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नरेंद्र मोदी के बाद अगला पीएम अमित शाह या योगी आदित्यनाथ, सटीक भविष्यवाणी

amit shah and yogi adityanath
Next pm after modi in bjp: भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यही है- "मोदी के बाद कौन?" साल 2026 का जून चल रहा है और विपक्ष के सभी समीकरण बदल गए हैं। तृणमूल, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, सीपीएम, उद्धव गुट, पवार गुट सभी कमजोर हो चले हैं। कांग्रेस ने जरूर थोड़ी बढ़त बनाई है, लेकिन 'मूड ऑफ द नेशन' (2026) जैसे बड़े सर्वे, राजनीतिक पंडितों के गणित और सितारों की चाल को मिला दें, तो भविष्य की धुंधली तस्वीर कुछ साफ होने लगती है। आइए समझते हैं सर्वे, ज्योतिष और राजनीतिक‍ विश्लेषण के अनुसार कि आत्रखर रेस में कौन कहाँ खड़ा है।
 

1. भाजपा का आंतरिक दंगल: शाह बनाम योगी

भाजपा के भीतर उत्तराधिकार की जंग मुख्य रूप से दो 'मास लीडर्स' के इर्द-गिर्द सिमटती हुई नजर आ रही है- 1. अमित शाह और 2. योगी आदित्यनाथ।
 

अमित शाह: चाणक्य की दावेदारी (संभावना- 99%)

प्रबल दावेदार: इन्हें पीएम मोदी का सबसे स्वाभाविक और विश्वसनीय उत्तराधिकारी माना जाता है। संगठन से लेकर सरकार तक, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक शाह का अनुभव सबसे व्यापक है।
सितारों का साथ: ज्योतिषीय गणना के अनुसार शाह की कुंडली में 2040 तक गुरु की महादशा है। वहीं, अक्टूबर 2026 से 2032 तक मंगल की महादशा उनके सियासी ग्राफ को और ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
शनि की अग्निपरीक्षा: मेष राशि होने के कारण शाह पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो चुका है। यह गोचर या तो उन्हें सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठाएगा या फिर अप्रत्याशित नुकसान देगा।
चुनौती: संघ और संगठन का एक धड़ा योगी को पसंद करता है, जो शाह के लिए आंतरिक चुनौती है। हालांकि, शाह का पलड़ा इसलिए भारी है क्योंकि उनके पास केंद्र सरकार का लंबा अनुभव है, जो योगी के पास नहीं है। केवल स्वास्थ्य या कोई बहुत बड़ा राजनीतिक भूकंप ही उनका रास्ता रोक सकता है।

योगी आदित्यनाथ: भगवा फायरब्रांड का बढ़ता कद (संभावना- 60%)

बुलडोजर छवि: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अपनी सख्त प्रशासनिक शैली, बुलडोजर और प्रखर हिंदुत्ववादी छवि के कारण जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
राजयोग और सितारे: योगी की कुंडली में शनि-शुक्र का परिवर्तन योग है और वर्तमान में शुक्र की महादशा सक्रिय है। लाल किताब के अनुसार, 2030 तक गुरु और सूर्य की महादशाएं मिलकर 'प्रबल राजयोग' का निर्माण कर रही हैं। सितंबर 2026 से नवंबर 2029 के बीच उनका केंद्र की राजनीति में आना तय माना जा रहा है।
यूपी का बदलता गणित: व्यावहारिक राजनीति की बात करें तो उत्तर प्रदेश के मौजूदा हालात बदल रहे हैं। जातिगत समीकरणों को साधने के लिए भाजपा योगी को दिल्ली बुलाकर यूपी की कमान किसी और को सौंप सकती है। हाल ही में पंकज चौधरी (जिनका झुकाव केंद्रीय नेतृत्व की तरफ है) को यूपी भाजपा अध्यक्ष बनाया जाना इसी बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
चुनौती और चेतावनी: कुंभ राशि होने के कारण योगी पर साढ़ेसाती का अंतिम दौर चल रहा है, जो जून 2027 में खत्म होगा। हालिया कुछ विवादों (यूजीसी, एसआईआर और शंकराचार्य प्रकरण) ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी की हैं। ज्योतिषीय निष्कर्ष एक बड़ी चेतावनी भी देता है—"यदि योगी जी को रोकने की जबरन कोशिश हुई, तो संघ और भाजपा के भीतर बड़ी बिखराव की स्थिति बन सकती है।"
 
भाजपा के अन्य संभावित चेहरे: नितिन गडकरी, एस जयशंकर, शिवराजसिंह चौहान और निर्मला सीतारमण। (संभावना- 40%)

विपक्ष की बिसात: (संभावना- 30%)

पिछले कुछ वर्षों की यात्राओं और रणनीतियों से राहुल गांधी की छवि में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। 2026 के सर्वे स्पष्ट करते हैं कि वे विपक्ष की ओर से पीएम पद का इकलौता और सबसे मजबूत चेहरा हैं। ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और एम.के. स्टालिन जैसे कद्दावर क्षेत्रीय नेताओं रेस से बाहर हो गए हैं, लेकिन प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव अभी भी रेस में बने हुए हैं। 
 

2029 का रण, क्या होगा भविष्य: 

संवैधानिक तौर पर असली फैसला 2029 के आम चुनाव में होगा। भाजपा के भीतर यह लड़ाई 'शाह बनाम योगी' के इर्द-गिर्द घूमेगी, जबकि विपक्ष प्रियंका या राहुल गांधी के चेहरे पर दांव लगा सकता है।
 
फिलहाल, अमित शाह अनुभव और समीकरणों में आगे दिख रहे हैं, लेकिन योगी के पीछे खड़ा जनसमर्थन और संघ का दबाव इस रेस को बेहद दिलचस्प बना देता है। कुछ भी हो लेकिन हमारी भविष्यवाणी कहती है कि अंत में जीत अमित शाह की ही होगी। हालांकि जनवरी 2026 के ताजा सर्वे बताते हैं कि यदि आज भी चुनाव करा दिए जाएं, तो देश के 55% लोग नरेंद्र मोदी को ही प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं। राहुल गांधी 27% के साथ दूसरे नंबर पर हैं। यानी लोकप्रियता के मामले में मोदी अब भी रेस से बहुत आगे हैं।
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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