 'ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल' कहा जाता था।

वेबसाइट के मुताबिक़ इस स्मारक पर 13,516 भारतीय सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। इनमें 1919 के अफ़गान युद्ध में मारे गए भारतीय सौनिकों के नाम भी शामिल हैं।

वहीं 'कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्ज़ कमीशन' द्वारा तैयार की गई लिस्ट के अनुसार इंडिया गेट पर 13,220 सैनिकों के नाम लिखे हैं जो 1914 से 1919 के बीच ब्रितानी शासन के लिए लड़े थे।
कमीशन ने सैनिकों की इस लिस्ट को उनके सेवा-क्षेत्र (आर्मी, एयर फ़ोर्स और नेवी) के आधार पर बांटा है जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं।

'कॉमनवेल्थ वॉर ग्रेव्ज़ कमीशन' के बुनियादी उसूलों के अनुसार इन सैनिकों के बीच उनके पद, नस्ल और धर्म के आधार पर कभी कोई अंतर नहीं किया गया।

सरकारी डेटा के अनुसार साल 1921 में इंडिया गेट की नींव रखी गई थी। इसे एडवर्ड लुटियन्स ने डिज़ाइन किया था और 10 साल बाद वायसरॉय लॉर्ड इरविन ने इसे भारत के लोगों को समर्पित कर दिया था।
स्वतंत्रता सेनानी?

पर क्या इन सैनिकों को 'स्वतंत्रता सेनानी' कहा जा सकता है?

इसके जवाब में इतिहासकार हरबंस मुखिया कहते हैं, "ये बात सही है कि ब्रिटिश आर्मी के लिए भारतीय लोग अफ़्रीका, यूरोप और अफ़गानिस्तान में बहादुरी से लड़े। पर वो लड़ाई औपनिवेशिक शासन के ख़िलाफ़ नहीं थी। वो ब्रिटिश शासन की तरफ से लड़ रहे थे। उन्हीं की याद में अंग्रेज़ों ने ये स्मारक बनवाया। ये एक ऐतिहासिक तथ्य है कि इंडिया गेट भारतीयों द्वारा बनवाया गया स्मारक नहीं है। ऐसे में उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कैसे कहा जा सकता है।
वो कहते हैं, "आज़ादी की लड़ाई यूं तो दशकों लंबी रही। कई मोर्चों पर इसे लड़ा गया। लेकिन जिस वक़्त अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारतीय लोगों की लड़ाई ने निर्णायक मोड़ लिया, उस समय इंडिया गेट बन चुका था।

फ़ेक न्यूज़ का शिकार हुए ओवैसी?
इतिहासकार मानते हैं कि हिन्दुस्तान की आज़ादी के संग्राम में सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया था और मुस्लिम समुदाय के कई ऐसे लोग हुए जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में अपनी जान दी। लेकिन आज़ादी की लड़ाई और इंडिया गेट से संबंधित ओवैसी के इस दावे को हमने ग़लत पाया।
हमने पाया कि इंडिया गेट पर 90 हज़ार से ज़्यादा सैनिकों के नाम होने और उनमें 65 फ़ीसदी मुसलमानों का नाम होने की अफ़वाह काफ़ी समय से सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है।

साल 2017 और 2018 के कुछ पोस्ट हमें मिले जिनमें यही बातें लिखी हैं।

तो क्या असदउद्दीन ओवैसी सोशल मीडिया पर फैली फ़ेक न्यूज़ का शिकार बने? या वजह कुछ और थी? इस बारे में हमने उन्हीं से बात की।

ओवैसी ने कहा कि "मैंने अपने भाषण में यह बात कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की नई किताब 'विज़िबल मुस्लिम, इनविज़िबल सिटीज़न' से पढ़कर कही थी, लेकिन तथ्यों को लेकर मुझे थोड़ा अधिक सतर्क रहना चाहिए था। अपनी पड़ताल में हमने पाया कि कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नई किताब के 55-56वें पन्ने पर यही दावा किया है।
उन्होंने लिखा है कि 95 हज़ार से ज़्यादा फ़्रीडम फ़ाइटर्स के नाम इंडिया गेट पर लिखे हुए हैं, जिनमें 61 हज़ार से ज़्यादा मुस्लिम नाम हैं, यानी क़रीब 65 फ़ीसदी। लेकिन सरकारी डेटा और कॉमनवेल्थ कमीशन की लिस्ट के अनुसार ये दावा सही नहीं है।

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