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अन्याय का प्रतिकार करोगे तो होगा तिलक
रत्नागिरि की मराठी शाला के प्रधानाचार्य गंगाधर पंत का बेटा बाल परीक्षा में हल करने के लिए कठिन सवाल ही चुनता था, ... -
आज का गुरुमंत्र : पुत्रदा एकादशी पर पढ़ें रोचक आलेख...
यदि आप अपने कुल, परिवार का नाम आगे बढ़ाना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप कुछ अलग करें, करके दिखाएं। तभी आपकी भी अपनी अलग ... -
गुरु मंत्र : गुरु से है शिष्य, शिष्य से है गुरु...
सिकंदर अपने गुरु अरस्तु के साथ एक बार बरसात के दिनों में कहीं जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक उफनता हुआ नाला मिला। इस ... -
जॉन की बात मानोगे तो नहीं जाएगी जान
गाँव की चौपाल पर ग्राम प्रधान अपने कुछ साथियों के साथ हुक्का पी रहे थे। उनके साथ उनका पोता भी बैठा हुआ था। उनको हुक्का ... -
बाहर हो शेर तो घर में भीगी बिल्ली क्यों
एक बार दरबार में देर से पहुँचने पर बीरबल ने अकबर को सफाई दी- हुजूर, पत्नी के काम से बाजार चला गया था, इसलिए देर हो गई। ... -
जीवन को देना है नए आयाम तो करो व्यायाम
एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल को एक बकरी देते हुए कहा- हम चाहते हैं कि आप इसे एक महीने अपने पास रखें। इस दौरान इसे दोगुनी ... -
जब नहीं है ईमान तो क्यों रखते हो ईमान
एक दूधिया यानी दूध वाले का एक हलवाई से विवाद हो गया। मामला हाकिम के सामने पहुँचा। वह बड़ा ही भ्रष्ट था। हलवाई को यह बात ... -
आदमी को है खाता लंबा खिंचता खाता
एक बार एक व्यापारी को काफी घाटा हुआ। उसने एक महाजन से कर्ज लेकर व्यापार को आगे बढ़ाया। जल्द ही सब कुछ ठीक हो गया। कर्ज ... -
यदि चलाना है दुकान तो बिखेरो मुस्कान
अरब के सुल्तान सफर में हमेशा मुल्ला नसरुद्दीन को अपने साथ ले जाते थे। एक बार उनका कारवाँ दूरदराज के एक छोटे से गाँव से ... -
दो पाटन के बीच में साबुत बचा है कोय
एक नवविवाहित युवक अपनी माँ और पत्नी के बीच बढ़ते मनमुटाव से बेचैन था। 'बेटा, बहू को समझा लेना।' 'देखिए, माँ को समझा ... -
वाहवाह की चाह कहीं निकलवा न दे आह
एक जमींदार को दुनियादारी की बहुत फिक्र रहती थी। वह दिन-रात दूसरों की समस्याएँ सुलझाता रहता था। आसपास के गाँवों में होने ... -
खुदा के बच्चे, तू कब बड़ा हो गया!
पंडित जवाहरलाल नेहरू सन् 1939 में एक बार बड़ौदा के दौरे पर थे। वे वहाँ रेहाना तैयबजी के घर पर ठहरे। रेहाना के साथ उनकी ... -
जो घिसते हैं कलम, उन्हें घिसना पड़ता है कम
फ्रांस के प्रसिद्ध लेखक विक्टर ह्यूगो एक बार सेलून में बैठकर दाढ़ी बनवा रहे थे। अचानक वे नाई को रोकते हुए बोले- थोड़ी देर ... -
मुसीबत में हो फँसे तो ऑर्डर कर दो पिज्जा
एक बहुत मोटे पेटू पंडित थे। पितृपक्ष में एक यजमान ने उन्हें एक दिन इस शर्त पर न्यौता दिया कि उस दिन वे केवल उसी के यहाँ ... -
क्यों हो इससे अंजान सबसे पहले हो इंसान
बात 1 जनवरी 1966 की है। दिल्ली में 7, सफदरजंग रोड के सामने धवल निवास के बगीचे में प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी। दो सौ से ... -
छीलने के लिए जरूरी है छिलना
आम का मौसम था। बादशाह अकबर अपनी बेगम और बीरबल के साथ बैठकर चूसा आम का मजा ले रहे थे। तभी अकबर को एक ठिठोली सूझी। वे ... -
प्रतिकूल है तो लाल बत्ती अनुकूल है तो हरी बत्ती
एक बार कौशल नरेश मल्लिक रथ पर सवार होकर एक सँकरे पुल से गुजर रहे थे। तभी सामने से एक और रथ आ गया। इस पर सामने वाले रथ ... -
जग जगेगा तभी जब आप जाओगे जग!
युद्ध में हर तरफ से मुँह की खा रहे रावण ने अपने सेवकों को आदेश दिया कि वे कुंभकर्ण को जगाकर लाएँ। कुंभकर्ण को ब्रह्माजी ... -
यदि पास है मीठी-कड़वी घुट्टी तो समझो असफलता की छुट्टी
हजरत लुकमान बहुत ही भले इंसान थे। सभी उन्हें बहुत पसंद करते थे, यहाँ तक कि उनके मालिक भी। घर में कोई खाने-पीने या ... -
मन के चोर को भगाओगे तभी तो चुराओगे मन
इंग्लैंड के प्रसिद्ध कवि वायरन एक बार स्वास्थ्य लाभ के लिए जेनेवा में ठहरे हुए थे। वहाँ उनके बचपन का एक दोस्त उनसे ...
