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नए आनंद बाज़ार की नींव डालने वाला फैसला
यह तथ्य हमें एक बड़े विस्मय से भरता है कि इन दिनों देशभर के इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में एक ऐसे महाजश्न का माहौल ... -
भारतीय समाज की प्रकृति बावलेपन से लबरेज
यह आकस्मिक नहीं कि हमारे इस कमजोर बौद्धिक आधार वाले मौजूदा भारतीय समाज की प्रकृति पिछले कुछ दशकों से एक निरे बावलेपन से ... -
खाने के बाद खप्पर फोड़ने वाला महा-ब्राह्मणवाद
एक नव-स्वतंत्र राष्ट्र में, कलाओं और साहित्य के मध्य, 'सांस्थानिकता' का, क्या और कैसा अंतर्ग्रथित संबंध हो, इसको लेकर ... -
रोमन में हिन्दी बनाम हिन्दी की हत्या
सातवें दशक के उत्तरार्द्ध में प्रकाशित एल्विन टॉफलर की पुस्तक 'तीसरी लहर' के अध्याय 'बड़े राष्ट्रों के विघटन' को पढ़ते ... -
पोर्न के पँसारियों के पैंतरे और पक्ष
सर्वोच्च न्यायालय में सन 2013 में दायर की गई, एक जनहित याचिका को अपने संज्ञान में लेते हुए, केन्द्र सरकार ने कोई 857 ... -
सुनें आप, मेरे मन की बात
वक्त ज्यादा नहीं लगा और यह होने लगा कि आखिरकार, धीरे-धीरे, हिन्दी की वह पर्त झड़ने लगी, जो हमारे प्रधानमंत्री की भाषा ... -
'मैगी की बहस के बहाने, कुछ असहज प्रश्न'
मैगी, पिछले दशकों में बच्चों और युवाओं के आस्वाद पर आधिपत्य जमाकर निर्द्वन्द् रूप से 'तुरन्ता' भोज्य व्यंजनों की कतार ... -
स्मृति शेष श्रीराम ताम्रकर : अधूरी इच्छा का पूर्ण श्रीराम
श्रीराम ताम्रकर हिंदी सिने पत्रकारिता के ऐसे और एक मात्र व्यक्ति रहे हैं जिन्हें भारतीय और विश्व सिनेमा का संदर्भ ... -
सांस्कृतिक धूर्तता का वैज्ञानिक मुखौटा
हम यदि गौर से देखें तो पिछले पाँच सौ साल के कालखंड में भारतीयों के बीच शायद ही किसी शब्द को इतना अधिक गौरवान्वित किए ... -
इसलिए विदा करना चाहते हैं हिन्दी
दुनिया की हर भाषा की जिंदगी में एक बार कोई निहायत ही निष्करुण वक्त दबे पाँव आता है और 'उसको बोलने वालों' के हलक में हाथ ... -
हमारे समय में भ्रष्टाचार का भाष्य
आज जितना भ्रष्टाचार सार्वजनिक क्षेत्र में बताया जाता है, क्या निजी क्षेत्र में उससे कम है? क्या दोनों के बीच एक गहरी ...
