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क्या 2027-2028 में होगा सत्ता परिवर्तन? ज्योतिषीय गणनाएं दे रही हैं बड़े संकेत

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वर्ष 2018 से ही देश और दुनिया में बड़ा परिवर्तन चल रहा है। यह परिवर्तन अब तेज और खतरनाक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। हर देश में सत्ता परिवर्तन हो चला है। बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान सहित कई देश ऐसे भी हैं जहां पर जबरन सत्ता परिवर्तन किया गया। यदि हम भारत के राज्यों की बात करें तो वहां पर भी कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन हो गया है और अब भारत में ऐसे ग्रुप और संगठन हो चले हैं जो नेपाल और बांग्लादेश की तरह केंद्र की सरकार को पलटना चाहते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि वर्ष 2027 में ग्रहों का ऐसा परिवर्तन हो रहा है जिसके चलते भारत में कुछ बड़ा होने वाला है। चलिए जानते हैं कि ग्रह नक्षत्र क्या संकेत दे रहे हैं।
ज्योतिष शास्त्र और मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology - जो देशों और सरकारों पर ग्रहों के प्रभाव का अध्ययन करता है) के अनुसार, साल 2027 और 2028 को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से बेहद उथल-पुथल वाला और बड़े बदलावों का समय माना जा रहा है। कई बड़े ज्योतिषाचार्यों और गणनाओं के मुताबिक, इस दौरान ग्रहों की जो चाल बन रही है, वह देश-दुनिया में सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के मजबूत संकेत दे रही है।
 

1. शनि का नीच राशि (मेष) में गोचर (2027-2028)

शनि गोचर: मेदिनी ज्योतिष में शनि देव को जनता, लोकतंत्र और सत्ता के संतुलन का कारक माना जाता है। साल 2025-2026 में शनि मीन राशि में रहने के बाद, 2027 में अपनी नीच राशि 'मेष' में प्रवेश करेंगे।
असर: इतिहास गवाह है कि जब भी शनि देव नीच राशि या आक्रामक राशियों में जाते हैं, तब दुनिया भर में स्थापित सत्ताओं के खिलाफ जनता में असंतोष बढ़ता है। यह समय बड़े जन आंदोलनों, तख्तापलट या चुनाव के जरिए अचानक होने वाले सत्ता परिवर्तनों का आधार बनता है।
 

2. राहु और केतु का राशि परिवर्तन

राहु गोचर: राहु को भ्रम, अचानक होने वाली घटनाओं और राजनीति में बड़े उलटफेर का कारक माना जाता है। वर्तमान में यह कुंभ राशि में गोचर कर रहा है और 5 दिसंबर को यह शनि की मकर राशि में गोचर करेगा।
असर: 2027 और 2028 के दौरान राहु और केतु की स्थितियां राजनीतिक दलों के भीतर बड़ी फूट, नए गठबंधनों के उदय और पुराने स्थापित चेहरों के पीछे हटने के योग बनाती हैं। कई बार ऐसी ग्रह स्थिति में ऐसे चेहरे सत्ता के शीर्ष पर पहुंचते हैं, जिनकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की होती। 

3. गुरु (बृहस्पति) की स्थिति और 'अतिचारी' चाल

असर: देवताओं के गुरु बृहस्पति जब अपनी गतियों में तेजी से बदलाव करते हैं या आक्रामक ग्रहों (जैसे मंगल या राहु) के प्रभाव में आते हैं, तो देश की न्यायपालिका, नीतियों और शासकीय प्रणालियों में बहुत बड़े सुधार या टकराव देखने को मिलते हैं। 2027-2028 में गुरु की स्थिति भी शासकों के लिए कड़ी परीक्षा वाली मानी जा रही है।

4. भारत की कुंडली (स्वतंत्र भारत का चार्ट)

15 अगस्त 1947 के अनुसार भारत की कुंडली वृषभ लग्न की है।
असर: वर्तमान और आने वाले समय की महादशा और अंतर्दशा के विश्लेषण बताते हैं कि देश के शीर्ष नेतृत्व या सरकार चलाने के तरीकों में 2027-2028 के आते-आते बहुत बड़ा वैचारिक और व्यावहारिक बदलाव आएगा। यह बदलाव केवल चेहरे बदलने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि शासन करने की पूरी व्यवस्था (System) में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है।
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5. नरेंद्र मोदी की कुंडली के ग्रह गोचर क्या कहते हैं?

पीएम मोदी की जन्म कुंडली वृश्चिक लग्न की है और उनकी राशि भी वृश्चिक है। वृश्चिक लग्न कुंडली के लग्न में मंगल और चंद्र बैठे हैं। मंगल और चंद्र की युति को महालक्ष्मी योग कहते हैं। इसी के साथ ही लग्नेश मंगल केंद्र में स्वराशिस्थ होकर 'रूचक' नामक पंच महापुरुष राजयोग बना है। मंगल छठे एवं प्रथम भाव का स्वामी होकर लग्न में स्थित हैं, इसलिए मोदी के शत्रु मोदी से कभी जीत नहीं पाएं। जिन लोगों ने भी उनसे सीधा सीधा पंगा लिया उनका भविष्य खतरे में आ गया है। मोदी जी के कुंडली में शत्रुहंता योग है। 
 
वर्तमान में पीएम मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है जो 29 नवम्बर 2021 से प्रारंभ होकर 29 नवम्बर 2028 तक रहेगी। गुरु की अंतर्दशा होने से दुनिया के सभी नेता मोदी को अपना नेता मानेंगे और दशम भाव में शुक्र के होने से चुनौतियां तो बहुत मिलेंगी परंतु गुरु के कारण उन सबसे पार पा लेंगे। 07/12/027 के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति में बदलाव होना प्रारंभ होगा और इसके बाद 2028 तक उनका पद पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा। इस बीच देश के पटल पर एक नए नेता के उदय होने की संभावना प्रबल है, जो देश की कमान संभालेगा। हालांकि इससे उलट कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि मोदी की कुंडली में मंगल इतना स्ट्रांग है कि उनके शत्रु कभी उनसे जीत नहीं पाएंगे।
 

ज्योतिषीय निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, 2027 और 2028 की ग्रह स्थिति यह साफ संकेत दे रही है कि वैश्विक स्तर के साथ-साथ भारत की राजनीति में भी एक 'युग परिवर्तन' या 'व्यवस्था परिवर्तन' की शुरुआत होगी। सत्ता की कमान उन ताकतों या चेहरों के पास जा सकती है जो लीक से हटकर सोचने वाले होंगे। 
 
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वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
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